पिछले कुछ दिनों से वैशाली की तबियत कुछ ठीक नहीं थी। उसकी भूख कम हो चुकी थी। कभी कब्ज, तो कभी दस्त की शिकायत। पेशाब में भी जलन। इन सबसे ज्यादा जो तकलीफ उसे थी, वह थी पेट दर्द जो कभी-कभी असनीय हो जाता और वह बुरी तरह छटपटाने लगती। कुछ दिनों तक परिजनों ने घरेलू नुस्खे आजमाएं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अंततः उसे डाक्टर के पास ले गए। डाक्टर ने तमाम जांच, एक्स-रे, सोनोग्राफी आदि के बाद बताया कि उसके एपेंडिक्स में सूजन है और आॅपरेशन करना होगा। परिजन आॅपरेशन का नाम सुनते ही सकते में आ गए। डाक्टर ने बीमारी की गंभीरता बताते हुए कहा कि बीमारी काफी बढ़ चुकी है जिससे एपेंडिक्स तथा उसके पास काफी मात्रा में मवाद बन चुका है जो कि लिवर में प्रवेश कर सकता है। सूजन बढ़ने से एपेंडिक्स कभी भी फूट सकता है जो जानलेवा हो सकता है। 

परिजन समझदार थे। उन्होंने तत्काल निर्णय लेकर वैशाली का आॅपरेशन करा लिया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। लेकिन हर परिजन इतने समझदार नहीं होते और अक्सर ऑपरेशन के नाम से ही घबराते हैं। ऐेसे में वे बार-बार या तो डाक्टर बदलते हैं या फिर इलाज का तरीका यानी पैथी ही बदल देते हैं। इससे बीमारी की जटिलता बढ़ जाती है जो जानलेवा साबित होती है।

एपेंडिक्स क्या है

ऐसे में यह जानलेना जरूरी है कि एपेंडिक्स क्या है और शरीर में इसकी क्या भूमिका है। इसका पूरा नाम वर्मीफार्म एपेंडिक्स है। यह हमारी आंत का एक हिस्सा होता है जो कि पेट के दाहिनी ओर के निचले हिस्से में होता है। जहां छोटी आंत और बड़ी आंत एक दूसरे से मिलती हैं, वहीं यह स्थित होता है। मेडिकल साइंस में इस स्थान को केकम कहते हैं। एपेंडिक्स कैंचुए के आकार का होता है जो कि 10 सेंटीमीटर तक लंबा हो सकता है। मोटाई में यह आधा इंच के करीब होता है। एपेंडिक्स का शरीर में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं है। इसलिए इसे निरर्थक अंग भी कहा जाता है।

इसमें मांसपेशियों से बने वाल्ब होते हैं जो म्यूक्स जैसे अपशिष्ट पदार्थों को केकम में भेजते रहते हैं। इसका आकार एक नहीं जैसा जैसा होता है जिसका एक सिरा बंद तथा दूसरा केकम में खुलता है। अब यदि कोई वस्तु एपेंडिक्स के खूले सिरे को रोक देती है तो अपशिष्ट पदार्थों के लगातार निकलने तथा इस अंग में जीवाणुओं की उपस्थिति से एक दबाव पैदा हो जाता है। इस अंग पर जीवाणु हमला भी कर सकता हैं। इन सबसे एपेंडिक्स में सूजन आ सकती है। 

एपेंडिक्स में सूजन

एपेंडिक्स में आई सूजन को एपेंडिसाइटिस कहते हैं। यह सूजन दो तरह की होती है। इन्फेक्शन के कारण तथा एपेंडिक्स में कुछ फंसने के कारण। जब इसमें सूजन आ जाती है तो कुछ लक्षण उभरते हैं जिसमें सबसे बड़ा लक्षण पेट के दांए भाग में नीचे की तरफ दर्द होना है जो कि नाभि के आसपास से शुरू होता है। कुछ रोगियों को चक्कर आने लगते हैं और कुछ को उल्टियां होने लगती हैं। दस्त भी लग सकते हैं। पेशाब में जलन या उसके साथ खून निकलने की शिकयत भी हो सकती है। रोगी को चलने तथा खांसने में तकलीफ होती है। आमतौर पर बुखार नहीं होता, लेकिन एपेंडिक्स के फटने पर तेज बुखार आ सकता है।

एपेंडिसाइटिस  का कारण

एपेंडिसाइटिस का मूल कारण तो अज्ञात है, फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन में फाइबर की कमी इसका एक बड़ा कारण है। बच्चे एवं किशोर फास्टफूड के शौकीन होते हैं जिसमें रेशे की कमी होती है, इसलिए वे इसका शिकार अधिक होते हैं। इसके अलावा, आंत का कैंसर भी इसके लिए उत्तरदायी हो सकता है।

ऑपरेशन की जरूरत

एपेंडिसाइटिस का उपचार दवा गोली नहीं है, अंततः आॅपरेशन कराना ही होता है। दवा गोली से कुछ दिनों के लिए आॅपरेशन टाला अवश्य जा सकता है। लेकिन इमरजेंसी में रोगी की जान बचाने की खातिर तत्काल आॅपरेशन करना जरूरी होता है। यदि डाक्टर तत्काल आॅपरेशन कराने की सलाह देता है तो उसे मान लेना चाहिए।

यह निर्णय डाक्टर पर छोड़ देना चाहिए कि बीमारी दवा से ठीक हो सकती है या आपरेशन कराना होगा। शुरूआती दौर में दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे यह ठीक हो सकता है। लेकिन यदि बार-बार इसकी पुनर्रावृत्ति हो तो फिर रिस्क नहीं लेना चाहिए। यदि रोगी समय रहते आॅपरेशन नहीं कराता है या उसे टालते रहता है तो उसमें कई जटिलताएं पैदा होने लगती हैं, जैसे उसमें पस या मवाद पड़ जाना, गेंगरीन हो जाना और एपेंडिक्स का फूट जाना।

ऑपरेशन के तरीके

एपेंडिसाइटिस का आपरेशन दो तरह से किया जाता है। पहले तरीके में परंपरागत तरीका अपनाया जाता है। रोगी को बेहोश करके पेट को थोड़ा सा काटकर एपेंडिक्स के बाहर निकाल देते हैं तथा वहां टांके लगा देते हैं। इसमें परहेज भी लंबा चलता है जिसमें साइकिल चलाना भारी सामान उठाना आदि प्रतिबंधित होता हैं। आजकल दूरबीन पद्धति से भी एपेंडिसाइटिस का आॅपरेशन किया जाता है जिससे बहुत छोटे छेद से ऑपरेशन संपन्न कर दिया जाता है। परंपरागत आॅपरेशन की तुलना में यह अधिक प्रचलित है। आॅपरेशन चाहे जिस विधि से कराएं कुशल सर्जन से ही कराएं। आॅपरेशन के जरिए इसे निकाल देने से व्यक्ति की सेहत या सामान्य कामकाज में कोई परेशानी नहीं होती।

क्या करें

एपेंडिसाइटिस होने पर नीम हकीमों से बचें तथा विशेषज्ञ के पास जाएं। तरल पेय जैसे पानी, चाय, दूध, फलों का रस, छाछ आदि का सेवन करें। रेशेदार खाद्य पदार्थों का सेवन करें। पेट की मालिश कदापि न कराएं कब्ज दूर करने की दवा न लें।

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