kids is watching reels in the garden
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Overview: रील्स से बच्चों पर पड़ता नकारात्मक प्रभाव

अगर बच्चे ज्यादा देर तक रील्स देखते हैं तो इससे उनकी मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है। जानिए इस लेख में।

Reels Addiction in Kids: आज के समय में शॉटर्स वीडियो व रील्स का चलन काफी बढ़ गया है। बड़े ही नहीं, अक्सर बच्चे भी सोशल मीडिया पर घंटों इन रील्स को देखते रहते हैं। बस 5 मिनट और की यह चाहत कब लत में बदल जाती है, इसका अंदाजा तक भी नहीं होता है। खासतौर से, बच्चों के लिए तो लंबे समय तक रील्स देखना काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इससे ना केवल बच्चों को ध्यान लगाने में समस्या होती है, बल्कि समय के साथ उनका व्यवहार भी काफी बदलने लगता है। तो चलिए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में-

kids watching reels for long time
Reels Effects

अगर बच्चा घंटों तक लगातार रील्स देखता है तो इन तेज वीडियो को देखने से बच्चों के व्यवहार में ये गंभीर बदलाव आ सकते हैं। मसलन-

बच्चों की फोकस करने की क्षमता प्रभावित होती है। उनके लिए एक जगह बैठकर पढ़ाई करना काफी मुश्किल हो जाता है क्योंकि उनका दिमाग तेज़ बदलावों का आदी हो जाता है।

रील्स की लत उनमें चिड़चिड़ापन भी पैदा करने लगती है। बच्चे का धैर्य खत्म होने लगता है और वह हर छोटी बात पर बच्चे पर इरिटेट हो सकते हैं।

यह बच्चे की क्रिएटिविटी पर भी बुरा असर डालता है। बच्चे को सब कुछ स्क्रीन पर मिल जाता है तो ऐसे में वह खुद कुछ नया करना बंद कर देता है।

बच्चा असली जीवन से दूरी बनाने लगता है। उसे स्क्रीन की दुनिया इतनी अच्छी लगने लगती है कि असली रिश्तों और असली दुनिया की खुशियों में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं रहती।

अपने बच्चे को इस डिजिटल जाल से बाहर निकालने के लिए कुछ आसान नियमों का पालन करें-

बच्चे को स्क्रीन से दूर करने की जगह आप उन्हें लंबे और अर्थपूर्ण वीडियो दिखाएं। छोटी 20 सेकंड की रील की जगह लगभग 20 मिनट के एपिसोड से उनका अटेंशन स्पैन बढ़ता है।

स्क्रीन के बाद एक्टिविटी के लिए बच्चे को प्रोत्साहित करें। जैसे ही वीडियो खत्म हो, उन्हें किसी एजुकेशनल एक्टिविटी जैसे पज़ल या कहानी की किताब में व्यस्त करें।

स्क्रीन देखने का एक निश्चित समय तय करें, जैसे शाम 5 बजे से 6 बजे तक।

parents taking back mobile to kids
What to do

कभी भी बच्चे के रोने या चिल्लाने पर उसे शांत करने के लिए कभी भी मोबाइल का सहारा न लें। हो सकता है कि बच्चा आपको ज्यादा नखरे दिखाए, लेकिन आपको डगमगाना नहीं है।

खाना खाते समय और सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल पूरी तरह दूर रखें।

हमेशा याद रखें कि बच्चे को स्क्रीन से पूरी तरह दूर करना आपका मकसद नहीं है। डिजिटल युग में बच्चे स्क्रीन से दूर नहीं रह सकते, लेकिन उसे स्मार्टली मैनेज किया जा सकता है। हमें बच्चों को इसकी लत से बचाने की जरूरत है।

मैं मिताली जैन, स्वतंत्र लेखिका हूं और मुझे 16 वर्षों से लेखन में सक्रिय हूं। मुझे डिजिटल मीडिया में 9 साल से अधिक का एक्सपीरियंस है। मैं हेल्थ,फिटनेस, ब्यूटी स्किन केयर, किचन, लाइफस्टाइल आदि विषयों पर लिखती हूं। मेरे लेख कई प्रतिष्ठित...