Saali Mohabbat Review
Saali Mohabbat Review

Summary: “साली मोहब्बत” में है कसा हुआ रोमांच और दमदार एक्टिंग

‘साली मोहब्बत’ टिस्का चोपड़ा का डायरेक्टोरियल डेब्यू है, जो रिश्तों और रहस्यों की जटिल भावनाओं को एक थ्रिलर के रूप में पेश करता है। राधिका आप्टे और दिव्येंदु के दमदार अभिनय के साथ यह फिल्म अप्रत्याशित ट्विस्ट्स से दर्शकों को अंत तक चौंकाती रहती है।

Saali Mohabbat Review: टिस्का चोपड़ा अपनी एक्टिंग से दर्शकों का दिल पहले भी कई बार जीत चुकी हैं, लेकिन इस बार उन्होंने कैमरे के पीछे खड़े होकर एक नया जोखिम उठाया है। उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू “साली मोहब्बत” अब ZEE5 पर स्ट्रीम कर रही है। इसमें राधिका आप्टे, दिव्येंदु, अंशुमान पुष्कर और सौरसेनी मैत्रा जैसी मजबूत स्टार कास्ट  है। फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा की डिजिटल प्रोडक्शन डेब्यू ने फिल्म को पहले से ही खास बना दिया था। लोगों के सवाल , क्या यह फिल्म सच में देखने लायक है, का जवाब है ‘हां’।

“साली मोहब्बत” की कहानी स्मिता नामक एक छोटे शहर की हाउसवाइफ के इर्द-गिर्द घूमती है। बाहर से शांत और व्यवस्थित दिखने वाली उसकी जिंदगी धीरे-धीरे टूटने लगती है, जब पुराने सच सामने आने लगते हैं। इसी जगह पर फिल्म अपनी दिशा बदलने लगती है। यह फिल्म सिर्फ एक सस्पेंस थ्रिलर नहीं रहती, बल्कि एक ऐसी महिला की मानसिक यात्रा बन जाती है, जो खुद को नए सिरे से समझने की कोशिश कर रही है। रिश्तों में विश्वास कैसे टूटता है और टूटने के बाद खुद को कैसे संभाला जाता है, इसे फिल्म बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है।

फिल्म “साली मोहब्बत” का टोन आपको कई जगहों पर “दृश्यम” और “अंधाधुन” जैसे थ्रिलर्स की याद दिलाता है। हर दृश्य में एक अनकहा तनाव, हर संवाद में छिपा हुआ संकेत है, मानो कोई अदृश्य धागा कहानी को लगातार आगे ले जा रहा है। शुरुआत से ही फिल्म दर्शक को बांध लेती है और हर कुछ मिनट में ऐसा मोड़ देती है कि आप किसी भी किरदार पर पूरी तरह भरोसा कर ही नहीं सकते हैं। इसमें न तो तेज बैकग्राउंड म्यूजिक है, न ही ओवर एक्टिंग और न ही चौंकाने के लिए बनाई गई बनावटी स्थिति। 

फिल्म ऐसे ढंग से आगे बढ़ती है कि इंटरवल के बाद आपको लगता है कि फिल्म पूरी तरह से समझ आ गई। लेकिन आप जितने आश्वस्त होते हैं, उतनी ही तेजी से फिल्म आपको गलत साबित कर देती है। दर्शक यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि असल सच क्या था और वह किसके चेहरे के पीछे छिपा था।

राधिका आप्टे की एक्टिंग सहज होने के साथ शार्प भी है। एक साधारण दिखने वाली हाउसवाइफ का टूटना और फिर संभलना उन्होंने बेहद बारीकी से दिखाया है। दिव्येंदु अपने पुराने अंदाज, चपलता और मौजूदगी से कहानी में एनर्जी ले आते हैं। उनका किरदार शरारती और चालाक होने के साथ रहस्य लिए हुए है। अंशुमान पुष्कर और सौरसेनी मैत्रा भी अपनी-अपनी जगह कहानी को गहराई देते हैं। कुशा कपूर भी इस फिल्म में नजर आई हैं लेकिन प्रभावशाली नहीं लगी हैं। वहीं अनुराग कश्यप एक लोकल कसीनो चलाने वाले गजेंद्र के किरदार में बिल्कुल फिट बैठते हैं।

“साली मोहब्बत” एक ऐसी फिल्म है, जो दर्शकों को सिर्फ ट्विस्ट के लिए नहीं, बल्कि रिश्तों की भीतरी सच्चाइयों को महसूस करने के लिए है। यह महिला केन्द्रित कहानी है, लेकिन इसके इमोशन्स सबके लिए हैं। हटिस्का चोपड़ा का निर्देशन सहज और संवेदनशील है। यह फिल्म धीरे-धीरे अपना असर छोड़ती है और खत्म होने के बाद भी मन में बनी रहती है।

स्पर्धा रानी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज ने हिन्दी में एमए और वाईएमसीए से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है। बीते 20 वर्षों से वे लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट लेखन में सक्रिय हैं। अपने करियर में कई प्रमुख सेलिब्रिटीज़ के इंटरव्यू...