Summary:जब बच्चे डर या गलतफहमी में सच छिपाएं, तो पेरेंट्स का शांत और समझदार रवैया ही भरोसा बनाता है
बच्चों के झूठ पर गुस्सा करने की बजाय उसकी वजह समझना ज्यादा जरूरी है, ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस करें।
शांति, संवाद और नैतिक मूल्यों के जरिए ही बच्चों को सच बोलने का आत्मविश्वास दिया जा सकता है।
Handle Children Lying:जब हम बड़ों से ही गलतियां हो जाती हैं तो बच्चों के बारे में क्या ही कहा जाए। कई बार हमारे बच्चे किसी डर की वजह से या किसी गलतफहमी की वजह से बात हमसे झूठ बोलने लगते हैं या बात को छिपाने लगते हैं। पेरेंट्स होने के नाते हम इस बात को बहुत आसानी से समझ जाते हैं कि कब बच्चे कब और कहां झूठ बोल रहे हैं। लेकिन अक्सर पेरेंट्स बच्चे के झूठ बोलने पर या बात को छिपाने की बात जानकर उन पर गुस्सा करने लगते हैं या फिर उन्हें बुरा भला कहने लगते हैं। यह बिल्कुल भी सही नहीं है। जानते हैं कि इस स्थिति में आपको कैसे करना होगा डील।
खुद को शांत रखें
जब बच्चा गलत बात करता है तो गुस्सा आना एक स्वाभाविक बात है। लेकिन यहां आपको खुद को कंट्रोल कर यह जानने की कोशिश करनी है कि आखिर झूठ बोलने की नौबत आई क्यों। आप बच्चे से बहुत शांति से पूछें कि आखिर वो क्या वजह थी कि उसने अमुक स्थिति में झूठ बोला। जब बच्चा इस सवाल का जवाब देगा तो आपको बहुत सी बातें और स्थिति स्पष्ट होगी।
सामना करो

अगर आपका बच्चा दस साल से बड़ा है तो उसे कहें कि आपको हमसे डरकर झूठ बोलने की जरुरत नहीं है। उससे कहिए कि अगर वो किसी चीज की परमिशन चाह रहा है तो वो खुलकर आपसे बात करे। वहीं पेरेंट्स होने के नाते आपकी भी यह जिम्मेदारी है कि अपने फैसले थोपे नहीं। बल्कि उन फैसलों को लेने की वजह क्या है यह बताइए।
कुछ गुंजाईश भी छोड़िए

पेरेंट होने के नाते आपको इस बात को समझना होगा कि आपका जमाना और आपके बच्चों का जमाना बिल्कुल अलग है। हर जमाने के लोगों को लगता है कि उनका जमाना बेस्ट है। इसलिए बच्चों की स्टूडेंट लाइफ की तुलना अपनी स्टूडेंट लाइफ से ना करें। आज के जमाने के हिसाब से फैसले लें। हमेशा नियमों की एक फेहरिस्त में बच्चों को ना रखें। कुछ गुंजाईश भी छोड़ें। जब बच्चे आपको बदलता हुआ देखेंगे तो भी अपनी बातें आपके सामने रखेंगे। उन्हें झूठ बोलने की जरुरत नहीं होगी।
उन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ाए
यह सच है कि आप हर वक्त ना बच्चे के साथ एक परछाई की तरह रह सकते हैं। वो जैसे जैसे बड़े होते जाते हैं उनकी एक दुनिया बनती जाती है। लेकिन छुटपन से ही उन्हें सही गलत, नैतिक अनैतिक की बात बताएं। उन्हें बताएं कि एक सुपरपावर है जो हमें देख रही है। उन्हें पाप और पुण्य का कॉन्सेप्ट समझाएं।
उन्हें बताएं कि झूठ बोलने से पाप लगता है। उन्हें बताएं कि झूठ के पैर नहीं होते। अगर आप एक झूठ बोलते हैं तो उसे छिपाने के उलिए आपको अनेक झूठ बोलने पड़ते हैं। वहीं आपको हमेशा पकड़ जाने का एक डर भी बना रहता है। वहीं जो सच बोलता है उसे किसी का डर नहीं होता। वो आत्मविश्वास से भरपूर होता है। समाज में उसकी इज्जत होती है और लोग भी उस पर विश्वास करते हैं। बच्चों को यह विश्वास दिलाइए कि आपसे बढ़कर उनका कोई हितैषी नहीं है।
