Summary: अरशद के पास भी बढ़िया जवाब होता है
अरशद के मुताबिक ये उनके रिश्ते का संतुलन है वे चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित और खुश रहें, जबकि मारिया चाहती हैं कि वे जमीन से जुड़े रहें और मेहनत का असली अर्थ समझें।
Maria Warsi: बॉलीवुड की चमक-दमक भरी दुनिया में कई ऐसे सितारे हैं जो वक्त के साथ गुमनाम हो जाते हैं – कुछ दोबारा चमकते हैं, तो कुछ नहीं लौट पाते। अभिनेता अरशद वारसी उन सितारों में से हैं जिन्होंने मुश्किल दौर के बाद एक बार नहीं कई दफा जबरदस्त वापसी की… खासकर ओटीटी युग में। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अरशद ने अपने संघर्ष के दिनों और अपनी पत्नी मारिया गोरेटी के साथ के बारे में खुलकर बात की।
राज शमानी के पॉडकास्ट में जब अरशद से पूछा गया कि उनका सबसे बड़ा डर क्या है, तो उन्होंने कहा, “मेरा सबसे बड़ा डर अचानक चले जाने का है… मौत से नहीं डरता बल्कि इस बात से घबराता कि अगर मैं चला गया तो अपने परिवार के लिए क्या छोड़ जाऊंगा। मैंने उनके लिए बहुत कुछ किया है, लेकिन फिर भी मन में यही डर रहता है कि अगर कल मुझे कुछ हो गया तो वे क्या करेंगे। जब तक मैं अपनी आंखों से नहीं देख लूं कि वे पूरी तरह सुरक्षित और सैटल हैं, तब तक यह डर रहेगा। मुझे लगता है हर माता-पिता को यही डर होता है।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे यह डर इसलिए और अधिक सताता है क्योंकि मैंने बहुत बुरे दिन देखे हैं। बड़ी फिल्मों के बाद भी ऐसे वक्त आए जब मेरे पास कोई काम नहीं था। मैं बस जिंदा था… दीवारों को देखता रहता था, अपनी पत्नी और बच्चों के लिए खाना बनाता था। मैं मजबूत था और मैंने कठिन दौर झेला, लेकिन अब मैंने अपने बच्चों के लिए एक आरामदायक जिंदगी बना दी है। मगर वे मेरे जितने मजबूत नहीं हैं।”

अरशद ने बताया कि उनकी पत्नी मारिया गोरेटी अक्सर इस बात पर असहमत होती हैं कि बच्चों को कितना आराम या सुविधा दी जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मारिया चाहती हैं कि उनके बच्चे… ज़ीक और ज़ेने, हर चीज खुद कमाकर हासिल करें, यहां तक कि फर्स्ट क्लास में सफर करने का हक भी।
मर्सिडीज और बंगाल भी हटा दो
अरशद ने मुस्कुराते हुए कहा, “मारिया और मैं इस बात पर बहुत बहस करते हैं कि बच्चों को क्या देना चाहिए और वे क्या डिजर्व करते हैं। जब भी हम ट्रैवल करते हैं, मैं कहता हूं कि बच्चों के लिए भी फर्स्ट क्लास टिकट बुक कर देता हूं, तो वह कहती हैं- ‘क्यों? उन्होंने ऐसा क्या किया कि वे फर्स्ट क्लास के हकदार हैं?’ वह सही कहती हैं… बच्चों को मेहनत का मूल्य समझना चाहिए और खुद कमाना सीखना चाहिए। मैं उनकी बात मानता हूं, लेकिन फिर मैं कहता हूं… ‘अगर उन्हें सिर्फ़ इस छह घंटे की फ्लाइट में सिखाना है, तो फिर बाकी सब भी हटा दो – वो बंगला, वो मर्सिडीज… सब।’” अरशद ने कहा कि यह असहमति दरअसल उनके रिश्ते का संतुलन है वे चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित और खुश रहें, जबकि मारिया चाहती हैं कि वे जमीन से जुड़े रहें और मेहनत का असली अर्थ समझें।
