Summery- “ज्योति के आरोप, पवन का जवाब”
भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह की पत्नी ज्योति ने दावे किए कि उन्हें गर्भपात की गोलियाँ दी जाती थीं, और भावनात्मक प्रताड़ना हुई। पवन ने खुद बयान देकर इन आरोपों का खंडन किया है।
Pawan Singh vs Jyoti: भोजपुरी स्टार पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह को लेकर एक ऐसी कहानी सामने आयी जिसने मनोरंजन जगत से लेकर सामाजिक बहस तक को प्रभावित किया। इस दिन दोनों ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने अपने पक्ष मीडिया के सामने रखे। ज्योति ने आरोप लगाया कि पवन उन्हें बार-बार गर्भपात कराने की दवाइयां देते थे और मानसिक और शारीरिक यातना करते थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इन बातों का विरोध किया, तो वे इतने दबाव में आ गईं कि रात को 2 बजे उन्होंने 25 नींद की गोलियां खा लीं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और भावनात्मक उलझनें बढ़ीं।
उनका कहना था, “वो कहते थे कि बच्चा चाहिए, लेकिन जो सचमुच चाहें वह अपनी पत्नी को दवा कैसे देगा?” उन्होंने यह दावा भी किया कि जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो पवन के भाई रानू, उनकी टीम और अन्य लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि उन्हें मुंबई के अंधेरी के बेलेव्यू मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल लाया गया था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से न्याय की अपील की।
पवन सिंह ने तोड़ी चुप्पी
ज्योति के इन संवेदनशील आरोपों को सार्वजनिक होते ही पवन सिंह ने देर शाम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने सोशल मीडिया पर बताया था कि वह उनसे मिलने लखनऊ आ रही हैं और उन्होंने प्रशासन को सूचना दी थी। उस समय, पवन ने बताया कि वे अपने भाइयों ऋतिक व धनंजय के साथ मिलकर ज्योति और उनके परिवार से बातचीत करने उतरे। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कैसे व्यवहार किया, यह केवल मैं, वह और भगवान ही जानते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को बुलाया नहीं गया था, बल्कि अधिकारियों की तैनाती पहले से ही थी ताकि मामला शांतिपूर्ण ढंग से रहे।
पवन ने यह भी आरोपों का खंडन किया कि उन्होंने घर में रहते हुए अलग-अलग केस लड़ा। उनका कहना था, “मैंने स्टाफ से उसका मनचाहा खाना बनाने को कहा और मीटिंग में चला गया।” उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि वे पारदर्शिता चाहते हैं और उन्हें जनता की आस्था का मान है।
कोर्ट और मीडिया की भूमिका
मामला फिलहाल अदालतों में विचाराधीन है। ज्योति ने अलगाव एवं भरण-पोषण की मांग की है, जबकि पवन का तलाक मामला भी अदालत में है। मीडिया इस समस्या को मिनट दर मिनट अपने स्तर पर पेश करेगी, सोशल मीडिया इस विवाद को हर कोने तक पहुंचाएगी। जनता की सोच, सपोर्ट या विरोध, सभी पर इसका असर होगा।
समय बताएगा कि कौन सा पक्ष सबूतों और क़ानूनी प्रक्रिया में मजबूत रहेगा। हमारे लिए इस घटना से यह सीखना महत्वपूर्ण है कि पारिवारिक विवाद चाहे कितने भी व्यक्तिगत क्यों न हों, जब वे सार्वजनिक स्तर पर आते हैं तो केवल आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चल सकता, तथ्य, सबूत और निष्पक्ष जूझ विल्कुल जरूरी हैं।
सार्वजनिक मामला या निजी लड़ाई?
यह मामला सिर्फ एक दम्पति के बीच मतभेद नहीं रह गया है। जब किसी लोकप्रिय हस्ती के जीवन में ऐसी उठापटक होती है, तो उस पर समाज, कानून और मीडिया अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं। इस विवाद ने एक और पहलू उभारा है कि महिलाएं ऐसे आरोप उठाती हैं, क्या उनका समर्थन पर्याप्त रूप से किया जाता है? कानूनी प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष होगी? ये सब बातें इस वाकयुद्ध को सिर्फ मनोरंजन जगत का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी बहस बना देती हैं।
