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स्टोर रूम-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Store Room Grehlakshmi Story: पड़ोसन को दीवाली की सफ़ाई करते देख मालती की हड़बड़ाहट भी बढ़ती जा रही थी।“सबने सफाई शुरू कर दी मैं ही रह गयी हूँ। बाद में तो और काम बढ़ जाएगा। रिश्तेदार भी तो पूरे शहर में फैले हैं। दस पंद्रह दिन पहले ही आना शुरू कर देते हैं।” मालती ने […]

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साथ रहने की खुशी या मजबूरी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Life Happiness Story: छोटा सा खूबसूरत कला सदन , मोहल्ले के ज्यादातर एकल परिवारों के बड़े -बड़े भवनों में पसरे सन्नाटे को अपने अंदर होते शोर गुल से मुँह चिढ़ाता रहता ‘कि देखो, तुम बड़े और भव्य जरूर हो लेकिन उदास और मायूस से खड़े दिखते हो। मुझे देखो , मैं छोटा हूँ परंतु भरा […]

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