Warm Oil Hair Massage: अक्सर यह पूछा जाता है कि क्या तेल मालिश बालों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है? दरअसल, हल्की मसाज करते हुए जब बालों में तेल लगाया जाता है तो इससे बालों के टेक्सचर को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। साथ ही साथ, इससे हेयर फॉलिकल्स में ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। जिसके कारण आपकी स्कैल्प को पोषण मिलता है। और, इस प्रकार हेड मसाज बालों के लिए आवश्यक है।
खासतौर से, आज के समय में तनाव जब हर किसी के जीवन का हिस्सा बन गया है। व्यस्त जीवनशैली से लेकर व्यवसाय की व्यस्ततायें, जिम्मेदारियां और चुनौतियां आदि सभी शरीर और दिमाग को तनाव में डाल देती हैं। तनाव का केवल आपके स्वास्थ्य पर ही प्रभाव नहीं पड़ता है, बल्कि इससे त्वचा और बालों की भी कई समस्याएं जुड़ी हुई होती हैं। यही कारण है कि सिर की मालिश सैलून और स्पा की सबसे ज्यादा चलने वाली सॢवसेज में से एक है। वास्तव में, यह तनाव के लक्षणों को कम करने और आपको तनावमुक्त करने का एक बेहद ही प्रभावी तरीका है।
आयुर्वेदिक तेल कैसे करें तैयार
सिर की मालिश के उपचारों में से एक आयुर्वेदिक चंपी है, जिसे तेल और एक्सट्रैक्ट को मिलाकर तैयार किया जाता है। उसमें आंवला, बेल, भृंगराज, ब्राह्मी आदि भी डाले जाते हैं। चंपी के लिए शुद्ध जैतून का तेल, नारियल का तेल या फिर तिल के तेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्राह्मïी जैसी अन्य सामग्रियां आपको सबसे ज्यादा आराम देती हैं। यहां तक कि तनाव से होने वाली बालों की समस्या को भी दूर कर सकती है। जब इस तेल को लगाया जाता है तो यह आसानी से अवशोषित हो जाता है। यह जड़ों और स्कैल्प को पोषण देने और मजबूत बनाने में मदद करता है। इसमें तेल को गर्म किया जाता है और फिर लगाया जाता है। सिर की चंपी लसिका तंत्र का सुचारू रूप से संचालन करने व शरीर का रक्त प्रवाह बढ़ाने में सहायक होता है। यह स्पाइनल फ्लूइड के सर्कुलेशन में भी सुधार करता है। यह शरीर को तरोताजा करता है और तनाव और थकान को दूर करता है।
मर्म बिन्दुओं पर करें चंपी
आयुर्वेद, शरीर और सिर पर ‘मर्म’ कहे जाने वाले विशिष्ट बिंदुओं को पहचानता है, जहां मसाज करने से बहुत अधिक लाभ होते हैं। ‘मर्म पॉइंट्स’ को आसान भाषा में समझें तो ये शरीर के मुख्य बिंदु हैं। ऐसा माना जाता है कि ऊर्जा का प्रवाह कुछ चैनलों के साथ होता है और मालिश को सही दिशा में करने से उर्जा का प्रवाह बढ़ता है। ‘मर्म प्वाइंट्स’ की धीरे से मसाज की जाती है और ऐसा करते हुए क्लॉकवाइज की दिशा में सर्कुलर मोशन में मालिश करनी चाहिए। इसमें दबाव भी डाला जाता है और धीरे से छोड़ा जाता है।
चंपी कैसे करें
सिर की मालिश आयुर्वेद में प्रचलित है। आयुर्वेदिक परंपरा के अनुसार, मढ़ी मर्म, या सिर के क्राउन एरिया को वह बिंदु कहा जाता है जहां रक्त वाहिकाओं और नसों को मिलती हैं। यह शरीर के दोषों के असंतुलन को ठीक करने में भी मदद करता है क्योंकि कहा जाता है कि तीनों दोष इसी बिंदु पर मिलते हैं। इस बिंदु को निर्धारित करने के लिए, भौंहों के ऊपर से सिर के केंद्र की ओर आठ अंगुल की चौड़ाई नापें। अब शुद्ध बादाम के तेल, शुद्ध तिल के बीज के तेल या शुद्ध जैतून के तेल में से चुनें। तेल को गरम करें और सिर के बीच में तेल डालना चाहिए।
स्कैल्प के दोनों तरफ कानों की तरफ जाकर मसाज करें। सिर के पिछले हिस्से में थोड़ा-सा तेल लगाएं और सिर के पिछले हिस्से और बगल में तेल की मालिश करें। मर्म बिंदुओं की बहुत धीरे से मालिश की जाती हैए इसे छोटे क्लॉकवाइज सर्कल में मालिश करें। अब बहुत धीरे-धीरे दबाव बढ़ाते हैं और फिर उस प्रेशर को रिलीज करते हैं। अब सर्कुलेशन को बेहतर बनाने के लिए पूरे सिर पर हल्के हाथों से टैपिंग मूवमेंट करें, इसमें केवल आपको अपने हाथ की उंगली और अंगूठे से गहरा दबाव और घर्षण करना होता है। साथ ही हथेली से स्कैल्प पर थपथपाना भी शामिल होता है।
चंपी के बड़े-बड़े फायदे
यहां भी विभिन्न मर्म बिंदुओं पर दबाव डाला जाता है। चम्पी एक ऐसी मालिश है, जिसमें दबाव लगाने और छोड़ने, सहलाने, थपथपाने आदि की विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। फिर से, इसमें कई तेलों के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल किया जाता है, जो वास्तव में बालों को मजबूत करने, पोषण देने और उन्हें स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं। ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने के अलावा चंपी मसाज डिटॉक्सिफिकेशन में भी मदद करती है। यह तनाव और चिंता को कम करती है और मसल्स और खोपड़ी की टेंशन को भी रिलीज करती है। इस तरह की मसाज डिप्रेशन और इनसोमनिया की समस्या के लिए काफी अच्छी मानी जाती है।
