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श्रीराम का गृहप्रवेश- गृहलक्ष्मी की कविता

Shri Ram Kavita: जिनकी कृपा से पाते हैं हम जीवन में सुख और चैनउन्हीं प्रभु को बेघर देख ,मन होता था बेचैनघर रहेंगे दिलवाकर, भक्तों ने लिया फिर ठानआयीं बहुतेरी अड़चनें,गंवानी पड़ी अनेकों जानकदम डिगे नहीं बल्कि बढ़ता गया था जोशउड़ा दिये थे उन्होंने हुक्मरानों तक के होशअचरज,मेरे ही भारत में उठे राम के अस्तित्व […]

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