Overview: खुशबूदार झाग और रंग-बिरंगे बबल के पीछे छिपे हैं कई गंभीर स्वास्थ्य जोखिम
बबल बाथ देखने और अनुभव में भले ही बच्चों को आकर्षक लगे, लेकिन इसके अंदर छुपे खतरे गंभीर हो सकते हैं। पेरेंट्स को चाहिए कि वे सजग रहें और बच्चों की त्वचा व स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए केवल सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्पों का ही चयन करें।
Side Effects of Bubble Bath: बबल बाथ यानी झागदार नहाना, बच्चों के लिए एक मज़ेदार अनुभव बन चुका है। रंग-बिरंगे, खुशबूदार बबल्स के बीच खेलते हुए बच्चे नहाते भी हैं और एंजॉय भी करते हैं। यही वजह है कि कई पेरेंट्स नियमित रूप से अपने बच्चों को बबल बाथ देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये खूबसूरत दिखने वाला बबल बाथ उनकी त्वचा, सेहत और पर्सनल हाइजीन के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, रोजाना या बार-बार दिया गया बबल बाथ बच्चों में कुछ गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। आइए जानते हैं वो बड़े नुकसान जो हर पेरेंट को जानना ज़रूरी है।
त्वचा पर एलर्जी और रैशेज का खतरा

बबल बाथ प्रोडक्ट्स में अक्सर सिंथेटिक खुशबू, केमिकल्स और डाईज़ होते हैं, जो बच्चों की नाज़ुक त्वचा के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकते हैं। इससे त्वचा पर खुजली, जलन, रैशेज या एलर्जी जैसी दिक्कतें होने लगती हैं, जो लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।
यूरीनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का बढ़ता जोखिम
बबल बाथ का लंबे समय तक संपर्क पर्सनल एरिया में इरिटेशन पैदा कर सकता है। विशेष रूप से बच्चियों में इससे यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बार-बार इन्फेक्शन होने से बच्चों का इम्यून सिस्टम भी कमजोर पड़ सकता है।
प्राकृतिक तेल और नमी की हानि
बबल बाथ के दौरान बनने वाले झाग बच्चों की त्वचा से नैचुरल ऑयल्स और नमी को खींच लेते हैं। इससे त्वचा ड्राय और संवेदनशील हो जाती है। कई बार बच्चों को स्किन पीलिंग और फटी हुई त्वचा की समस्या भी हो सकती है।
सांस संबंधी समस्याओं की आशंका
बबल बाथ में इस्तेमाल होने वाले सुगंधित रसायन जब बच्चों के फेफड़ों तक पहुंचते हैं, तो उन्हें सांस लेने में दिक्कत या अस्थमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेष रूप से जिन बच्चों को पहले से एलर्जी है, उनके लिए यह अधिक खतरनाक हो सकता है।
आंखों में जलन और संक्रमण का खतरा
नहाते समय झाग आंखों में चला जाए तो बच्चों को जलन, पानी आना और सूजन की शिकायत हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा होने से आंखों में संक्रमण तक हो सकता है।
बच्चों में ‘झाग’ की आदत बन सकती है
बबल बाथ को अगर रोज़मर्रा की आदत बना दिया जाए तो बच्चे सामान्य नहाने से परहेज करने लगते हैं। यह आदत धीरे-धीरे उनकी स्किन के नेचुरल बैलेंस को भी बिगाड़ सकती है।
सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ें
अगर बच्चों को मज़ेदार तरीके से नहलाना ही है तो कैमिकल-फ्री, नैचुरल इंग्रेडिएंट्स से बने क्लींजर का इस्तेमाल करें। हफ्ते में एक बार हल्का फोमिंग बाथ दिया जा सकता है, लेकिन उसे नियमित आदत न बनाएं।
