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तुम मेरे उतने ही अपने-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: तुम मेरे उतने ही अपनेजितना अंबर अवनी का,जितना सागर नदिया का,चलते रहते वह साथ-साथ,पा लेने की नहीं है प्यास| तुम मेरे उतने ही अपनेजैसे मीरा मोहन की,जैसे राधा किशन की,ध्येय नहीं था पाने काभक्ति प्रेम अर्थ जीवन का| तुम मेरे उतने ही अपनेजैसे यशोधरा सिद्धार्थ की,उर्मिला जैसे हो लक्ष्मण की,जहाँ डर नहीं था […]

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विधुर-गृहलक्ष्मी की कविता

गृहलक्ष्मी की कविता उन्हें भी तो इतना दर्द हुआ होगापर इस बात का साक्षी केवल वह विधुर होगाउसकी भी बगिया सूख गईउसका भी चमन उजड़ गयाजिसके संग होती थी भोरऔर गुजरती थी रंगीन शामउसके नैनो के कोरों से अश्रु भी बह गयावह तो ठहरा बेचारा मर्दउसको भी हुआ होगा वैसा ही दर्दअधिकार नहीं उसे रोने […]

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