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अलका ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जानकारी दी कि वह एक रेयर न्यूरो डिजीज से पीड़ित हैं, जिसके कारण उनकी सुनने की क्षमता खो गई है। अपनी बीमारी का सोशल मीडिया पर जिक्र करते हुए अलका ने एक लंबा पोस्ट शेयर किया है।

बॉलीवुड की मशहूर सिंगर अलका याग्निक लंबे समय से म्यूजिक इंडस्ट्री से दूर थीं। अब उन्होंने इस दूरी का कारण अपने फैंस के साथ शेयर किया है। अलका ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जानकारी दी कि वह एक रेयर न्यूरो डिजीज से पीड़ित हैं, जिसके कारण उनकी सुनने की क्षमता खो गई है। अपनी बीमारी का सोशल मीडिया पर जिक्र करते हुए अलका ने एक लंबा पोस्ट शेयर किया है। इस वेटरन प्लेबैक सिंगर ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किया, जिसके बाद न सिर्फ अलका के फैंस में खलबली मच गई, बल्कि पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया। अलका के फैंस और बॉलीवुड सेलेब्स अब उनकी सेहत के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

अपने पोस्ट में अलका ने अपने फैंस और साथियों से लाउड म्यूजिक से दूर रहने का आग्रह किया है। साथ ही हेडफोन का कम उपयोग करने की सलाह भी दी है। सिंगर ने पोस्ट किया, मेरे सभी दोस्तों, फॉलोअर्स, फैंस और शुभचिंतकों के लिए! कुछ सप्ताह पहले मैं एक फ्लाइट से उतरी। उस समय मुझे महसूस हुआ कि मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा है। उन्होंने लिखा, इस घटना के कई सप्ताह बाद अब मैं थोड़ी हिम्मत जुटाकर अपने दोस्तों और प्रशंसकों को इस विषय में बता रही हूं। क्योंकि लंबे समय से वे लगातार पूछ रहे हैं कि मैं कहां गायब हूं। सिंगर ने लिखा, चिकित्सकों ने रेयर सेंसरी नर्व हियरिंग लॉस डायग्नोज किया है। यह हियरिंग लॉस मुझे एक वायरल अटैक के कारण हुआ है। अचानक हुई इस बीमारी की मुझे भनक तक नहीं थी। अब मैं इस बीमारी को स्वीकारने की कोशिशों में जुटी हूं। प्लीज आप सब मुझे अपनी दुआओं में याद रखना।  

अलका ने आगे लिखा कि किसी दिन मैं अपनी प्रोफेशनल लाइफ के कारण हेल्थ पर होने असर पर भी बात करूंगी। आप सभी के प्यार और साथ से मैं जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की उम्मीद करूंगी। आशा है कि आपके सामने फिर से जल्द आउंगी। अलका ने लिखा कि इस समय आप सभी का साथ और समझदारी मेरे लिए मायने रखती है।

यह परेशानी कान की ऑडिटरी नर्व के डैमेज होने के कारण होती है। अधिकांश मामलों में इससे पीड़ित शख्स को सुनाई देना बंद हो जाता है। दरअसल, कान के अंदर कोक्लीअ होता है, जिस पर छोटे-छोटे बाल यानी स्टीरियोसिलिया होते हैं। स्टीरियोसिलिया ही साउंड वेव्स से मिलने वाले कंपन को न्यूरो सिग्नल में बदलते हैं। हालांकि अगर आप तेज साउंड यानी 85 डेसिबल से ज्यादा की साउंड सुनते हैं तो स्टीरियोसिलिया को नुकसान होता है। आमतौर पर सेंसेरिन्यूरल हियरिंग लॉस की समस्या तेज म्यूजिक सुनने से और बढ़ती उम्र के साथ होती है। हालांकि अधिकांश लोग समय रहते इस पर ध्यान नहीं देते। इसके कई लक्षण भी नजर आते हैं, जैसे-सुनने में परेशानी होना, कानों में सीटी की आवाज आना, लोगों की बात ठीक से नहीं समझ पाना और चक्कर आना आदि।   

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...