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सारिका पिंजरस्था – 21 श्रेष्ठ नारीमन की कहानियां गुजरात

समुद्र की लहरें मानों पहाड़ो को छूने की होड़ में हिलोरे ले रहे थे… अरे कितना ऊँचा। दूर तक नजर डालने पर भी न पहुँचे इतनी ऊँची उठी। यह… तो… ए… गिरी। यह… गिरी और मैं तो गड़ जाऊँगी। ओह…ओह… यह तो जाकर टकराया चट्टान से… झाग…झाग…झाग! ‘ओह…मेरे भाल पर स्लेट किसने मारा? खून… खून…खून… […]

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