दोस्तों नारी का सौंदर्य हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। ये नारी के रूप का ही तो कमाल है, जिससे विश्वामित्र भी नहीं बच सके और मेनका के सौंदर्य में फंस कर अपनी तपस्या को भूल गए। अरे भई, जब बड़े-बड़े तपस्वी नारी की सुंदरता में फंसकर पथभ्रष्ट हो जाते हैं तो फिर साधारण इंसान की क्या बिसात… पर मुझे ये समझ में नहीं आता कि आज की खूबसूरती को किस इंचीटेप से नापा जाए। दोस्तों जब कुछ दिन पहले मेरे साथ एक घटना घटित हुई तो मुझे पता चल गया कि खूबसूरती किसे कहते हैं और इसका आकलन कैसे करना चाहिए। बात अभी दो हफ्ते पहले की है। हम चार दोस्तों को एक पार्टी में जाना था। पार्टी में जाने की प्लांनिग तो कई हफ्तों पहले से चल रही थी, पर जाने से एक शाम पहले हम चारों को याद आया, उफ! ऑफिस के चक्कर में हम लोग पॉर्लर तो गए ही नहीं। अब क्या करें? एक दोस्त बोली, चलो बाजार चलकर देखते हैं, हो सकता है कोई पॉर्लर खुला हो। उसकी बात सुनकर हम सब ने बाजार की तरफ रुख किया, पर वहां भी निराशा हाथ लगी, क्योंकि सारी दुकानें 15 अगस्त के कारण बंद थीं, जिसके चलते हमारी खूबसूरती के रास्ते भी बंद हो गए थे। खैर, हमने निर्णय लिया कि कल हम चारों किसी एक के घर में तैयार होंगे, ताकि एक-दूसरे की कमियों को बता सकें। इतना कह कर हम सब अपने-अपने घर चले गए।
दूसरे दिन जब सब मेरे घर आए तो हम एक साथ तैयार होने लगे। तैयार होने के बाद जब हमने एक-दूसरे के बारे में कमेंट जानने की कोशिश की तो किसी को भी एक दूसरे का कमेंट पसंद नहीं आया। जब हम एक-दूसरे के कमेंट से संतुष्ट नहीं हुए तो हमने सोचा, क्यों ना दर्पण से ही अपने सौंदर्य का राज जानें। पर जैसे ही हम चारों एक-एक करके दर्पण के सामने आए तो उसने हमारी सुंदरता की ऐसी धज्जियां उड़ाईं जैसे पतझड़ में पत्ते झड़ते हैं। उसने मूक भाषा में हमसे कहा कि मोहतरमा आप चाहे जितना भी मेकअप पोत लो, पर जो चेहरे की थकान के कारण आंखों के काले घेरे और डलनेस है, उनको मेकअप से कहां तक छुपाओगी। अपनी कमियों को जानकर हम सबको गुस्सा तो इतना आया कि दिल ने कहा कि आईना ही तोड़ दूं। पर हम ऐसा नहीं कर सकते थे, क्योंकि इसके बगैर तो हम महिलाओं की सुंदरता ही पूरी नहीं होती। खैर, हम सब ने दर्पण की बात को अनदेखा करके अपने-अपने पतियों से जानना चाहा, शायद वो हमारी कुछ तारीफ कर दें। हम चारों के पति ने भी हमारी खूबसूरती पर प्रश्न चिन्ह यह कहकर लगा दिया कि आज वो बात नहीं जो और दिन हुआ करती थी। फिर क्या था हम सब ने अपना-अपना मेकअप रिमूव किया और बड़े ही सधे हाथों से दोबारा मेकअप करने लगे। मेकअप के दौरान हम चारों का ध्यान बार-बार घड़ी की तरफ जा रहा था, जो ये बताने की कोशिश कर रही थी कि आप लोगों को मेकअप करते हुए कितने घंटे हो गए हैं। घड़ी की सुइयों की बढ़ती रफ्तार को देखकर हमारे हाथों की रफ्तार भी तेज हो चली थी। फिर भी हम लोगों ने मेकअप करने में चार घ्ंटे लगा दिए।
फाइनल टचअप देने के बाद जब हम सब दर्पण के सामने खड़े हुए तो आईने ने फिर से हमारी कमियों को गिनाना शुरू का दिया जैसे- लाइनर मोटा लग गया, चेहरे का बेस गर्दन से मैच नहीं खा रहा, लिपस्टिक का शेड साड़ी से मैच नहीं कर रहा, गाउन के साथ प्लेटफार्म हील अच्छी नहीं लग रही। थोड़ी पतली होती तो और भी… साड़ी के साथ खुले बालों की जगह बन होता तो माशा अल्लाह खूबसूरती और निखर कर आती। मेकअप व ड्रेसिंग में हुई कमियों को जान कर हम चारों पूरी तरह से हताश हो गए। लग रहा था कि कहीं हम चक्कर खाकर गिर न जाएं। दर्पण हम लोगों की कमियां गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। मेकअप तक तो कमियां सही थी, पर हमारी फिगर को लेकर कोई बोले, ये हम चारों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं था। हमारी कमियों को दर्पण और ना पढ़ ले, इससे पहले हम चारों वहां से ड्राइंगरूम में जाकर अपने पतियों के पास बैठ गए। हम चारों की स्थिति को हमारे पति देव भांप चुके थे इसलिए चुपचाप वहां से सरक लिए। हम चारों इस घटना से बुरी तरह हताश हो गए। अब हम इस बात को अच्छी तरह जान गए हैं कि लोग चाहे आपकी खूबसूरती को लेकर जितनी भी तारीफ करें, पर आपकी सुंदरता की परिभाषा सिर्फ और सिर्फ दर्पण ही सही बताता है। तभी तो कहते हैं कि दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता। वह बिना किसी पक्षपात के अपना निर्णय बताता है। अगर आपको अपनी खूबसूरती की तारीफें बटोरनी हैं और जानना है कि आप कितनी सुंदर हैं तो मेकअप की कोई जरूरत नहीं है। असली सुंदरता तो बिना मेकअप के होती है।
सच से रूबरू करवाता है सिर्फ दर्पण
