बोरवेल बने काल
Author Views: एक समय था जब हमारे बुजुर्ग कहते कि बच्चों नाखून काट कर भी किसी कागज की पुड़िया में लपेटकर कूड़े में डालना कि कहीं ऐसा ना हो कोई चिड़िया इन्हें चावल समझ कर खा ले और किसी जीव की जान हमारे कारण चली जाए। हमें बचपन से ही सिखाया जाता रहा है कि कोई नुकीली चीज, कोई कांच का टुकड़ा या कोई भी ऐसी चीज हम कूड़े में ना डालें जिससे कोई गाय या कुत्ते इसे खा लें और उनकी जान चली जाए। ऐसे संस्कार जिस देश के घर-घर में बचपन से दिए जाते रहे हों, वहां बोरवेल में गिरने के कारण गई हुई बच्चों की जानों का आखिर जिम्मेदार कौन है? अभी पिछले दिनो जयपुर में एक मासूम बच्ची की जान बोरवेल में गिरने के कारण जान चली गई, जिसको अथक प्रयासों के बावजूद भी बचाया न जा सका। हमारे देश में इस तरह की यह कोई पहली घटना नहीं थी कि बोरवेल से किसी बच्चे की जान गई हो। हमारे देश में आज तकरीबन 1.7 करोड़ बोरवेल खुले हैं। देश के ना जाने कितने ही नौनिहाल उनकी भेंट चढ़ चुके हैं। सरकार और न्यायालय भी निर्देश दे चुकी है कि कार्य के तुरंत बाद सभी बोरवेल बंद किए जाएं। पर आखिर कब तक हम यूं लापरवाही करते रहेंगे, आखिर क्यों हम जिम्मेदार नहीं होते? क्यों हम इन बोरवेल को काल बनने से नहीं रोक पा रहे हैं? जरा सोचो और इस तरफ कदम बढ़ाओ कि आगे कोई बोरवेल हमारे बच्चों के लिए काल साबित ना हो।
- ऋतु गुप्ता
खुर्जा-बुलंदशहर (उ.प्र.)
ओस सी मखमली नई
नवेली गृहलक्ष्मी
ओजंपिक इंजेक्शन के बारे में पहली बार सुना। अगर सेलिब्रिटी इसे यूज कर रहे हैं तो देर सबेर आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो जाएगी लेकिन इसके साइड इफैक्ट्स भी हैं। आज का माहौल इतना बीमार हो गया है कि
हम चाहकर भी स्वस्थ नहीं रह सकते। पुरानी कहावत ‘हवा में जहर घुल रहा है, सांस हो रही है भारी चरितार्थ हो रही है। मुझे तो खासतौर पर दिल्ली के बच्चों के लिए बहुत चिंता सताती है उनका भविष्य क्या होगा? हर
समय यहां का एक्यूआई गंभीर श्रेणी में आता है। इस बार ठंड भी उतनी नहीं पड़ी और गर्मी झेलना मुश्किल हो जाता है। पता नहीं कैसे और कब खुली हवा में सांस लेंगे। कब यहां की वायु की गुणवत्ता सुधरेगी। मैं पत्रिका की बात करते हुए अपनी बात करने लगी। गृहलक्ष्मी ने मौका दिया है अपनी बात रखने के लिए इसलिए मैंने लिखा। अगले अंक में अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए बेहतरीन टिप्स दीजियेगा। एक सुंदर अंक
उपलब्ध कराने के लिए पूरे गृहलक्ष्मी टीम को साधुवाद। ऐसे ही सुंदर अंक निकाला करें।
सीमा प्रियदर्शिनी सहाय
नई दिल्ली
सजग और समसामयिक गृहलक्ष्मी
