Overview: सोनू निगम ने क्यों नहीं स्वीकार किया फिल्मफेयर सम्मान
‘संदेसे आते हैं’ जैसे ऐतिहासिक गीत के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड ठुकराना सोनू निगम के करियर का सबसे साहसी और सम्मानजनक फैसला माना जाता है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कला की दुनिया में सच्ची जीत पुरस्कारों से नहीं, बल्कि ईमानदारी, समानता और आत्मसम्मान से मिलती है।
Sonu Nigam Reject Filmfare Award: 1997 में रिलीज़ हुई फिल्म बॉर्डर का गीत ‘संदेशे आते हैं’ आज भी हर भारतीय के दिल को छू जाता है। सरहद पर तैनात जवानों की भावनाओं को जिस संवेदनशीलता के साथ इस गाने में पिरोया गया, उसमें सोनू निगम की आवाज़ ने जान डाल दी। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस आइकॉनिक गीत के लिए मिला फिल्मफेयर अवॉर्ड सोनू निगम ने स्वीकार ही नहीं किया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक कलाकार ने अपने करियर के सबसे बड़े मंचों में से एक को ठुकरा दिया? इसकी वजह सिर्फ अवॉर्ड नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और ईमानदारी से जुड़ी थी।
‘संदेशे आते हैं’: एक गीत नहीं, एक एहसास
‘संदेशे आते हैं’ सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं था, बल्कि यह उन लाखों परिवारों की आवाज़ बन गया जिनके अपने सरहद पर तैनात हैं। इस गीत को सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ ने मिलकर गाया था। दोनों की आवाज़ों ने मिलकर इसे अमर बना दिया। गाने की लोकप्रियता इतनी ज़बरदस्त थी कि यह देशभक्ति गीतों की पहचान बन गया।
फिल्मफेयर अवॉर्ड और विवाद की शुरुआत
जब फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की घोषणा हुई, तो इस गीत के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड सिर्फ एक सिंगर को देने की बात सामने आई। सोनू निगम को यह अवॉर्ड ऑफर किया गया, जबकि गाने में उनकी आवाज़ के साथ-साथ रूप कुमार राठौड़ की भी उतनी ही अहम भूमिका थी। यही बात सोनू निगम को अंदर से खटक गई।
सोनू निगम का आत्मसम्मान और साफ़ स्टैंड
सोनू निगम ने साफ़ शब्दों में कहा कि अगर यह गाना दो गायकों की आवाज़ से बना है, तो सम्मान भी दोनों को बराबरी से मिलना चाहिए। उन्होंने महसूस किया कि अकेले अवॉर्ड लेना न सिर्फ अनुचित होगा, बल्कि उनके साथी कलाकार के साथ नाइंसाफी भी होगी। यही कारण था कि उन्होंने फिल्मफेयर अवॉर्ड को विनम्रता से ठुकरा दिया।
इंडस्ट्री में प्रतिक्रिया: सराहना और हैरानी
सोनू निगम के इस फैसले ने म्यूज़िक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी। जहां कुछ लोग हैरान थे कि कोई कलाकार इतना बड़ा अवॉर्ड कैसे मना कर सकता है, वहीं ज़्यादातर कलाकारों और फैंस ने उनके फैसले की खुले दिल से सराहना की। इसे एक सच्चे कलाकार की पहचान बताया गया, जो सम्मान से ज़्यादा रिश्तों और ईमानदारी को महत्व देता है।
एक अवॉर्ड से बढ़कर कलाकार की पहचान
सोनू निगम का मानना रहा है कि अवॉर्ड्स से ज़्यादा ज़रूरी है कलाकार का ज़मीर और आत्मसम्मान। ‘संदेशे आते हैं’ को लोगों का प्यार मिला, यही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार था। इस घटना ने साबित कर दिया कि असली महानता ट्रॉफी में नहीं, बल्कि सही के लिए खड़े होने में होती है।
