Hanuman Jayanti Facts: हनुमान जयंती का दिन हनुमान जी के जन्म की खुशी में मनाया जाता है और इसका हमारे धार्मिक जीवन में खास महत्व है। लेकिन बहुत लोग ये नहीं जानते कि हनुमान जयंती साल में सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दो बार मनाई जाती है। कुछ लोगों को यह बात अजीब लग सकती है, पर यह सच है। अब सवाल उठता है कि एक ही भगवान का जन्मदिन दो बार क्यों? इस लेख में हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि हनुमान जयंती दो बार क्यों मनाई जाती है और इसके पीछे क्या धार्मिक कारण हैं।
कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती
इस साल हनुमान जयंती 12 अप्रैल को मनाई जाएगी। पंचांग के मुताबिक, चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि 12 अप्रैल की सुबह 3:20 बजे शुरू हो रही है और 13 अप्रैल की सुबह 5:52 बजे तक रहेगी। इसलिए ज्यादातर जगहों पर हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। इस दिन लोग सुबह-सुबह उठकर मंदिर जाते हैं, व्रत रखते हैं और हनुमान जी की पूजा करके उनका आशीर्वाद लेते हैं।
क्यों साल में दो बार मनाई जाती है हनुमान जयंती?
हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है क्योंकि इन दोनों दिनों का हनुमान जी से अलग-अलग तरह से जुड़ाव है। एक तो चैत्र महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जिसे हनुमान जी का विजय उत्सव माना जाता है। वहीं, दूसरी बार कार्तिक महीने की चतुर्दशी को मनाई जाती है, जब हनुमान जी का जन्म हुआ था। कुछ ग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म इसी चतुर्दशी को हुआ था और इसीलिए इसे उनका असली जन्मदिन माना जाता है। यही वजह है कि भक्त साल में दो बार हनुमान जयंती मनाते हैं।
चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है?
मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म चैत्र महीने की पूर्णिमा को हुआ था। इसी वजह से इस दिन को उनका जन्मदिन माना जाता है और लोग इसे धूमधाम से हनुमान जयंती के रूप में मनाते हैं।
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है?
ऐसा कहा जाता है कि इस दिन माता सीता ने हनुमान जी को अमर होने का वरदान दिया था। इसलिए कार्तिक महीने की इस खास तिथि को भी हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है।
पौराणिक कथा
एक बार की बात है, हनुमान जी को बहुत तेज भूख लगी थी। उन्होंने सूर्य को लाल फल समझ लिया और उसे खाने के लिए दौड़ पड़े। तभी देवराज इंद्र ने उन्हें रोकने के लिए वज्र से प्रहार कर दिया, जिससे हनुमान जी बेहोश हो गए। हनुमान जी पवन देव के बेटे हैं, तो अपने बेटे को ऐसा देख पवन देव नाराज हो गए और उन्होंने धरती पर हवा चलाना बंद कर दी। इससे पूरे ब्रह्मांड में संकट आ गया। बाद में जब हनुमान जी को दोबारा जीवन मिला, तो वो दिन चैत्र महीने की पूर्णिमा थी। इसी वजह से इस दिन को हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है।