‘खुद से ह्रश्वयार करना शुरू करें, मिलेगा एक सेहतमंद दिल’ वैलेंटाइन डे पर इससे अच्छी नसीहत और कोई नहीं दे सकता था जो गृहलक्ष्मी ने दी। मैनोपाज से निपटने का सबसे सरल और कारगर उपाय अपनी जीवनशैली बदलना है, पत्रिका के इस सुझाव से मैं शत-प्रतिशत सहमत हूं। ग्रे डायवोर्स सेलिब्रिटीज के बाद अब मध्यम वर्ग में भी पांव पसार रहा है। यह एम्पटीनेस्ट सिंड्रोम से पनपी समस्या है। बचपन में होमवर्क, जवानी में होम लोन, बुढ़ापे में होम अलोन, और तब यह समस्या उपजती है। आवश्यकता है पसंदीदा रिश्तों को संभाल कर रखने की। ये खो गए तो गूगल भी नहीं ढूंढ पाएगा, गृहलक्ष्मी समसामयिक मुद्दों को उठाकर हमें जागरुक बनाए रखती है।
- संगीता
जोधपुर (राजस्थान)
वेलेंटाइन की खुमारी से सराबोर
गृहलक्ष्मी का फरवरी 2025 का ‘लव एंड रोमांस’ स्पेशल अंक मनभावन और प्रशंसनीय था। संपूर्ण अंक वेलेंटाइन की खुमारी से सराबोर रहा। ‘वैलेंटाइन पर लाल नहीं, पहनें ये रंग’ और ‘ब्रेकफास्ट रेसिपी से जताएं प्यार, वेलेंटाइन को और भी ज्यादा प्यारा और पार्टनर को दीवाना बनाने के अच्छे कॉन्सेह्रश्वट रहे। ‘ग्रे डिवोर्स का चलन’ सोचने पर मजबूर कर दिया। मैं गृहलक्ष्मी पत्रिका की दो दशक से भी ज्यादा की पाठिका हूं।मैं पत्रिका के सभी स्तंभ, कहानियां और कॉलम्स को बड़ी उत्सुकता से पढ़ती हूं और साथ ही संपादकीय कॉलम को भी जरूर पढ़ती हूं। पहले संपादक महोदया ‘तबस्सुम जी’ के शब्द भी संपादकीय कॉलम की जान
थे। अब संपादक ‘वंदना वर्मा जी’ ने भी संपादकीय कॉलम को भली-भांति संभाला हुआ है। मेरी शिकायत है कि पूरी मैगजीन में कहीं भी ‘विश्व पुस्तक मेला’ की कोई भी तस्वीर, कॉलम या लेख नहीं दिखाई दिए।
पूजा राघव
शाहदरा (दिल्ली)
प्यार से भरा अंक मैं गृहलक्ष्मी की नियमित पाठिका हूं और विगत वर्षों से पत्रिका का अवलोकन कर रही हूं। हर अंक उपयोगी, रोचक व बहूमूल्य सुझाव व जानकारी से भरा होता है। गृहलक्ष्मी का फरवरी अंक ‘लव एंड रोमांस’ स्पेशल बेहद रोचक लगा। गृहलक्ष्मी कालम डायटीशियन रितिका के टिप्स और बेहतरीन सुझाव पसंद आए। मैं मेनुपॉज स्टेज से गुजर रही हूं और डाइटरी लाइफस्टाइल चेंज से हम अपनी जीवनशैली में बदलाव ला कर सुधार ला सकते हैं। कहानी ‘डर के आगे जीता है’ विनय जी द्वारा लिखित प्रेरणादायक लगी। फैशन और ज्वेलरी ने वैलेंटाइन डे पर चार-चांद लगा दिए। खूबसूरत मेहंदी डिजाइन बेहद पसंद आए। मेकअप 8 तरह
के खूबसूरत आई लाइनर ने लुक को कम्पलीट किया। ब्रेकफास्ट रेसिपी ने हस्बैंड व परिवार जनों का दिल जीत लिया।
- सुप्रिया अग्रवाल
नोएडा (उ.प्र.)
पुरस्कृत पत्र
ऋतु गुप्ता, खुर्जा-बुलंदशहर (उ.प्र.)
