Summary : जायेद खान ने संजय और फिरोज खान की भव्य जीवनशैली
बॉलीवुड के दिग्गज भाई संजय खान और फिरोज खान सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी ग्लैमरस लाइफस्टाइल के लिए मशहूर थे।
Firoz Khan and Sanjay Khan: फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर सितारे और भाई संजय खान व फिरोज खान न केवल अपनी फिल्मों के लिए बल्कि अपनी बेहद ग्लैमरस जिंदगी के लिए भी जाने जाते थे। आलीशान पार्टियां करना और शाही अंदाज में जीना, इन दोनों अपनी पहचान बना ली थी। हाल ही में एक बातचीत में संजय खान के बेटे और अभिनेता जायद खान ने अपने पिता और चाचा की इस भव्य जीवनशैली पर खुलकर बातें कीं।
फिरोज और संजय खान थे अल्फा मैन
विक्की लालवानी से बातचीत में जायद ने कहा, “ये लोग ऐसे हालातों से गुजरकर आए थे कि ये ‘अल्फा मैन’ बन गए। आज मैं बहुत से ‘अल्फा बॉयज’ देखता हूं लेकिन असली ‘अल्फा मैन’ बहुत कम हैं।” फिरोज खान की ‘किंग-साइज’ जिंदगी के बारे में उनसे पूछा गया। स्विमिंग पूल में वाइन का ग्लास लेकर बैठना और पास में बिकिनी पहने महिलाएं होना… ये सब उन दोनों के लिए ही आम बात थी। इस बारे में जायद ने कहा, “बिलकुल, हमने हकीकत में जेम्स बॉन्ड को देखा है। जिस तरह की लाइफस्टाइल और सेलिब्रेशन ये दोनों (संजय और फिरोज खान) जीते थे, वो सचमुच कमाल का था।”
दिन में शराब तो सामान्य बात थी
अपनी बचपन की यादें साझा करते हुए जायद ने बताया, “हम सोचते थे कि ये कहां हैं हम? मुझे नहीं लगता कि बहुत से बच्चों को वैसा बचपन देखने को मिला होगा जैसा हमें मिला। उस वक्त हमें सब सामान्य लगता था, लेकिन जब पीछे मुड़कर देखते हैं तो अहसास होता है कि ये लोग वाकई बहुत बड़े ‘DUDES’ थे। वो सच में राजा थे। उनकी बात ही आखिरी होती थी। अगर उन्होंने कह दिया ‘चलो ड्रिंक करते हैं’ और आप कहते कि अभी तो दिन है, तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता था।”
सोफे का इतिहास ही निराला

अपने घर के ड्रॉइंग रूम की ओर इशारा करते हुए जायद ने कहा, “इस सोफे पर ही आप राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, क्रिकेटर, नेता, एक्टर-एक्ट्रेस सबको देख सकते थे। इस सोफे अकेले का ही 70 साल का इतिहास है। मैं बड़े-बड़े लोगों, सितारों और नेताओं को यहां आते-जाते देखकर बड़ा हुआ हूं।” बचपन की एक और मजेदार याद साझा करते हुए जायद ने बताया कि वो और उनके भाई-बहन जब 8-9 साल के थे, तो तैयार होकर चुपके से पार्टियों में जाने की कोशिश करते थे। वे कहते हैं, “मुझे याद है कि पापा कहते थे इसे बेनाड्रिल दो और सुला दो।”
कमियां थीं, लेकिन दिल के अच्छे थे
उन्होंने यह भी माना कि जहां बहुत से घरों में शराब पीना बुरा माना जाता है, वहीं उनके घर में इसे सामान्य समझा जाता था। वो कहते हैं, “हमारे लिए ड्रिंक करना बिल्कुल नॉर्मल और कूल था। हमें ये कभी अजीब नहीं लगा। हां, बहुत जगहों पर इसे सामान्य नहीं माना जाता। लेकिन मुझे कोई शिकायत नहीं है। मेरे माता-पिता जितने अच्छे थे, उनकी छोटी-मोटी कमियां और गलतियां उनकी मोहब्बत के आगे कुछ भी नहीं थीं।” जब जायद से पूछा गया कि उन्होंने पहली बार कब शराब पी थी, तो वो झेंपते हुए बोले, “उफ्फ, उस वक्त पर… जब नहीं करना चाहिए थी।”
