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बैकवाटर – 21 श्रेष्ठ नारीमन की कहानियां जम्मू

“मैं तो अभी तक इस ‘बैकवाटर’ से बाहर ही नहीं निकली!” नाव में रॉबर्ट से पहली बार मिलने पर अन्ना ने बड़ी नाजुक-मिज़ाजी से कहा था। “फिर तो तुमने खुला सागर भी नहीं देखा होगा। यदि तुम चाहो तो मैं तुम्हें दूर तक ले जाऊँ।” धरती के कटे-फटे किनारों से धुर अंदर तक धंस आए […]

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