क्या आप जानते हैं हमारी जीभ स्वाद के साथ साथ हमारी सेहत के बारे में भी बताती है। आयुर्वेद के अनुसार जीभ का संबंध शरीर के कई हिस्सों से होता है। यदि जीभ की सामान्य संरचना में आपको कुछ बदलाव (जैसे जीभ के ऊपर मैली सी परत जम जाना, जीभ किनारे से कटी- फटी सी नजर आना, जीभ के बीच में एक गहरी रेखा सी बन जाना, जीभ में छाले निकल आना आदि) नजर आते हैं तो वह आपके शरीर के अंदर वर्तमान में या भविष्य में होने वाली परेशानियों का संकेत दे रहे होते हैं। इन संकेतों को समझकर हम भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों से सतर्क हो सकते हैं तथा उसकी चिकित्सा करा सकते हैं।

जीभ पर सफ़ेद परत

एक स्वस्थ जीभ के ऊपर सफ़ेद रंग की हल्की सी पर्त होती है यदि यह परत मोटी हो जाती है तो इसका एक कारण पाचन तंत्र में गड़बड़ी हो सकता है। अपने खान पान में बदलाव करके तथा एक संतुलित आहार लेकर इस समस्या को खत्म किया जा सकता है।

जीभ का फीका रंग

सामान्य तौर पर जीभ गुलाबी रंग की होती है। परंतु यदि जीभ का रंग फीका है तो यह खून की कमी का संकेत हो सकता है। हीमोग्लोबिन के स्तर में कमी या एनीमिया इसका कारण हो सकता है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा के अनुसार ऐसा फेफड़े में किसी समस्या का संकेत हो सकते हैं।

जीभ का गहरा लाल रंग

जीभ का जरूरत से ज्यादा लाल रंग शरीर में विटामिन बी और आइरन की कमी की तरफ इशारा करता है। यदि जीभ का रंग बैंगनी सा है तो यह उच्च कोलेस्ट्रॉल के खतरे को बताता है इसके अलावा यह ब्रोंकाइटिस की समस्या का भी लक्षण हो सकता है।

जीभ में छाले होना

जीभ पर छाले होना बहुत ही आम समस्या है जिसका अनुभव हम सभी ने कभी न कभी किया है। जीभ के छाले कब्ज की तरफ इशारा करते हैं। इसका कारण तनाव, चिंता तथा हार्मोन में होने वाला बदलाव हो सकता है।

यदि आपको अपनी जीभ में कोई खास बदलाव महसूस हो रहा है तो देर न करें, जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

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