Summary: डिजिटल हाइजीन पर पीएम मोदी की सलाह
‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों और अभिभावकों को इंटरनेट और ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते दुष्प्रभावों को लेकर सावधान किया। उन्होंने डिजिटल हाइजीन अपनाने, स्क्रीन टाइम संतुलित रखने और तकनीक को जिम्मेदारी से उपयोग करने की सलाह दी।
Pariksha Pe Charcha 2026: ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के 9वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंटरनेट और ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज कई युवा ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग ऐप्स की वजह से मानसिक दबाव और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। हाल ही में गाजियाबाद में तीन बहनों की दर्दनाक मौत की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस बारे में कहा गया कि ऑनलाइन गेमिंग ने एक खुशहाल परिवार की जिंदगी उजाड़ दी। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने इंटरनेट को “दोधारी तलवार” बताया।
गेमिंग: शौक है या लत?
‘परीक्षा पे चर्चा’ में एक छात्र ने कहा कि उसे गेमिंग में करियर बनाना है, लेकिन अपने परिवार के विरोध की वजह से वह इसमें करियर नहीं बना पा रहा है। इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि गेमिंग को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन पढ़ाई और जिम्मेदारियों के साथ संतुलन बनाना जरूरी है। यदि कोई बच्चा गेमिंग में बढ़िया है, तो उसे अपने हुनर को सही दिशा में ले जाने की योजना बनानी चाहिए। इसके लिए स्किल डेवलपमेंट, कंटेंट क्रिएशन या ई-स्पोर्ट्स की समझ होना जरूरी है।
डिजिटल हाइजीन है नई पीढ़ी की जरूरत
पीएम मोदी ने छात्रों से “डिजिटल हाइजीन” अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह हम शारीरिक स्वच्छता का ध्यान रखते हैं, उसी तरह डिजिटल जीवन में भी अनुशासन जरूरी है। इसका मतलब है कि स्क्रीन टाइम सीमित रखना, अनजान ऐप्स से दूरी बनाना, निजी जानकारी सुरक्षित रखना और ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सजग रहना। उन्होंने बच्चों से एक अहम सवाल भी पूछा, “क्या आप तकनीक को कंट्रोल कर रहे हैं या तकनीक आपको?”
तकनीक दुश्मन नहीं, गलत आदतें हैं
प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह तकनीक या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन वह चाहते हैं कि छात्र नई तकनीक सीखें और दुनिया के साथ कदम मिलाएं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल फोन और इंटरनेट को “औजार” की तरह इस्तेमाल करना चाहिए, “मालिक” की तरह नहीं।
परीक्षा और मानसिक संतुलन
‘परीक्षा पे चर्चा’ का मुख्य उद्देश्य सिर्फ एग्जाम टिप्स देना नहीं, बल्कि छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाना भी है। पीएम मोदी ने बच्चों को “एग्जाम वॉरियर” बनने की सलाह दी, यानी परीक्षा को डर नहीं, बल्कि चुनौती की तरह स्वीकार करना। उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई के साथ मानसिक शांति बेहद जरूरी है, और इसके लिए डिजिटल ब्रेक लेना फायदेमंद हो सकता है। परीक्षा के अंकों को ही अंतिम लक्ष्य मान लेना सही सोच नहीं है।
पीएम मोदी के एग्जाम मंत्र
उन्होंने छात्रों को कुछ आसान लेकिन असरदार मंत्र भी दिए –
- परीक्षा को उत्सव की तरह लें, बोझ की तरह नहीं।
- दूसरों से नहीं, खुद से प्रतिस्पर्धा करें।
- डिजिटल फास्टिंग अपनाएं — तकनीक का सीमित और सही उपयोग करें।
- मुश्किल काम पहले निपटाएं, टालें नहीं।
- रट्टू तोता बनने के बजाय समझकर सीखें।

