Summary: ज़रीन खान ने एक कुक बुक भी लिखी
उनकी कुकबुक में रेसिपी कम और उन रेसिपीज़ से जुड़ी कहानियां ज्यादा मिलती हैं।
बॉलीवुड की जानी-मानी पुरानी अभिनेत्री, लेखिका और मशहूर खान परिवार की ‘मातृशक्ति’, ज़रीन खान ने यह दुनिया शुक्रवार को 81 की उम्र में छोड़ दी। वो संजय खान की पत्नी और जायेद –सुजैन खान की मां थीं। उनकी पहचान सिर्फ़ उनकी शालीनता और स्वादिष्ट टेस्ट तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि उन्हें खाने और खाना बनाने से बहुत गहरा लगाव था। उनके घर की असली जान उनका किचन ही था। जो भी उन्हें करीब से जानता था, हमेशा यही कहता था कि ज़रीन खान लोगों को खिलाने को प्यार जताने का तरीका मानती थीं।
उनका खाना बनाने का लगाव बचपन से था। वे एक बड़े और बेहद संस्कारी परिवार में पली-बढ़ीं, जहां खाना सिर्फ खाना नहीं, पूरा परिवार संग बैठकर मनाया जाने वाला पल था। यही संस्कार और रेसिपी फिर आगे चलकर खान परिवार के फूड-कल्चर की पहचान बने। कई ऐसी डिशें हैं, जो उनके घर से निकलकर बॉलीवुड की यादों का हिस्सा बन गईं। जो भी उनके जुहू वाले घर आया, हमेशा उसे गर्मजोशी, हंसी-खुशी और भरपूर खाने वाली टेबल मिलती थी।
कुकबुक भी लिखी … जिसमें खूब कहानियां
उनकी कुकबुक में रेसिपी कम और उन रेसिपीज़ से जुड़ी कहानियां ज्यादा मिलती हैं। उन्होंने किताब में लिखा है, “बीबी फ़ातिमा की बिरयानी, खिचड़ा, कीमा, कबाब, चॉप्स जैसी क्लासिक रेसिपी हैं। इसके अलावा कुछ पारसी फेवरेट भी हैं जैसे फिश इन व्हाइट ग्रेवी या प्रॉन पटिया। और कुछ कॉन्टिनेंटल डिशेज भी हैं, जैसे लजान्या… जिसे मेरे बेटे ज़ायद सबसे अच्छा बनाता है।” लेकिन इन सबके बीच एक डिश ऐसी थी, जो दिल के और भी करीब थी.. वो थी हरे मसाले में तली हुई मछली यानी ‘हरे मसाले की मछली’। ये सुनील दत्त की फ़ेवरेट थी।

सुनील दत्त को पसंद था उनका खाना
ज़रीन उस किस्से को याद करके हंसती थीं। उन्होंने एक दफा बताया था, “एक बार हम सुनील दत्त से मिलने ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने मुझसे कहा, ‘जरीन, मुझे तुम्हारी हरे मसाले की मछली खाने का मन है।’ अस्पताल तो इसे अंदर आने देता नहीं था, लेकिन मैं किसी तरह मछली भिजवा ही आई… और वो बहुत खुश हुए।” ये छोटा-सा पल ज़रीन खान की असली शख्सियत दिखाता है। वो बहुत ध्यान रखने वाली, समझदार और छोटी-छोटी चीजों में प्यार जताने वाली इंसान थीं। सुनील दत्त भी अपने आप में एक मिसाल थे- विनम्र, संवेदनशील और खूब इंसानियत वाले। उनका निधन 25 मई 2005 को 75 वर्ष की उम्र में हुआ। ज़रीन और दत्त का रिश्ता भी ऐसे ही बना… शोरशराबे के बिना, सम्मान से, सच्ची दोस्ती से… और खाने के ज़रिये जुड़े उस मुलायम प्यार से।
