सुबह चार बजे होंगे, लेकिन एयरपोर्ट एकदम उजला-रोशनियों में नहाया हुआ। उसने बाहर देखा। दिसंबर के गहरे-घने अंधेरे में लिपटा शहर। लगता है, जैसे सिर्फ एयरपोर्ट में सूरज निकल आया है। यह सूरज भी पक्षपात करता है। वह मुस्कराया। यह सुबह-सवेरे सूरज के पीछे पड़ने का क्या मतलब? सूरज भी तो कहीं ठंड में दुबका […]
