Friday 13th Unlucky Day: हर महीने की 13 तारीख जब शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो एक अनजानी सी घबराहट लोगों के दिलों में घर कर जाती है। चाहे वो हॉलीवुड की डरावनी फिल्मों की वजह से हो या फिर सदियों पुरानी मान्यताओं की, ‘फ्राइडे द 13th’ को एक मनहूस दिन के रूप में देखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन को लेकर इतना डर क्यों है? इस तारीख को लेकर डर सिर्फ अंधविश्वास नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ऐसा इतिहास छिपा है जो रहस्यमयी ही नहीं, बल्कि दुखद भी है। आइए जानते हैं इस काले दिन की वो सच्चाइयाँ जो सदियों से लोगों के ज़हन में डर बनकर बसी हुई हैं।

’13’ नंबर से जुड़ा डर: अंधविश्वास या सच्चाई

पश्चिमी संस्कृतियों में ’13’ को एक अशुभ संख्या माना जाता है। कई होटल्स में 13वाँ फ्लोर नहीं होता, और कई लोग इस तारीख पर बड़े फैसले लेने से बचते हैं। माना जाता है कि 12 पूर्णता का प्रतीक है – 12 महीने, 12 राशियाँ, 12 शिष्य – जबकि 13 असंतुलन का संकेत देता है।

ईसा मसीह की आखिरी रात और शुक्रवार की भूमिका

क्रिश्चियन मान्यताओं के अनुसार, ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन सूली पर चढ़ाया गया था। उनके आखिरी भोज में 13 लोग शामिल थे, जिसमें वह व्यक्ति भी था जिसने बाद में उन्हें धोखा दिया। यह घटना इस तारीख और दिन को दुर्भाग्य से जोड़ती है।

टेम्पल नाइट्स पर हमला: 13 अक्टूबर 1307

इतिहास में सबसे काली तारीख मानी जाती है 13 अक्टूबर 1307। फ्रांस के राजा फिलिप IV ने इस दिन टेम्पल नाइट्स पर हमला करवाया और सैकड़ों योद्धाओं को यातनाएं देकर मारा गया। इस घटना को ‘फ्राइडे द 13th’ से जोड़कर देखा जाता है।

विक्टोरियन युग की चेतावनी और अफवाहें

19वीं सदी के इंग्लैंड में ‘फ्राइडे द 13th’ को लेकर कहानियाँ और चेतावनियाँ खूब फैलने लगीं। कई समाचार पत्रों और पुस्तकों में इसे अशुभ दिन बताकर डर फैलाया गया। लोगों के दिमाग में यह दिन एक डरावनी छवि बन गया।

फिल्मों और पॉप कल्चर ने बढ़ाया डर

1980 में आई हॉरर फिल्म Friday the 13th ने इस दिन को डर का प्रतीक बना दिया। इसके बाद से इस तारीख पर डरावनी घटनाओं को फिल्में, किताबें और टीवी शो बार-बार दिखाते रहे, जिससे आम लोगों का डर और गहराता चला गया।

वास्तव में हुआ है कुछ अनहोनी भी

इतिहास में कई घटनाएं हुई हैं जो इसी दिन के साथ जुड़ी हैं – जैसे कि विमान हादसे, शेयर मार्केट क्रैश और प्राकृतिक आपदाएं। भले ही ये महज संयोग हों, लेकिन लोगों ने इन्हें ‘फ्राइडे द 13th’ के मिथ से जोड़ दिया।

क्या आज भी डरना जायज़ है

आज की तार्किक दुनिया में भी लोग इस दिन से बचते हैं। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि ये सब केवल मनोवैज्ञानिक प्रभाव है। डर और अंधविश्वास अगर मन में बैठ जाएं, तो वे तर्क को भी पीछे छोड़ देते हैं।

‘Friday the 13th’ को लेकर जो डर है, वो अचानक पैदा नहीं हुआ। ये डर सदियों के इतिहास, धर्म, दुर्घटनाओं और सांस्कृतिक प्रभावों का मिला-जुला नतीजा है। चाहे आप इसे अंधविश्वास मानें या डर का प्रतीक, लेकिन इस दिन का असर लोगों के दिलों और फैसलों पर अब भी उतना ही गहरा है

मेरा नाम श्वेता गोयल है। मैंने वाणिज्य (Commerce) में स्नातक किया है और पिछले तीन वर्षों से गृहलक्ष्मी डिजिटल प्लेटफॉर्म से बतौर कंटेंट राइटर जुड़ी हूं। यहां मैं महिलाओं से जुड़े विषयों जैसे गृहस्थ जीवन, फैमिली वेलनेस, किचन से लेकर करियर...