सांझ होते ही दादी अपने मोहल्ले के छोटे बड़े बच्चों को पास बिठाकर बहुत ही रंगीन मिजाज के साथ कहानी सुनाती थी। बच्चे शाम होने की राह देखते, जैसे चातक पक्षी प्यास बुझाने के लिए सावन की पहली बूंद का इंतजार करता है, उसी तरह सभी बच्चे कहानी सुनने के लिए दादी की राह तकते। […]
