Summary: लिव-इन कपल की कहानी: झगड़ों से समझौते तक, प्यार को मिला नया मोड़
नितिन और अनुष्का की कहानी बताती है कि कैसे गलतफहमियों और झगड़ों के बावजूद प्यार रिश्ते को दोबारा जोड़ सकता है। यह कहानी रिश्ते में समझ, सपोर्ट और दूसरी शुरुआत की अहमियत दिखाती है।
Short Story in Hindi: नितिन और अनुष्का पिछले पांच साल से लिवइन में रह रहे थे। शुरुआत में उनका रिश्ता बिल्कुल फिल्मी था। बारिश की पहली फुहार में दोनों सड़क पर भीगते हुए हँसते, देर रात चाय बनाते और साथ बैठकर फिल्म देखते। छोटे-छोटे सरप्राइज़, अचानक प्लान किए गए ट्रिप इसी तरह उनकी जिंदगी खुशियों से भरी थी। लेकिन समय के साथ जीवन में जिम्मेदारियां बढ़ीं और हंसी की जगह खामोशी आने लगी। तुम हमेशा मोबाइल में बिजी रहते हो, नितिन। मुझे लगता है मैं तुम्हारे लिए अब मायने ही नहीं रखती। अनुष्का की आँखों में गुस्से से ज्यादा दर्द था।
नितिन ने भी झुंझलाकर कहा , और तुम हर छोटी बात पर लड़ाई कर देती हो। ये रिश्ता अब मुझे बोझ लगने लगा है। बहस बढ़ने पर अनुष्का ने कहा हाँ ठीक कह रहे हो तुम , मुझे लगता है हमें अलग हो जाना चाहिए। नितिन ने भी ठंडी सांस भरते हुए कहा हाँ शायद यही सही है।
अगले कुछ दिन दोनों ने एक ही घर में रहते हुए भी अजनबी की तरह समय बिताया। पहले जैसी हंसी, कॉफी की महक, देर रात की बातें सब गायब हो गईं। एक दिन ऑफिस से लौटते वक्त नितिन ने दरवाजे के नीचे पड़ा एक लिफाफा देखा। नितिन पहले तो रुक गया, फिर झिझकते हुए उसे खोल लिया। अंदर मेडिकल रिपोर्ट थी , माइल्ड डिप्रेशन थेरपी सजेस्टेड और रिपोर्ट के साथ डॉक्टर का नोट था। पेशेंट को पॉज़िटिव माहौल और सपोर्टिव रिलेशनशिप की ज़रूरत है। नितिन की आँखें भर आईं।
उसे याद आया कि कैसे पिछले कुछ महीनों से अनुष्का रात को अकेले बालकनी में बैठी रहती थी, बार-बार कुछ लिखकर मिटा देती थी। उसने कई बार उससे बात करने की कोशिश की थी लेकिन नितिन ने उसे ओवरथिंकिंग कहकर टाल दिया।

नितिन को लगा जैसे किसी ने उसके कंधों पर भारी बोझ रख दिया हो। ये तो मेरी गलती है। जब उसे मेरी सबसे ज्यादा जरूरत थी, मैंने उसे अकेला छोड़ दिया।
उस शाम नितिन ने किचन में उसका पसंदीदा पास्ता बनाया। मोमबत्तियाँ जलाकर टेबल सजाई। अनुष्का अंदर आई तो हैरान रह गई। अरे ये सब किसलिए? नितिन उसके पास आया और बोलै क्योंकि मैं तुमसे माफी माँगना चाहता हूँ। मुझे तुम्हारी रिपोर्ट्स मिलीं, अनुष्का। मुझे समझ आ गया कि तुम्हारा गुस्सा किसी नफरत से नहीं, तुम्हारे दर्द से आ रहा था। और मैं तुम्हारा साथी होकर भी तुम्हारा दर्द नहीं समझ पाया।

अनुष्का की आँखों में आंसू थे। मैं तुम्हें बताना चाहती थी, लेकिन डरती थी कि तुम मुझे कमजोर समझोगे। नितिन ने उसका हाथ पकड़कर कहा तुम कमजोर नहीं हो। तुमने ये सब अकेले झेला, ये तुम्हारी ताकत है। अब हम मिलकर इसका सामना करेंगे। अनुष्का रोते हुए उसके गले लग गई।
अगले दिन नितिन अनुष्का के साथ थेरेपी सेशन में गया। दोनों ने मिलकर रिलेशनशिप काउंसलिंग शुरू की। धीरे-धीरे घर में फिर से वही पुराने दिन लौटने लगे। एक शाम दोनों बालकनी में बैठे थे। बारिश हो रही थी। नितिन ने मुस्कुराते हुए कहा याद है, पाँच साल पहले हम इसी तरह भीगे थे। अनुष्का हँस पड़ी हाँ, और तुमने मुझे गर्म चाय बनाकर दी थी।
नितिन ने धीरे से कहा अब मैं हर बार वही चाय बनाऊँगा, लेकिन कभी तुम्हें अकेला महसूस नहीं होने दूँगा। अनुष्का ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया , और मैं हर बार तुम्हें याद दिलाऊँगी कि हमारी लड़ाई भी हमारे प्यार का हिस्सा हैं। उस रात हफ्तों बाद उनके घर में हँसी गूँजी। उनका रिश्ता अब एक नया मोड़ ले रहा था।
