Summary: नरगिस का बनाया खाना तीन बार गरम हुआ
नरगिस का बनाया खाना सुनील दत्त केवल शराब पीने के लिए तीन बार गरम करवा चुके थे, इसी से एक्ट्रेस को गुस्सा आया...
Nargis and Sunil Dutt Love Story: फिल्मी दुनिया के किस्से जितने चमकदार पर्दे पर दिखते हैं, उतने ही दिलचस्प पर्दे के पीछे भी होते हैं। दिग्गज अभिनेता रणजीत ने हाल ही में अपने शुरुआती दिनों का एक ऐसा ही किस्सा साझा किया, जिसमें सुनील दत्त और नरगिस दत्त के घर की एक रात आज भी उनके ज़ेहन में ताज़ा है। यह कहानी सिर्फ़ एक पार्टी की नहीं, बल्कि नरगिस जैसी बड़ी अभिनेत्री के सादगी, अनुशासन और मेहमाननवाज़ी की मिसाल है।
रणजीत बताते हैं कि यह उनकी मुंबई में दूसरी ही रात थी। नए-नए शहर में कदम रखा था और अचानक खुद को सुनील दत्त के घर एक महफ़िल में पाया। घर का माहौल बड़ा सुकून भरा था। हल्की रोशनी, रोमांटिक लाइटिंग और सुनील दत्त के कुछ करीबी दोस्त। उसी दौरान उनकी नज़र पड़ी “मदर इंडिया” नरगिस पर, जो खुद रसोई में लगी हुई थीं। नर्गिस का एक खास पकवान था…मटका गोश्त। मिट्टी के बर्तन में पकाया गया मटन, जिसकी खुशबू दूर तक फैल जाए। यह डिश उन्होंने अपने हाथों से 7-8 मेहमानों के लिए बनाई थी। नौकर ने एक बार आकर बताया कि खाना तैयार है, लेकिन महफ़िल में बैठे लोग…खासतौर पर सुनील दत्त अब भी ड्रिंक्स में मशगूल थे। सुनील दत्त ने कहा, “अभी नहीं, थोड़ा और पीने दो… खाना फिर गरम कर लेना।”
रणजीत ने आगे कहा, समय बीतता गया। एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि तीन बार खाना गरम हो चुका था। घड़ी की सुइयां रात के डेढ़ बजने की ओर बढ़ चुकी थीं। तभी पीछे से एक पतली-सी आवाज़ आई… “दत्त साहब।” हल्की रोशनी की वजह से चेहरा साफ नहीं दिखा, लेकिन आवाज पहचानने में देर नहीं लगी। यह नरगिस थीं। उनकी आवाज़ सुनते ही सुनील दत्त खड़े हो गए, साथ में बाकी लोग भी। नरगिस ने साफ शब्दों में डांट लगाई…“कितना पियोगे? खाना कितनी बार गरम कराया है। अब जल्दी आकर खाओ।” बस, इसके बाद कोई बहाना नहीं चला। सब लोग अपने-अपने गिलास लेकर सीधे खाने की मेज़ पर पहुंच गए।
प्यार से खाना परोसा नरगिस ने

रणजीत बताते हैं कि नरगिस ने खुद बड़े प्यार से खाना परोसा। मटका गोश्त की खुशबू ऐसी थी कि सब तारीफ़ करने लगे। रणजीत शाकाहारी थे, उन्होंने मना किया लेकिन सुनील दत्त ने कहा कि यह नर्गिस ने अपने हाथों से बनाया है, थोड़ा तो चखो। नरगिस ने तुरंत टोका “जबरदस्ती मत करो” और फिर खुद रसोई में जाकर उनके लिए दाल ले आईं। यह सब देखकर रणजीत बेहद प्रभावित हुए। उनके लिए यह किसी स्टारडम से बड़ी बात थी। उन्होंने महसूस किया कि इतनी बड़ी अभिनेत्री होकर भी नरगिस रात के दो बजे तक जागकर मेहमानों की देखभाल कर रही थीं। चाहतीं तो नौकर से सब करवा सकती थीं, लेकिन उन्होंने खुद सब संभाला। रणजीत कहते हैं कि उस रात उन्होंने नरगिस को सिर्फ़ एक महान अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदार और सलीकेदार इंसान के रूप में देखा। सुनील दत्त और नरगिस की यह घरेलू झलक आज भी उस दौर की सादगी और संस्कारों की याद दिलाती है, जहां शोहरत से ज़्यादा अहमियत रिश्तों और इंसानियत की थी।
