Summary: कपल्स के लिए सेक्सुअल हेल्थ: क्यों जरूरी है टेस्टिंग और काउंसलिंग?
भारत में सेक्सुअल हेल्थ पर शर्म और टैबू के कारण कपल्स खुलकर बात नहीं करते, जबकि यह रिश्ते की बुनियाद है।
Couple Counseling for Sexual Health: भारत में आज भी सेक्स या सेक्सुअल हेल्थ से जुड़ी परेशानियों को छुपा कर रखा जाता है। आज भी इस तरह की बातें टैबू की तरह देखी जाती है। लेकिन आज के जनरेशन को यह समझने की जरूरत है, सेक्सुअल हेल्थ की सही जानकारी का होना न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है बल्कि हेल्दी रिलेशनशिप के लिए भी बहुत जरूरी है। आईए जानते हैं इस लेख में सेक्सुअल हेल्थ टेस्टिंग और काउंसलिंग कपल्स के लिए क्यों जरूरी है।
सेक्सुअल हेल्थ टेस्टिंग क्या है और क्यों जरूरी है
सेक्सुअल हेल्थ टेस्टिंग क्या है: सेक्सुअल हेल्थ सिर्फ सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के जांच तक सीमित नहीं है। यह एक व्यापक शब्द है, जिसमें आपकी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तीनों प्रकार के स्वास्थ्य को देखा जाता है। आपके पार्टनर के साथ आपका सुरक्षित और संतुष्ट यौन संबंध की बात कही जाती है। आपके अंदर प्रजनन और गर्भधारण संबंधी समझ और समस्या को देखा जाता है। आपको बताया जाता है रिश्ते में सहमति और सम्मान होना क्यों जरूरी है।
सेक्सुअल हेल्थ टेस्टिंग क्यों जरूरी है: सेक्सुअल हेल्थ टेस्टिंग से पार्टनर एक दूसरे के हेल्थ स्टेटस को जान सकते हैं। यह केवल प्रोटेक्शन के लिए नहीं बल्कि इससे पार्टनर के बीच ट्रस्ट और ट्रांसपेरेंसी दोनों बढ़ता है।

इस तरह की टेस्ट से आप समय रहते एचआईवी, सिफलिस, गोनोरिया, क्लोनिडिया जैसी बीमारियों के बारे में जान सकते हैं जो कई बार बिना लक्षण के भी हो सकती है।
सेक्सुअल हेल्थ टेस्टिंग से रिश्ते में प्यार, भरोसा और सुरक्षा बढ़ता है, साथी एक अनजान डर और शक के कारण होने वाले तनाव से भी आप बचते हैं।
सेक्सुअल हेल्थ काउंसलिंग क्या है और कब लेनी चाहिए
सेक्सुअल हेल्थ काउंसलिंग: काउंसलिंग अर्थात किसी विशेषज्ञ की मदद से और बात करके अपनी परेशानी के समाधान तक पहुंचना काउंसलिंग कहलाता है।
यौन काउंसलिंग से कपल्स अपने रिश्ते में आने वाले शारीरिक, मानसिक परेशानियों को समझ और सुलझा पाते हैं।
सेक्शुअल काउंसलिंग से पार्टनर के बीच संवाद बेहतर होता है। वह एक दूसरे की यौन इच्छाओं की असमानता को समझ पाते हैं। अगर सेक्स के प्रति उनके मन में किसी तरह का डर, तनाव या अपराधबोध है तो उसे खत्म कर पाते हैं।
इरेक्शन, ऑर्गेज्म या इंटिमेसी से जुड़ी समस्याओं का समाधान पा पाते हैं।
कब लेनी चाहिए सेक्शुअल काउंसलिंग: अगर आपको सेक्स के डर, शर्म या तनाव महसूस होता है। अगर आपके अंदर सेक्स की इच्छा खत्म होते जा रही है या फिर पहले और अब में आपके सेक्स की इच्छा में तेजी से अंतर आया है। अगर आप रिश्ते में संवाद की कमी या फिर किसी पुराने अनुभव का आपके रिश्ते पर बुरा असर पड़ रहा है। अगर आपके साथ भी इस तरह की परेशानियां है तो आपको काउंसलर की मदद लेनी चाहिए।
सेक्सुअल हेल्थ टेस्टिंग और काउंसलिंग से फायदा
इन दोनों से ही रिश्ते में पार्टनर के बीच भरोसा बढ़ता है। वह एक दूसरे के साथ अधिक खुल पाते हैं। उनके बीच संवाद बेहतर होता है। वह अपने डर, परेशानी, तनाव को बिना झिझक के एक दूसरे से साझा कर पाते हैं।
समय रहते सेक्सुअल हेल्थ टेस्टिंग से गंभीर बीमारियों से बचाव संभव होता है।
काउंसलिंग के जरिए कपल्स एक दूसरे की इच्छाओं और सीमाओं को और बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। जिससे उनके अंदर संतुष्टि की भावना बढ़ती है और उनके अंदर सेक्स से जुड़ी चिंता, गिल्ट या फ्रस्ट्रेशन दूर होता है तथा उनका मानसिक तनाव भी घटना है।
