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कुछ फिल्मों के बाद ही भाग्यश्री ने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया। उन्होंने हिमालय दासानी से शादी की और पर्सनल लाइफ को प्रोफेशनल लाइफ से हमेशा ऊपर रखा। हालांकि बच्चों के बड़े होने पर यह खूबसूरत एक्ट्रेस एक बार फिर से बड़े पर्दे पर नजर आ रही है।
Bhagyashree Birthday: फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाली एक्ट्रेस भाग्यश्री रातोंरात स्टार बन गई थीं। भाग्यश्री की शानदार एक्टिंग स्किल्स, मासूम चेहरे और भोलेपन ने लोगों के दिल में जगह बना ली थी। लेकिन कुछ फिल्मों के बाद ही भाग्यश्री ने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया। उन्होंने हिमालय दासानी से शादी की और पर्सनल लाइफ को प्रोफेशनल लाइफ से हमेशा ऊपर रखा। हालांकि बच्चों के बड़े होने पर यह खूबसूरत एक्ट्रेस एक बार फिर से बड़े पर्दे पर नजर आ रही है। 23 फरवरी को अपना बर्थडे मना रही 55 साल की भाग्यश्री ने हमेशा ‘फैमिली फर्स्ट’ की सोच अपनाई। लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब वह ‘एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम’ का शिकार हो गईं। एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने खुद इस बात का खुलासा किया। आखिर क्या है एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम, आइए जानते हैं।
अजीब फीलिंग है ‘एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम’
अकेली भाग्यश्री ही नहीं दुनियाभर में हजारों लाखों महिलाएं ऐसी हैं, जो ‘एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम’ का शिकार होती हैं। कुछ इसे समय पर समझ कर उससे उबर जाती हैं तो कुछ अंदर ही अंदर घुटन और खालीपन महसूस करने लगती हैं। हालांकि कई बार माता-पिता दोनों ही इस सिंड्रोम से पीड़ित होते हैं। हर मां अपने बच्चे को हमेशा पूरा समय और अच्छी परवरिश देना चाहती है। इसके लिए वे अपना करियर, इच्छाएं सब छोड़ देती हैं। खुद को भुलाकर वह सिर्फ बच्चों पर फोकस करती है। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे पढ़ाई, दोस्तों, करियर में बिजी हो जाते हैं। कई बार अच्छे भविष्य के लिए उन्हें घर, शहर और देश तक छोड़कर जाना पड़ता है। यहां बच्चे जीवन की दौड़ में इस कदर शामिल हो जाते हैं कि वे अपने पेरेंट्स को भरपूर समय नहीं दे पाते हैं। पेरेंट्स से मिलना तो दूर, कभी-कभी तो वे फोन कॉल तक नहीं करते। इस स्थिति में पेरेंट्स, खासतौर पर मां खालीपन महसूस करने लगती है। इसी खालीपन, उदासी और अकेलेपन को नाम दिया गया है ‘एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम’ का। इससे उनकी मानसिक और शारीरिक दोनों सेहत पर असर होता है।
कई समस्याओं की जड़ है यह सिंड्रोम
कहते हैं अकेलापन कई बीमारियों की जड़ होता है। यही कारण है कि पेरेंट्स के लिए एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम कई समस्याओं की जड़ बन जाता है। पेरेंट्स बच्चों की जिंदगी में आए इस बदलाव में खुद को गायब महसूस करते हैं और यह भावना उन्हें अंदर से तोड़ देती है। जब बच्चे बड़े हो जाते हैं या बाहर चले जाते हैं तो माता-पिता कई जिम्मेदारियों से फ्री हो जाते हैं। वहीं बच्चों की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। ये बदलाव कई बार पेरेंट्स स्वीकार नहीं पाते हैं और मानसिक रूप से वे परेशान रहने लगते हैं।
आसानी से आप डील कर सकते हैं इसे
एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम पेरेंट्स को जितना मुश्किल और बड़ा लगता है, इससे निपटना उतना ही आसान है। हां, लेकिन इसके लिए आपको कुछ कोशिशें और बदलाव जरूर करने होंगे। बच्चों के बड़े होने के साथ हर पेरेंट्स को उनके साथ रिश्ते में कुछ बदलाव करने चाहिए। उन्हें थोड़ी आजादी दें और खुद भी थोड़ा-थोड़ा फ्री रहने लगे। इससे लाइफ में बैलेंस बनेगा। बच्चे का दूर जाना आपको एक दम से नहीं अखरेगा। साथ ही रिश्तों में संतुलन भी बनेगा। अगर बच्चे शहर से बाहर हैं तो सिर्फ उनके घर लौटने का इंतजार न करें। कभी-कभी आप भी उनके पास जाएं। इससे उन्हें आपके साथ का एहसास होता रहेगा। इस सिंड्रोम से दूर होने का एक आसान तरीका है, खुद को समय देना। भाग्यश्री ने बताया कि आप अपने अनुसार अपनी एक दिनचर्या बनाएं। इसमें व्यायाम, योग, ध्यान के साथ ही अपनी रुचियों को समय देना भी शामिल करें। इससे आपका मन भी लगेगा और आप रिलेक्स भी महसूस करेंगे। अपने दोस्तों से फिर से मिलना जुलना शुरू करें, उनके साथ वक्त बिताएं।
