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करेला

कड़वे खाद्य पदार्थ निश्चित तौर पर ऐसी वस्तु नहीं होती, जिन्हें आप खाने की चाहत रखते हों, लेकिन आप को यह जानकर आश्चर्य होगा कि आपका शरीर इनको पाने का इच्छुक होता है और इसकी ओर इशारा भी करता है, जिन्हें शायद आप अब तक महसूस न कर सके हों।

कड़वे खाद्य पदार्थ अत्यधिक मात्रा में लिये गए मीठे खाद्य पदार्थों, जिन्हें हम सब खूब पसंद करते हैं और हमेशा ही थोड़ा और अधिक खा लेने की इच्छा रखते हैं, में संतुलन लाने में मददगार हैं। सुस्ती, मिठाइयों की लत और संभवतः हॉर्मोन से संबंधित कुछ समस्याओं या कोलेस्टेरॉल की समस्याओं से निजात दिलाने में भी ये सहायक हो सकते हैं।  

कड़वे खाद्य पदार्थ जैसे हरी पत्तीदार चीजें, कोको, जड़ी-बूटी व करेले आदि, इन सब में चर्बी कम करने वाले विटामिन (ए, डी, ई एवं के) के साथ-साथ सल्फर जैसे लीवर को मजबूत करने वाले पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ये सभी तत्व शरीर में पित्त के उत्पादन में लिए जरूरी हैं, जो सही ढंग से पाचन व लीवर के सुचारू ढंग से कार्य करने के जरूरी है।  लीवर द्वारा बेकार सामग्रियों को अलग करने के क्रम में सुचारु रूप से कार्य करने के लिए शरीर में पित्त का उत्पादन जरूरी है।  

अपने दैनिक आहार में कड़वे खाद्य पदार्थ को शामिल करना मुश्किल नहीं बल्कि वास्तव में बड़ा आसान है।आप पहले से ही ऐसी कई चीजें खा रहे होंगे लेकिन आपको इसका पता ही नहीं होगा।ब्रो्कली, गोभी, चार्ड, पालक, डन्डेलिअन (पीले फूलों वाला पौधा) साग (जूस के रूप में उत्तम), कच्चा कोको चूर्ण, बेल्जियन एंडिव (हरा पत्तीदार पौधा), धनिया एवं सलाद में इस्तेमाल होने वाली हरी पत्तियां जैसे रेडीचियो और अरुगुला आदि सबसे अधिक पोषक खाद्य पदार्थ हैं। यदि आप अत्यधिक मात्रा में कॉफी, प्रसंस्कृत चॉकलेट, शराब जैसे (अस्वास्थ्यकर) कड़वे खाद्य पदार्थों के शौकीन हैं तो याद रखिये कि ये खाद्य पदार्थ कड़वे और हरे स्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की तुलना में काफी नुकसानदेह होते हैं। 

कड़वी हर्ब्स के साथ लें क्लीनजिंग फूड प्रोडक्टस 

कड़वे खाद्य पदार्थों की खूबियों को और बढ़ाने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ लें, जो शरीर को अंदर से साफ करते हों। विटामिन सी से परिपूर्ण खाद्य पदार्थ, लीवर साफ करने वाले एंजाइम (तत्व) से परिपूर्ण खाद्य पदार्थ आदि कुछ सबसे अच्छे खाद्य पदार्थ हैं, जो कड़वे खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर सेवन करने से अधिकतम पोषक तत्व हासिल किये जा सकते हैं तथा इनसे बैक्टीरिया व विषैले तत्वों से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता है।

ऐसे भी इस्तेमाल कर सकते हैं इन्हें – 

  • सलाद सजाने के विकल्प के तौर पर हरे साग व नींबू का प्रयोग करें
  • ब्रोकोली या कैल (एक प्रकार की गोभी) को कटे हुए प्याज के साथ पकाएं
  • थोड़े चुकंदर या चुकंदर के साग को लहसून, अदरक व कासनी के साथ पका कर कम तेल वाला स्वादिष्ट व्यंजन बनाएं।
  • डेंडेलिअन के पत्ते, नींबू, अरुगुला, हरी धनिया तथा अजवायन के जूस से स्वादिष्ट टॉनिक तैयार करें।
  • थोड़े से पानी में नींबू के छोटे टुकड़े, थोड़ा अदरक, पालक, कैल, आधा संतरा, एक छोटा चम्मच कच्चा कोको तथा मिठास के लिए चीनी के बजाय थोड़ी मात्रा में तरल स्टेविया या रसभरी मिलाकर पीस कर मिश्रण तैयार कर लें।
करेला
कड़वी हर्ब्स में छिपी मिठास 4

सेहत के नजरिये से फायदे

  1. पोषक तत्वों के अवशोषण में मददगार: खाद्य पदार्थों में मौजूद कड़वे घटक पेट में गैस्ट्रिक एसिड के उत्पादन को उत्पेरित करता है।
  2. कड़वा खाद्य पदार्थ जीभ द्वारा स्वाद ग्रहण करने की प्रक्रिया को उत्प्रेरित करता है, जो आगे एंजाइमों के उत्पादन व पित्त के प्रवाह को उत्प्रेरित करता है। जितना सही ढंग से भोजन का पाचन होगा, आप खाद्य पदार्थों से उतना अधिक पोषक तत्व अवशोषित कर पाएंगे।
  3. टेस्ट बड (स्वाद ग्रंथि) के साथ मिठाई की इच्छा को नियंत्रित करता है: कड़वे खाद्य पदार्थ भोजन के प्रति चाहत को नियंत्रित करते हैं, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।
  4. शरीर को स्वच्छ करता है: कड़वे खाद्य पदार्थों में सल्फर आधारित यौगिक मौजूद होते हैं, जो लीवर द्वारा विषैले तत्वों को बाहर निकालने की प्रणाली को मजबूत करते हैं। 
  5. मेटाबॉलिज्म: कड़वे खाद्य पदार्थ जैसे ग्रीन टी का सेवन शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है चर्बी या मोटापा कम करने के लिए भी ग्रीन टी का सेवन किया जा सकता है- इससे वसा की कोशिकाओं में ग्लूकोज का संचार होता है। 
  6. शरीर में अवांछित कणिकाओं से लड़ने व प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्प्रेरित करने में सहायक: कड़वे खाद्य पदार्थ जैसे डार्क चॉकलेट शरीर के भीतर अवांछित कणिकाओं से लड़ने में मददगार होते हैं।
  7. कड़वे खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की प्रचुरता होती है।ये इनफ्लेमेटिव रेसपोंन्स (सूजन प्रतिक्रिया), कॉलस्ट्रॉल प्रबंधन व हॉर्मोनों के संतुलन में सहायक होते हैं।

(पारुल खुराना, एससीआई इंटरनेशनल हॉस्पिटल में न्यूट्रीशनिस्ट (पोषण विशेषज्ञ) से बातचीत के आधार पर)