हर दिन चुनौतियों से भरा होता है

अनामिका यदुवंशी (अस्तित्व मुझसे मेरी पहचान (एनजीओ)-फाउंडर प्रेजिडेंट)

चुनौतियों को स्वीकारें :-

अस्तित्व मुझसे मेरी पहचान एनजीओ मुख्य रूप से महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास पर केंद्रित हैं। अनामिका सिर्फ एनजीओ की फाउंडर प्रेजिडेंट ही नहीं, बल्कि एक लाइफ कोच, टैरो रीडर और एक मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। आखिर वो इस मुकाम तक कैसे पहुंची, जानें-

संघर्षों से भरा जीवन :-

अनामिका को जीवन में व्यक्तिगत रूप से कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा, जिसके कारण वे बहुत ज्यादा आध्‍यात्मिक हो गई। फिर उन्होंने आध्‍यात्मिक ज्ञान का प्रसार शुरू कर दिया। एनजीओ अस्तित्व मुझसे मेरी पहचान की शुरूआत की, ताकि वे गरीबों की मदद कर सकें।

हर दिन नई चुनौती :-

सबसे बड़ी चुनौती अस्तित्व को स्थापित करने की थी, क्‍योंकि मेरे जैसे विचार वाले लोगों और वित्तीय की कमी थी। सारी बचत अस्तित्‍व में लगा दी। एनजीओ में हर दिन आपके सामने नई चुनौती होती है।

उद्देश्य है सच्‍ची खुशी :-

अनामिका का उद्देश्य सच्‍ची खुशी और जीवन का सार खोजने में दूसरों की मदद करना है। उनका विश्‍वास है कि हम वहीं हैं, जो सोचते और करते हैं। वे चाहती हैं कि हर इंसान की मदद करें ताकि कोई दुखी न हो। इस एनजीओ से उन्हें रुपये नहीं कमाने हैं बल्कि लोगों को खुशी देनी है।

उपलब्धि :- 

अनामिका मानती हैं कि उनके जीवन की उपलब्धि उनका परिवार ही है, जो हर काम में सहायक है। और उनकी दुनिया के लिए उनका प्यार है। उनकी ताकत उनके गुरु हैं जिन्होंने उन्हें भीतरी दुनिया के रहस्य सिखाए हैं।

सफलता के मूलमंत्र :-

दूसरे हमारा नुकसान नहीं करते, हम खुद अपनी जिंदगी में अप्रिय स्थितियों और संबंधों के लिए दोषी होते हैं। अगर आप इसे ठीक करना चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले खुद को ठीक करें।

 

आइडिया लोगों को पसंद आए

रितिका नंनगिया (फाउंडर-फन कार्ट डॉट इन)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कॉमर्स में ऑनर्स की डिग्री लेने के बाद निफ्ट, दिल्ली में एक्सपोर्ट एंड रिटेल मैनेजमेंट की पढ़ाई की, क्योंकि उनका फोकस फैशन मैनेजमेंट में मास्टर्स में कारोबार पर फोकस था और निफ्ट से रिटेल एक्सपोर्ट कारोबार में स्पेशलाइजेशन हासिल करना था। लगन और मेहनत से आज रितिका ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। आइए जानें रितिका की कहानी –

ज्यादा संघर्ष नहीं किया :-
रितिका मूलरूप से एक कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती थी। उन्हें पता था कि बिजनेस के लिए कितनी मेहनत और समय लगता है।

हर कदम पर चुनौतियां :-
रितिका का मानना है कि ई-कॉमर्स में सबसे बड़ी समस्या लॉजिस्टिक्स की है, क्योंकि यह हमारे हाथ में नहीं है। कई बार शिपमेंट खो जाता है या लेट हो जाता है। इसीलिए हम ग्राहकों को 5-7 दिन पहले ऑर्डर करने की सलाह देते हैं।

घर से शुरुआत की :-
2008 में फैमिली बिजनेस ग्रुप सरोज इंटरनेशनल के तहत रिट्स एंड प्रिकर नाम से लेदर बैग डिवीजन शुरू किया। जब बिजनेस में उनका भाई भी जुड़ गया, तब उन्होंने रिटेल में कुछ करने की सोची। 2015 में Funcart-in नाम से अपना ई-कॉमर्स वेंचर लांच किया, जो बच्चों और बड़ों की पार्टी से जुड़ी चीजों की सप्लाई करता है।

जश्न मनाना उद्देश्य :- 
फन कार्ट डॉट इन का उद्देश्य ग्राहक को बेहतर सर्विस देना है। बर्थडे, बेबी शॉवर, ब्राइडल पार्टी हो या फिर बैचलर्स पार्टी, फन कार्ट डॉट इन हर तरह की पार्टी का आयोजन करता है।

उपलब्धि :-
उपलब्धि का अहसास तब होता है जब आपका आइडिया लोगों को पसंद आए और क्‍लायंट से आपको सकारात्‍मक प्रतिक्रिया समीक्षा मिले। कारोबारी पहल ने उन्हें इस उपलब्धि का अहसास कराया है।

