सावित्री देवी की नजरें खिड़की के पार आकाश के दूसरे छोर पर फैले नीले रंग पर टिकी थीं। बादल बार-बार आते और अपने रंग बिखरा कर चले जाते। कभी काला, कभी गहरा स्लेटी-जैसे रंग बादल बिखराते, वैसे ही रंग उनके दिलो-दिमाग को ढकते चले जा रहे थे। तेज-तेज आवाज के बीच में, बच्चों के चेहरे […]
Author Archives: डॉ. शशि गोयल
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सींक के खिलौने – 21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां उत्तर प्रदेश
आज कजली बहुत प्रसन्न है, और क्यों न हो? उसने सेठे से निकलने वाले सीके लाने में अपने बाबूजी की मदद जो की है। वहीं सेठे, जिसकी कलम से उसके बाबूजी ने बचपन में तख्ती पर सुन्दर लिखाई की है। उसने नदी के किनारे ऊँची मेड़ों पर उगे सेठों से सींके निकलवाने में कितनी मेहनत […]
