Nariman Irani Story
Nariman Irani Story

सारे दोस्त निर्माता के साथ थे लेकिन सफलता नहीं देख पाए

ये कहानी है नरिमन ईरानी की जिन्हें कर्ज से निकालने के लिए इस फिल्म को बनाया गया था...

Nariman Irani Story: आज जब भी अमिताभ बच्चन की फिल्मों की बात होती है, तो ‘डॉन’ का नाम सबसे ऊपर आता है। ‘जंजीर’, ‘दीवार’ और ‘शोले’ के बाद ‘डॉन’ ने उनके स्टारडम को और मजबूत कर दिया। लेकिन क्या आपको पता है, जिस फिल्म ने अमिताभ को ऊंचाई पर पहुंचाया, उसी ने इसके प्रोड्यूसर नरिमन ईरानी की जिंदगी में तूफान ला दिया? ‘डॉन’ के बनने की कहानी उतनी ही फिल्मी है, जितनी फिल्म खुद।

नरिमन ईरानी ने ‘जिंदगी जिंदगी’ नाम की फिल्म बनाई थी, जो बुरी तरह फ्लॉप हो गई। इससे वह कर्ज में डूब गए। उनके दोस्तों जैसे डायरेक्टर चंद्रा बारोट, अमिताभ बच्चन, प्राण, सलीम-जावेद और जीनत अमान ने तय किया कि वे नरिमन को उबारने के लिए एक फिल्म बनाएंगे। यही फिल्म बाद में ‘डॉन’ बनी।

फिल्म बनाने में 3 साल 6 महीने लगे और बजट था सिर्फ 25 लाख रुपए। लेकिन नरिमन ईरानी ने हिम्मत नहीं हारी। फिल्म पूरी हो गई, रिलीज डेट भी लॉक हो गई थी, लेकिन यहां एक और ट्विस्ट आया। स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने फिल्म देखने के बाद कहा कि सेकेंड हाफ बहुत ड्राई है, इसमें एक नया गाना होना चाहिए। उस गाने का नाम था ‘खइके पान बनारस वाला’, जिसे समीर अंजन के पिता अंजन साहब ने लिखा था।

नरिमन ईरानी ने जावेद अख्तर से कहा, “भाई, मेरे पास खाने तक के पैसे नहीं हैं, नया गाना कैसे शूट करूंगा?” लेकिन जावेद अख्तर नहीं माने। समस्या ये थी कि अमिताभ बच्चन विदेश जाने वाले थे और गाने की शूटिंग का सिर्फ एक ही दिन बचा था।

सेट बनाने का भी पैसा नहीं था। तब किसी ने आइडिया दिया कि गोरेगांव के तबेले (पशुओं के बाड़े) में जाकर शूट कर लिया जाए। बस, यूनिट वहां गई, कुछ घंटों में गाना शूट हुआ और बाकी इतिहास है। आज ‘डॉन’ का नाम लेते ही सबसे पहले ‘खइके पान बनारस वाला’ याद आता है, जो पहले फिल्म में होना ही नहीं था।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। फिल्म के रिलीज से कुछ हफ्ते पहले, नरिमन ईरानी की एक दुर्घटना में मौत हो गई। मनोज कुमार की फिल्म के सेट पर बारिश के दौरान एक दीवार गिर गई और नरिमन की जान चली गई। फिल्म का प्रमोशन करने तक के पैसे नहीं बचे थे।

जब ‘डॉन’ रिलीज हुई, तो यह सुपरहिट साबित हुई। लेकिन जो पैसे आए, वो नरिमन की विधवा सलमा ईरानी को दिए गए ताकि उनके पति का कर्ज चुकाया जा सके। खुद जीनत अमान ने भी फिल्म की फीस नहीं ली। उन्होंने कहा, “वो बहुत अच्छे इंसान थे, और जब वो चले गए, मैंने अपनी फीस माफ कर दी।”

इस फिल्म ने न केवल अमिताभ को सुपरस्टार बना दिया, बल्कि इंडस्ट्री में एक नई मिसाल भी कायम की। बाद में शाहरुख खान के साथ 2006 में इसका रीमेक बना, फिर ‘डॉन 2’ आई। अब इसे रणवीर सिंह के साथ रीबूट करने की तैयारी है। लेकिन इस पूरी ग्लैमरस हिट के पीछे एक इंसान की संघर्ष और दर्द की कहानी छिपी है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं।​​​​​​​ नरीमन ईरानी के दोस्त, कलाकार और लेखक सब साथ आए, ताकि एक दोस्त को कर्ज से उबारा जा सके। फिल्म हिट हुई, लेकिन उनके जाने के बाद। इस कहानी में दर्द है, दोस्ती है और वो जुनून है जो भारतीय सिनेमा की असली पहचान है।

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...