Ayurveda for Immunity: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी मजबूत होना बहुत जरूरी है। इम्यूनिटी मजबूत होने से बीमारियों से बचाव होता है और शरीर हेल्दी रहता है। वहीं, अगर शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो, तो इससे वायरस और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, वे बार-बार बीमार पड़ते रहते हैं। अक्सर कई लोग इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए कई तरह की दवाइयों और पाउडर का सेवन करते हैं। लेकिन इनके सेवन से लंबे समय में सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। अब सवाल यह उठता है कि शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए? आप चाहें तो कुछ आयुर्वेदिक उपायों की मदद से इम्यूनिटी को मजबूत बना सकते हैं। आइये जानते हैं क्य हैं वो आयुर्वेदिक उपाय-
हल्दी दूध
आयुर्वेद में हल्दी को औषधीय गुणों का खजाना कहा जाता है। हल्दी एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है। हल्दी का सेवन करने से संक्रमण से बचाव होता है और शरीर की सूजन भी कम होती है। रोजाना सोने से पहले हल्दी वाला दूध पीने से नींद अच्छी आती है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है।
गिलोय
आयुर्वेद में गिलोय का इस्तेमाल औषधि के रूप में सदियों से किया जा रहा है। गिलोय में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। नियमित रूप से गिलोय का सेवन करने से आप संक्रमण और कई बीमारियों से बच सकते हैं। आप रोज सुबह खाली पेट गिलोय के जूस या काढ़े का सेवन कर सकते हैं।
अश्वगंधा
आयुर्वेद में अश्वगंधा का प्रयोग कई समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। अश्वगंधा तनाव के स्तर को कम करने में प्रभावी है। इसके नियमित सेवन से मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और इम्यूनिटी मजबूत होती है। आप रोजाना सोने से पहले एक चम्मच अश्वगंधा पाउडर का सेवन दूध या पानी के साथ कर सकते हैं।
काढ़ा
आयुर्वेद में काढ़े का प्रयोग शरीर में तमाम समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। काढ़ा कई तरह की जड़ी-बूटियों और मसालों को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भरपूर मात्रा में होते हैं। यह शरीर की सूजन को दूर करने में मदद करता है। नियमित रूप से काढ़ा पीने से सर्दी-खांसी और जुकाम आदि समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। आप तुलसी, लौंग, अदरक और दालचीनी आदि का प्रयोग करके काढ़ा बना सकते हैं और अपनी इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं।
नस्य चिकित्सा
नस्य थेरेपी एक आयुर्वेदिक उपचार है जिसमें नासिका मार्ग में घी, तिल के तेल या नारियल के तेल की कुछ बूंदों को लगाना शामिल है। आयुर्वेद के अनुसार, नस्य 5 पंचकर्म उपचारों में से एक है। इसे नहाने से एक घंटे पहले खाली पेट किया जा सकता है। सिर को पीछे खींचकर लेट जाना चाहिए और प्रत्येक नथुने में तेल की 4-5 बूंदें डालनी चाहिए। यह न केवल नासिका मार्ग और साइनस के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह इम्यूनिटी को भी बनाए रखता है।
योग और प्राणायाम
योग और प्राणायाम करके भी आप इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं। नियमित रूप से प्राणायाम और योग करने से इम्यून सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। इसके लिए आप रोजाना 15-20 मिनट कपालभाति और भस्त्रिका आदि प्राणायाम का अभ्यास कर सकते हैं। इससे फेफड़े मजबूत बनते हैं और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।
