Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

मां की गुलाबी रेशमी साड़ी—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Short Story: ज़िन्दगी में कुछ ऐसे क़िस्से होते है …जो हमारी यादों और दिल के अहम् हिस्से होते है ।बात 1968 की है, दरसल उस दिन माँ और पापा कानपुर के “हीरपैलेस” सिनेमा हॉल से ‘मनोजकुमार’ की “उपकार” फ़िल्म देखकर घर को लौट रहे थे कि ज़ोरदार बिजली की घरघराहट के साथ मूसलाधार बरसात होने लगी।अगस्त […]

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ट्रांसफॉर्मेशन-गृहलक्ष्मी की ​कविता

Hindi Poem: कौन कहता है कि हम हाउस वाइव्स है ?अजी साहिब अब हम हाउसवाइफ नहीं ,होम मिनिस्टर/ होम मेकर्स कहलाते है ।करते है वर्क फ्रॉम होम,लेकिन ख़ुद को छुट्टी पर ही बतलाते है ।घर में रह कर हम ,घर की सरकार चलाते है ।अब नहीं खटते हम घर- गृहस्थी में सारा-सारा दिन …..अब तो […]

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