अपने वीकेंड को लाइट रखने के लिए देख सकते हैं 'शहजादा': Shehzada Review   
Shehzada Review   

Shehzada Review: बॉलीवुड की फिल्‍मों का जब बॉक्‍स ऑफिस पर बुरा हाल हो रहा था। उस समय अस स्‍टार ने अपनी फिल्‍म से एक बार फिर दर्शकों को बॉलीवुड की तरफ खींचा। जी हां हम बात कर रहे हैं कार्तिक आर्यन की। जिनकी ‘भूलभुलैया 2’ ने उनकी कॉमेडी का दर्शकों को फैन बनाया। वही क‍ार्तिक आर्यन एक बार फिर फुल बॉलीवुड मसाला मूवी के साथ अपने फैंस के लिए एक फैमिली एंटरटेनर मूवी लेकर आ गए है। कार्तिक की शहजादा आज रिलीज हो चुकी है। डेविड धवन के बेटे रोहित धवन की इस फिल्‍म में हर वो एलिमेंट शामिल है जिसे देख मसाला मूवी के फैंस सीटियां बजाने लगते हैं। इस फिल्‍म की टीक ठाक ओपनिंग के बाद भी बॉक्‍स ऑफिस पर इसकी सफलता को लेकर असमंजस है। क्‍योंकि एक तरफ अभी भी लोगों पर पठान का जादू छाया है तो दूसरी तरफ आज ही हॉलीवुड की साई फाई मुवी ‘एंटमैन एंड द वास्‍प: क्‍वांटमेनिया’ रिलीज से इसके बिजनेस को झटका लग सकता है। फिल्‍म की सफलता और असफलता के बारे में तो बाद में ही पता चलेगा। चलिए फिलहाल बाते करते हैं फिल्‍म के बारे में। आखिर कार्तिक की शहजादा कैसी है और इसमें बॉलीवुड के इस शहजादे ने कमाल किया या फिर दर्शकों को निराश किया।

Shehzada Review: क्‍या है शहजादा की कहानी

साउथ की फिल्‍मों के हिंदी में रिमेक का चलन बॉलीवुड में जैसे जोर पकडता जा रहा है। कार्तिक की शहजादा भी साउथ के सुपरस्‍टार अल्‍लू अर्जुन की ‘अला वैकुठपुरामल्‍लु’ का रिमेक है। इसके बावजूद ये बॉलीवुड मसाला मूवी का परफैक्‍ट डोज है। बॉलीवुड मसाला मूवी की हर कसौटी पर ये फिल्‍म सही उतरती है क्‍योंकि इसमें डांस है, रोमांस है, हीरो और विलेन की तकरार के बीच कॉमेडी का तड़का है।

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फिल्‍म की कहानी जिंदल एंटरप्राइजेस के मालिक रणदीप जिंदल (रोनित रॉय) और उनकी कंपनी में काम करने वाला स्टाफ बाल्मिकी (परेश रावल) के इर्द गिर्द रची गई है। उनके घर में बेटों का जन्म होता है। बाल्मिकी स्‍वार्थवश दोनों बच्चों की अदला-बदली कर देता है। एक शहजादे की जिंदगी मिलने के बाद भी जिंदल कंपनी के इकलौते वारिस बंटू (कार्तिक आर्यन) एक मामूली से क्लर्क का बेटा बन जाता है और वहीं क्लर्क का बेटा राज (राठी) जिंदल के घर ऐशोआराम  की जिंदगी जीता है। किस्‍मत के मारे बंटू को हर चीज के लिए स्‍ट्रगल करना पड़ता है और सेकेंड हैंड चीजों से ही गुजारा करना। किस्‍मत एक बार बंटू पर मेहरबान होता है और नौकरी ढूंढते हुए बंटू की मुलाकात समारा(कृति सेनन) से होती है। समारा जो कि बंटू की बॉस है उसी पर बंटू का दिल आता है। वो  इसी बीच उसे बाल्मिकी की गई साजिश का पता चल जाता है। अब कहानी यहीं से एक नया मोड़ लेती है और शहजादा निकल पड़ता है अपनी जिंदगी और असली परिवार को पाने के लिए। क्या बंटू अपने परिवार कोअपनी सच्चाई बता पाएगा? क्या बंटू का असली परिवार उसपर यकीन कर उसे अपनाने के लिए तैयार होगा? समारा और बंटू की लव स्टोरी किस तरु मोड लेगी? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए तो आपको थिएटर जाना पडेगा।

