20s vs 30s Parenting:माता-पिता बनना हर किसी के जीवन का सबसे खास पल होता है। लेकिन अगर आप 20 की उम्र में पेरेंट बनते हैं या 30 की उम्र में, तो यह सफर बहुत अलग हो सकता है। दोनों उम्र में सोच, शरीर और जिम्मेदारी को समझने का तरीका बदल जाता है। कई लोग सोचते हैं कि उम्र से फर्क नहीं पड़ता, लेकिन असल में पड़ता है – और वो भी बहुत।
20 की उम्र में आप जोश और ताकत से भरे होते हैं, लेकिन अनुभव की कमी होती है। जबकि 30 की उम्र में आप समझदार हो जाते हैं, पर थकावट जल्दी होने लगती है। आप बच्चों को अच्छे से गाइड कर सकते हैं, लेकिन उतनी फुर्ती से उनके साथ दौड़ नहीं सकते।
इस लेख में हम बताएंगे कि 20 और 30 की उम्र में पेरेंट बनने में क्या बड़ा फर्क होता है। जानिए वो बातें जो कोई नहीं बताता – फर्टिलिटी, एनर्जी, करियर, पैसे और रिश्तों से जुड़ी बातें, जो हर मां-बाप को पता होनी चाहिए।
20 की उम्र में पेरेंटिंग:
जोश ज्यादा, अनुभव कम-20 की उम्र में माता-पिता बनना मतलब है – बच्चे के साथ खुद भी बड़ा होना। इस उम्र में शरीर में ताकत होती है, बच्चे के साथ दौड़ना-भागना आसान होता है। लेकिन फैसले लेने में परेशानी होती है, क्योंकि अनुभव कम होता है।
करियर की शुरुआत चल रही होती है, पैसे कम होते हैं और समय भी संभालना पड़ता है। कई बार लोग सोचते हैं कि सब कुछ जल्दी हो गया, लेकिन जो लोग सीखने को तैयार होते हैं, वे इस उम्र में भी अच्छे पेरेंट बन सकते हैं। इस उम्र की पेरेंटिंग में बच्चे के साथ खुद भी बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है।
30 की उम्र की पेरेंटिंग:
समझ ज्यादा, थकान भी ज्यादा-30 की उम्र में लोग जीवन के अनुभव ले चुके होते हैं। इस उम्र में माता-पिता बनने का मतलब है – सोच-समझकर हर चीज़ करना। आप बच्चे को गाइड कर सकते हैं, सही और गलत में फर्क समझा सकते हैं।
इस उम्र में आमतौर पर करियर ठीक चल रहा होता है, जिससे पैसे और सुविधा मिल जाती है। लेकिन शरीर उतना साथ नहीं देता। रात की नींद पूरी न हो तो थकावट जल्दी लगती है। फिर भी, इस उम्र के माता-पिता बच्चों को बहुत प्यार और समझदारी से पालते हैं।
पैसों और करियर का फर्क
20 की उम्र में करियर की शुरुआत होती है। ऐसे में पैसे कम होते हैं और खर्चे ज्यादा। बच्चों की पढ़ाई, दवाइयां, कपड़े – सब कुछ सोच-समझकर खर्च करना पड़ता है। कई बार माता-पिता को अपनी जरूरतें पीछे रखनी पड़ती हैं।
30 की उम्र में ज़्यादातर लोग आर्थिक रूप से थोड़े मजबूत हो जाते हैं। सेविंग्स होती है, प्लानिंग आसान होती है और बच्चों के लिए ज़रूरी चीज़ें जुटाना भी संभव होता है। ये फर्क पेरेंटिंग को आसान बना देता है।
रिश्ते और समाज की सोच
20 की उम्र में पेरेंट बनने पर आपके दोस्त मस्ती में होते हैं, और आप डायपर बदल रहे होते हैं। इससे अकेलापन महसूस हो सकता है। कई बार लोग जज भी करते हैं कि इतनी जल्दी क्यों पेरेंट बने।
30 की उम्र में पेरेंट बनना समाज की नज़र में “सही समय” माना जाता है। लोग सपोर्ट करते हैं, सलाह देते हैं और परिवार भी मदद करता है। इस उम्र में आप रिश्तों को बेहतर तरीके से संभालते हैं और बच्चों के लिए ज्यादा समय निकालते हैं।
प्यार मायने रखता है, उम्र नही
पेरेंटिंग में असली बात उम्र नहीं, आपका नजरिया होता है। चाहे आप 20 में पेरेंट बनें या 30 में, अगर आप अपने बच्चे को प्यार करते हैं, समय देते हैं और सही रास्ता दिखाते हैं, तो आप अच्छे पेरेंट हैं।
हर उम्र की अपनी चुनौतियाँ होती हैं, लेकिन अगर आप सीखने को तैयार हैं, तो आप हर परेशानी से निपट सकते हैं। बच्चे को आपकी उम्र नहीं, आपका साथ और समझ चाहिए होती है। इसीलिए पेरेंटिंग में दिल सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है।
