ईश्वर ने सभी इंसानों को एक समान बनाया है और संविधान ने सभी इंसानों को एक समान माना है। इसलिए एक इंसान, एक नागरिक के रूप में अपने अधिकार मांगने से पहले ये जरूर जान लें कि उसे संविधान ने समानता के अधिकार के रूप में क्या-क्या प्राप्त हुआ है।

जानिए अपने मौलिक अधिकार 

भारतीय संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 12-32 तक हमारे मौलिक अधिकार शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से जिसका जि़क्र किया जा सकता है, वे हैं-

  • समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
  • स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
  • शोषण के खिलाफ अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
  • संपत्ति के लिए अधिकार (अनुच्छेद 31)
  • निजता का अधिकार

इनमें से संपत्ति का अधिकार 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के ज़रिये मौलिक अधिकारों की सूची से हटा दिया गया था और इसे संविधान के भाग-12 में अनुच्छेद 300-ए के तहत कानूनी अधिकार बनाया गया था। मौजूदा समय में सिर्फ 6 मौलिक अधिकार हैं, जिनके नाते भारत का हर नागरिक बराबर हितों की बात कर सकता है।

अनुच्छेद 14 (कानून के लिए समानता)

  • अनुच्छेद 14 कहता है कि सरकार किसी व्यक्ति के लिए कानून के प्रति समानता या भारत के क्षेत्राधिकार में कानून के समान संरक्षण से इनकार नहीं करना चाहिए। 
  • अनुच्छेद 14 कानून से संबंधित व्यक्ति यानी वैधानिक निगम, कंपनियां आदि समेत किसी भी व्यक्ति के लिए उपलब्ध है। 
  • अनुच्छेद 14 कानून की समान सुरक्षा की अवधारणा से संबंधित है और इसे अमेरिका के संविधान से लिया गया है।

अनुच्छेद 15 (धर्म, नस्ल, जाति, वर्ग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव रोकना)

  • अनुच्छेद 15 कहता है कि सरकार को सिर्फ धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान या इनमें से किसी के खिलाफ भेदभाव नहीं बरतना चाहिए।
  • अनुच्छेद 15 (3) और (4) के तहत, सरकार महिलाओं और बच्चों और उन नागरिकों के लिए विशेष प्रावधान कर सकती है, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं।

अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसरों की समानता)

  • अनुच्छेद 16 कहता है कि सरकार के अधीन किसी कार्यालय में रोजगार या नियुक्ति से संबंधित मामलों में सभी नागरिकों को एक समान अवसर मिलने चाहिए।

अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन)

  • अनुच्छेद 17 कहता है कि अस्पृश्यता समाप्त हो चुकी है और किसी भी स्वरूप में इसका इस्तेमाल वर्जित है। अस्पृश्यता की वजह से पैदा होने वाली किसी भी तरह की विकलांगता को कानून की नजर में अपराध समझा जाएगा।

अनुच्छेद 18 (उपाधियों की समाप्ति)

  • अनुच्छेद 18 में कहा गया है कि सरकार द्वारा किसी तरह का सैन्य या शैक्षिक भेद नहीं किया जाएगा। भारत के किसी नागरिक को किसी देश से कोई खिताब स्वीकार नहीं करना होगा।
  • राष्ट्रीय पुरस्कार कहे जाने वाले भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री को अनुच्छेद 18 (प) की परिभाषा में शामिल नहीं किया जाएगा। 

स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)

  • अनुच्छेद 19 कहता है कि सभी नागरिकों को स्वतंत्रता का अधिकार होगा-
  • भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का
  • शांतिपूर्वक और बगैर हथियारों के एकत्रित होने का
  • संगठन या यूनियन बनाने का
  • भारत के पूरे क्षेत्राधिकार में स्वतंत्र रूप से घूमने का

अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए सजा के संबंध में संरक्षण)

  • अनुच्छेद 20 कहता है कि सरकार राज्य के सुरक्षा समूहों, विदेशों के साथ संबंध, सार्वजनिक आदेशए संप्रभुता, नैतिकता, न्यायालय की अवमानना, मानहानि आदि के मामलों में उचित प्रतिबंध लगा सकती है। 

अनुच्छेद 21 जिंदगी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता

  • अनुच्छेद 21 जिंदगी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से संबंधित है। अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि सरकार को 6-14 साल की उम्र के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मुहैया करानी चाहिए। 
  • अनुच्छेद 22 कुछ खास मामलों में गिरफ्तारी के खिलाफ सुरक्षा से संबंधित है।

 

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