इंटीरियर डिजाइनिंग से बनाई देश-विदेश में पहचान –भावना भटनागर (इंटीरियर डिज़ाइनर)

ब चपन से ही उसे जिंदगी को सलीके से जीने की आदत थी, हर छोटी से लेकर बड़ी चीज़ को संवारना और निखारना उसकी चाहत थी। खूबसूरत और नायाब चीज़ों की वो सच्ची कद्रदान थी और वो पूरी शिद्दत से कुछ नया सीखने को हर दम तैयार थी। उस शख्सियत का नाम है- भावना भटनागर। कुछ कर गुज़रने के जज्बे, भरपूर हौंसले और आगे बढ़ने की चाहत में भावना ने अपने ख्वाबों को पूरा कर दिखाया है। ख्वाबों की ऊंची उड़ान को तय करने के लिए तालीम पूरी करने के बाद भावना ने बतौर इंटीरियर डिजाइनर अपने करियर की शुरूआत की। हालांकि इनके माता-पिता हमेशा से यही चाहते थे कि भावना भविष्य में एक डाक्टर बने। मगर भावना को डिज़ाइनिंग से बेहद लगाव था। इसी के चलते उन्होंने ग्यारह साल पहले इस फील्ड में कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने ख्वाबों को उन्होंने साल 2018 में हकीकत की शक्ल उस वक्त दी, जब उन्होंने अपनी मेहनत और हिम्मत की बदौलत कासा एग्जोटिक की बुनियाद रखी। कासा एग्ज़ोटिक नाम की इस कंपनी में इस वक्त पच्चीस लोग उनके साथ काम कर रहे हैं। इसी के तहत भावना ने तकरीबन तीन साल पहले स्मार्ट होम्स बनाने की भी शुरुआत की थी।

भावना का लक्ष्य है कि वो स्मार्ट होम्स तैयार करने के क्षेत्र में आगे बढ़े और इसमें खूब तरक्की भी हासिल करे। भावना डिजाइनिंग के साथसाथ इनहाउस मैन्यूफैक्चरिंग का कारोबार भी बखूबी संभाल रही हैं। इसके अलावा अपने कारोबार के तहत वो मलेशिया, चाइना और टर्की समेत कई देशों से फर्नीचर इंपोर्ट भी करती हैं। साथ ही भावना मॉड्यूलर किचन समेत हर प्रकार की इंटीरियर डिज़ाइनिंग में माहिर है। भावना अपने काम के साथ-साथ अपने बच्चों को भी पूरा वक्त देती हैं और अपने दोनो बच्चों की परवरिश बखूबी ढ़ग से कर रही हैं। 

प्रेरणा स्रोत बनीं प्रेरणा –प्रेरणा पुरी (लघु उद्मी)

जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपना परचम लहराया है और ऐसी ही कुछ खास महिलाओं से हम आपको हमेशा ही परिचित कराते हैं, जो अपने दम पर अपनी पहचान बनाती हैं। क हते हैं, ज़रूरत आविष्कार की जननी है। अपनी मूलभूत सुविधाओं को पूर्ण करने के लिए हम रोज़ाना जीवन में कई प्रकार के प्रयास और प्रयोग करते हैं। मगर एक छोटा सा प्रयोग प्रेरणा की जिंदगी को कुछ इस तरह से बदल डालेगा शायद प्रेरणा ने कभी न सोचा होगा। लॉकडाउन के वक्त लोगों की जिंदगी जहां पूरी तरह से रूक चुकी थी। उस वक्त प्रेरणा लोगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत साबित हुई। जब लोग एक दूसरे से दूरी बनाए हुए थे और घर का पका ही सिर्फ खाने लगे थे, उस वक्त प्रेरणा ने अपने बेटे की डिमांड पर बाहर से कुछ भी खरीदने की बजाय घर में आइसक्रीम बनानी शुरू की। तीन से चार इंग्रीडिएंटस की मदद से तैयार होने वाली बेहतरीन आइसक्रीम धीरे-धीरे लोकप्रियता बटोरने लगी। साधारण तरीके से बनाई जाने वाली आइसक्रीम नातेरिश्तेदारों के साथ-साथ अब आस पड़ोस के लोगों को भी खूब भाने लगी। जब लोगों ने आइसक्रीम को सराहना आरंभ किया, तो प्रेरणा ने इसे माॢकट में लान्च करने का मन बना लिया। शुरुआत में प्रेरणा डायरेक्ट आडर्स पर आइसक्रीम बनाने का काम करती थी। मगर जैसे जैसे प्रोडक्शन का काम बढ़ा तो प्रेरणा ने दिल्ली, एनसीआर में करीबन तीस स्टोर्स में अपनी आइसक्रीम बेचनी शुरू की।

