UP Dowry Case
UP Dowry Case

Summary: सजा हुआ थाल लौटा दिया...

दुल्हन के परिवार ने परंपरा के मुताबिक तिलक के समय 31 लाख रुपए एक सुंदर प्लेट में सजा दिए थे। दुल्हन के पिता नहीं थे और परिवार ने जैसे-तैसे ये रकम इकट्ठी की थी...

Groom Returns Dowry in UP: ये कहानी न सिर्फ दिल छू लेने वाली है, बल्कि एक ऐसी मिसाल भी है, जिसे हर शादी-ब्याह में अपनाया जाना चाहिए। यूपी के मुजफ्फरनगर के एक दूल्हे ने शादी के मौके पर ऐसा काम कर दिया कि पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। बात ही कुछ ऐसी थी… दूल्हे ने दहेज में रखे पूरे 31 लाख रुपए लौटाकर सिर्फ 1 रुपए का शगुन लिया।

आगरा में शादी का माहौल था। दुल्हन के परिवार ने परंपरा के मुताबिक तिलक के समय 31 लाख रुपए एक सुंदर प्लेट में सजा दिए थे। दुल्हन के पिता नहीं थे और परिवार ने जैसे-तैसे ये रकम इकट्ठी की थी, सोचकर कि समाज की उम्मीदें निभानी पड़ेंगी। लेकिन दूल्हा अवधेश राणा (26) जैसे ही उस प्लेट के पास पहुंचा, उसने हल्का-सा झुककर हाथ जोड़ लिए। भीड़ चुप। सबको लगा कि अब वो पैसे लेगा…लेकिन उसने शांत आवाज़ में कहा – “मुझे ये लेने का कोई हक नहीं। ये दुल्हन के पिता की मेहनत की कमाई है। मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता।” पूरा हॉल एक पल को बिल्कुल शांत था… फिर ताबड़तोड़ तालियों की गड़गड़ाहट।

सबसे अच्छी बात ये थी कि अवधेश अकेला नहीं था। उसके माता-पिता ने भी उसी वक्त उसका साथ दिया। दुल्हन के परिवार की आंखें भर आईं। उन्हें लगा जैसे कोई भारी बोझ अचानक उतर गया हो। बिना किसी दिखावे, बिना किसी ड्रामे के शादी पूरी गर्मजोशी के साथ आगे बढ़ी। जयमाला से लेकर कन्यादान तक सब कुछ पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लगा। दुल्हन घर विदा हुई तो चेहरे पर सुकून था, तनाव नहीं।

अवधेश की ये छोटी-सी लगने वाली लेकिन बड़ी सोच वाला कदम पूरे इलाके की चर्चा बन गया है। लोग कह रहे हैं, “दहेज मांगने वालों के लिए ये करारा जवाब है। शादी पैसा नहीं, इज्जत जोड़ने का रिश्ता है।” गांव के बुजुर्ग भी कह रहे हैं कि ये शादी अब ‘उदाहरण’ बन गई है, खासकर उन परिवारों के लिए जो दहेज के डर में अपनी बेटियों की शादी टालते रहते हैं।

अवधेश ने कहा, “22 नवंबर की शादी में दुल्हन के परिवार ने 31 लाख देने की कोशिश की थी। लेकिन हमने मना कर दिया। हम दहेज के खिलाफ हैं।” दुल्हन अदिति सिंह ने MSc किया है, वो अपने नाना-नानी के साथ रहती थी। पिता की कोरोना के दौरान मौत हो गई थी। शादी भी नाना ने ही तय करवाई थी, और रस्मों के दौरान दूल्हे के इस फैसले से वो बेहद भावुक हो गए।

अदिति की मां सीमा देवी ने साफ कहा कि अवधेश के इस कदम ने उनके मन का डर और बोझ दोनों मिटा दिए। उनके लिए ये सिर्फ दहेज लौटाना नहीं था… ये सम्मान था, राहत थी और किसी अच्छे इंसान पर भरोसा फिर से जगने जैसा था।

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ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...