कैसी रही परफॉर्मेंस

कार्तिक आर्यन की ये फिल्‍म परफेक्‍ट फैमिली एंटरटेनर साबित हो सकती है। इसको देख गोविंदा की फिल्‍मों की याद आ जाती है। फिल्‍म में कार्तिक ने कॉमेडी, रोमांस, एक्‍शन और इमोशन को पर्दे पर बखूबी पेश करने की कोशिश की है। कार्तिक ने स्टाइल और एक्शन दोनों में बॉलीवुड का तडका लगाने का प्रयास किया है। चश्मा उड़ाते, बीड़ी पीते और अपने अंदाज में स्कूटर चला कार्तिक ने रंग जमाने की पूरी कोशिश की है। कृति सेनन ने भी अपने किरदार के साथ न्‍याय किया है। हालांकि उनके किरदार का और बेहतर बनाया जा सकता था। फर्स्‍ट हॉफ में कृति ज्‍यादा प्रभावित करती हैं। परेश रावल हमेसा की तरह अपने किरदार में रमे हुए नजर आएं हैं। बाल्मिकी के रूप में परेश रावल और बंटू बने कार्तिक की जोडी टक्‍कर की रही है। रोनित रॉय ने भी अपने किरदार को बखूबी निभाया है। उनकी एक्टिंग भी सहज रही है। मनीषा कोईराला ने भी अपने किरदार को सहजता से पर्दे पर पेश किया हैं। राजपाल यादव भले ही कम स्‍क्रीन स्‍पेस हमलस हो लेकिन उनकी कॉमिक टाइमिंग हमेशा की तरह कमाल की रही है। कुल मिलाकर फिल्‍म की कास्‍ट कमाल की है। बात करें डायरेक्‍शन की तो रोहित ने इस फिल्‍म के जरिए 80 की फिल्‍मों का दौर क्रिएट करने की कोशिश की है। जिसमें वे काफी हद तक सफल रहे हैं। भले ही फिल्‍म साउथ की फिल्‍म का रिमेक है लेकिन इसमें रोहित के जरिए डेविड धवन की फिल्‍मों की झलक देखने का मिलती है। हालांकि फिल्‍म का फर्स्ट हाफ स्‍लो लब सकता है और कुछ सीन्स बिना वजह ठूंसे जान पड़ते हैं। सेकंड हाफ रफ्तार पकडता है। फिल्‍म के वन लाइनर्स और पंच इंट्रेस्टिंग हैं। फिल्‍म में प्रीतम का संगीत कुछ खास कमाल का नहीं लगा है। हालांकि हाल ही में कैरेक्‍टर ढीला का रिमेक जरूर लोगों को पसंद आ रहा है।

क्‍यों देखें

अगर आप मसाला मूवीज के फैन हैं और कॉमेडी आपको अपनी तरफ खींचती है। तो ये फिल्‍म देखना तो बनता है। कार्तिक के फैंस उनके चार्म से प्रभावित होने से बच नहीं पाएंगे। फिल्‍म एक परफैक्‍ट फैमिली एंटरटेनर है। फैमिली के साथ वीकेंड को लाइट मूड में बिताने और हंसने हंसाने के लिए एक बार इस फिल्‍म को देखा जा सकता है।

निशा सिंह एक पत्रकार और लेखक हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिलेमें हुआ। दिल्‍ली और जयपुर में सीएनबीसी, टाइस ऑफ इंडिया और दैनिक भास्‍कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्‍थानों के साथ काम करने के साथ-साथ लिखने के शौक को हमेशा जिंदा...