सफलता के मूलमंत्र :-
रितिका की सफलता का मूलमंत्र है कि खुद को सपने देखने और उन्‍हें पूरा करने से कभी न रोकें। हमेशा खुश रहें क्योंकि यह दिमाग शांत रखता है और जीवन के प्रति प्रतिबद्धता लाता है। जीवन में कोई भी मुश्किल आए तो हर मुश्किल का सामना मुस्‍कुराते हुए करें।

 

अपना संदेश लोगों तक पहुंचाना है

मौली (इकोट्रेल पर्सनल केयर की सीईओ), ग्रीष्मा (इकोट्रेल पर्सनल केयर की वॉइस प्रेसिडेंट -आर एंड डी)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 भारत में कई जाने-माने कॉस्मेटिक ब्रांड हैं जिन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इनके बीच अगर एक नया कॉस्मेटिक ब्रांड आए तो बाजार में हलचल होना वाजिब है। जी हां, हम बात कर रहे हैं इबा हलाल कॉस्मेटिक ब्रांड की, जिसकी शुरूआत दो बहनों मौली और ग्रीष्मा तेली ने की। 32 वर्षीय मौली तेली इकोट्रेल पर्सनल केयर की सीईओ हैं। वहीं 28 वर्षीय ग्रीष्मा तेली इकोट्रेल पर्सनल केयर की वाइस प्रेसिडेंट- आरएंडडी हैं। आइए जानें कि इन बहनों ने मिलकर कैसे इस कंपनी को आगे बढ़ाया।

शुरूआती संघर्षं :- 
इबा हलाल केयर 2 वर्षों के कठिन शोध, उपभोक्ता अध्ययन, मार्केट की समझ, उत्पाद विकास और संचालन योजना का परिणाम है। जिसमें ग्रीष्मा और मौली को कई परेशानियों से गुजरना पड़ा। 2012 में इकोट्रेल पर्सनल केयर की शुरुआत के वक्त उन्हें पता था कि उन्हें ऐसे उत्पाद बनाने हैं, जो खतरनाक रसायनिक पदार्थों से मुक्त हों और इस्तेमाल में प्रभावशाली हों। सबसे बड़ा संघर्ष था अपने उत्पाद को बाकी ब्रैंड्स से अलग दिखाना, खास कर जब बड़े एमएनसी और ब्रैंड्स भारतीय माॢकट पर राज कर रहे हैं।

जीवन में बहुत चुनौतियां हैं :- 
मौली ने देखा कि भारत में कोई ऐसा ब्रैंड नहीं है, जिनके पास हलाल उत्पाद बेचने का लाइसेंस हो। यह दिलचस्प साबित हुआ, लेकिन चुनौतीपूर्ण भी था। हमारी सबसे बड़ी चुनौती अपना संदेश और दृष्टि लोगों तक पहुंचाने की है।

अनोखा उद्देश्य :- 
दोनों बहनों ने एक ऐसे उद्देश्य के बारे में सोचा जो जो अपने आप में बिलकुल अलग और कुछ अनोखा हो, जो लोगों की ऐसी जरूरत पूरी करे जो अभी तक पूरी ना हुई हो। वे जानती थीं कि अगर उन्हें कुछ अलग नजर आना है तो उत्पादों में कुछ बहुत खास व अलग होना चाहिए।

उपलब्धि और ताकत :- 
मौली और ग्रीष्मा का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी कामयाबी यही है किवो दोनों अपने बलबूते पर खुद की एक कंपनी खड़ी कर पाईं और और मार्केट में उनके उत्पाद अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो सके। आज उनके सभी उत्पादों को बाजार में उपभोक्ताओं की खूब सराहना मिल रही है। उनका मानना है कि उनकी संपत्ति उनका परिवार है और वो दोनों बहुत खुशनसीब हैं, जो उन्हें ऐसा परिवार मिला। उनकी ताकत उनकी पढ़ाई है और प्रबंधन परामर्श और बाजार अनुसंधान में उनका अनुभव, जिससे वो सफलतापूर्वक अपना काम शुरू कर पाईं ।

सफलता के मूलमंत्र :- 
उनकी सफलता का मूलमंत्र है कि अपने बिजनेस आईडिया में पूर्ण विश्वास रखें और बिजनेस के शुरुआती दिनों में अपना 100 प्रतिशत दें। खुद में और अपने विचार पर भरोसा रखें। एक बात का ध्यान रखें कि पेशेवरों और टीम में अच्छे सदस्यों, जिन्हें इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव हो, ऐसे लोगों की टीम बनाना लाभदायक होता है, यही लोग आपकी कंपनी को सही दिशा में ले कर जाने में मदद करेंगे, जिससे गलतियों की आशंका भी कम होगी। खतरे उठाने और उनसे सीखने की क्षमता होनी बहुत जरूरी है।