प्रेरणा हैंड क्राफटिड आइसक्रीम लोगों में इस कदर लोकप्रिय हो चुकी है कि अब ये मुंबई, पुणे और बैंगलोर में भी आपको आसानी से मिल जाएगी। साथ ही मुंबई में बहुत जल्द एक स्टोर भी खुलने जा रहा है, जहां आप प्रेरणा हैंड क्राफटिड आइसक्रीम का लुत्फ उठा सकेंगे। फैशन डिज़ाइनिंग की फील्ड से ताल्लुक रखने वाली प्रेरणा आज आइसक्रीम मेकिंग की दुनिया में खूब शोहरत हासिल कर चुकी हैं। प्रेरणा हैंडक्राफटिड आइसक्रीम की खासियत ये है कि ये पूरी तरह से प्रिजरवेटिवस और आर्टिफिशल फ्लेवर्स से पूरी तरह से मुक्त हैं। प्रेरणा प्योर प्रोडक्ट बनाने की चाहत में इस फील्ड में आईं और फिर अपनी एक पहचान भी बनाई। प्रेरणा को अपने इस काम में अपने परिवार का पूरा सहयोग हासिल हुआ है। अपने काम के साथ-साथ बच्चों की परवरिश के लिए भी प्रेरणा पूरा वक्त निकालती हैं।

चहुंमुखी प्रतिभा की धनी कत्थक गुरु –डॉ. शोभना नारायण (कत्थक नृत्यांगना)

जिं दगी में किसी मकाम की ख्वाहिश नहीं की थी जिसने, दूर तक जाने का ख्वाब भी नहीं सजाया था। उसने तो बस अपने शौक को ही अपना सपना बनाया था। हम बात कर रहे हैं कथक गुरु पद्मश्री डॉ शोभना नारायण जी की, जिनकी शख्सियत किसी तारीफ की मोहताज़ नहीं है। शोभना जी एक ऐसी पुरकशिश हस्ती हैं, जिनके चेहरे पर मुस्कुराहट हर दम थिरकती हुई नज़र आती है। अपनी धुन में आगे बढ़ने वाली सौम्य, सरल और जिंदगी से भरपूर ये एक ऐसी प्रतिभाशाली महिला हैं, जिन्होंने नृत्य के क्षेत्र में चार साल की उम्र में पहली बार मुजफ्फरपुर में स्टेज पर अपनी प्रस्तुति दी और पहला खिताब भी हासिल किया। शोभना जी ने ढ़ाई साल की उम्र से ही नृत्य की तालीम लेनी शुरू की थी। जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाली शोभना जी के परिवार में नृत्य का माहौल नहीं था। मगर अपनी माताजी की बदौलत उन्हें इस कला को सीखने का और कुछ कर दिखाने का एक ऐसा सुनहरा मौका मिला कि फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने साधना बोस की देखरेख में कोलकाता में एक बच्चे के रूप में कथक सीखना शुरू किया, फिर मुंबई चली गईं और जयपुर घराने के गुरु कुंदनलाल जी सिसोदिया के अधीन रहीं और बाद में दिल्ली जाकर पंडित बिरजू महाराज से शिक्षा ग्रहण की। सदियों से कला और संस्कृति की खिदमत करने वाली शोभना जी की कत्थक नृत्य के क्षेत्र में सन् 1970 से उनकी एक अलग पहचान बनी और लोग उनके बेहतरीन नृत्य को खूब सराहने लगे।

उन्होंने अपने शौंक के साथ-साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया और जीवन में एक खास मकाम हासिल किया। शोभना जी नृत्य के साथसाथ संगीत और लिखने में भी खूब रूचि रखती हैं। घर में साहित्यिक माहौल होने के चलते उन्हें साहित्य और पौराणिक किताबों से खासा लगाव है और वो अब तक कई किताबें भी लिख चुकी है। जिंदादिली की मिसाल शोभना जी की नृत्य के साथ-साथ पढ़ाई में भी खूब दिलचस्पी थी। फीजिक्स और मैथ्स उन्हें हमेशा ही बेहद पसंद था और वो नृत्य को हमेशा इन विषयों से जोड़कर देखती हैं। कत्थक में कई इनामात और खिताबों से नवाजी जा चुकी शोभना जी बतौर एक सिविल सर्वेन्ट भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। शोभना जी का बचपन से ही नृत्य के प्रति खास रूझान था। उनके नृत्य में लखनऊ और बनारस घराने की झलक मिलती है। बिरजू महाराज और जयपुर घराने के गुरु कुंदन लाल से भी तालीम ली। शोभना की विशेषता है कि वह नृत्य में नित नए प्रयोगों के साथ ही नारी सशक्तीकरण के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहती हैं। आज की पीढ़ी के लिए शोभना जी का यही संदेश है कि छोटे रास्तों पर चलकर मंज़िल तक पहुंचने की बजाय चीजों को गहराई से समझें, पसीना बहायें, उनकी आत्मा को पहचानें और फिर किसी निष्कर्ष तक पहुंचे। इसके अलावा वो युवाओं को यही बताना चाहती हैं कि अपने मूल्यों और सिद्धातों को कभी न त्यागें और जीवन में डिगनिटी के साथ आगे बढ़ें और अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन करें।

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