तिकोना है इस झील का आकार, जानिए क्यों कहते हैं इसे स्वर्ग का रास्ता: Uttarakhand Satopanth Lake
Uttarakhand Satopanth Lake

ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अलग-अलग कोने में डुबकी लगाई थी

सतोपंथ के आगे पांच किमी दूर स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर है और इस ग्लेशियस पर सीढ़ियां नजर आती है।

Uttarakhand Satopanth Lake: आपने अब तक कई झीलें देखी होगी। ये झीलें या तो गोल होती हैं या चौकोर लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसी झील है जिसका आकार तिकोना है। इस अनोखे आकार की झील है संतोपंथ झील। इस झील का अनूठापन केवल इसके आकार तक ही सीमित नहीं है बल्कि इससे जुड़ी मान्यताओं को रहस्यों से भी जुड़ा हुआ है। इस झील के तिकोने आकार के पीछे की कहानी कही जाती है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने एकादशी के दिन अलग-अलग कोने में डुबकी लगाई थी। इसलिए इसका आकार तिकोना है।

इस झील को स्वर्ग की सीढ़ी भी कहा जाता है। धरती से स्वर्ग जाने का इसे रास्ता कहा जाता है। सतोपंथ के आगे पांच किमी दूर स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर है और इस ग्लेशियस पर सीढ़ियां नजर आती है। मान्यता यह भी है कि महाभारत के काल में पांडवों ने स्वर्ग जाने से पहले इसी झील में स्नान किया था। कहा जाता है कि युधिष्ठिर को शरीर स्वर्ग जाने के लिए आकाशीय वाहन यहां से मिला था।

आज के समय में यहां ट्रेकिंग के उद्देश्य पर्यटक पहुंचते हैं। यह झील समुद्रतट से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर है। मार्च से अक्टूबर के महीने में 1453 ट्रेकर्स यहां आए थे और इस साल इससे ज्यादा पर्यटकों के आने की उम्मीद की जा रही है। फिलहाल 1200 से ज्यादा ट्रेकर्स अभी तक आ चुके हैं।

सोनल शर्मा एक अनुभवी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया, प्रिंट और पीआर में 20 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने दैनिक भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया-जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हितवाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया...