Stress and Migraine: माइग्रेन लाखों लोगों को परेशान करता है, बच्चे हों या बड़े यह आमतौर पर तेज, दर्दनाक और बहुत तकलीफ देह होता है।
सोने का समय न बदलें
रेग्युलर स्लीप पैटर्न मेंटेन करने की आदत अपनाएं। एक ही वक्त पर सोने जाएं और एक ही वक्त पर उठें।
माइग्रेन के लक्षण और दर्द की बात करें तो मेरी सलाह है कि दर्दनिवारक दवाइयों पर निर्भर न रहें। मैं ये नहीं कह रहा कि आपको दर्द सहना चाहिए, बल्कि ये समझना जरूरी है कि आपके शरीर में किसी भी लक्षण का मतलब है कि आपको उसकी जड़ तक जाकर कारण को ठीक करना होगा।
पेनकिलर्स का इस्तेमाल करने से आपकी आंत को नुकसान हो सकता है, किडनी और लिवर पर ज्यादा दबाव पड़ता है। कुछ समय बाद, आपका शरीर इन दवाओं का आदि हो जाता है और ये असर करना बंद कर देती हैं।इसलिए माइग्रेन के लक्षणों का जड़ से इलाज करें।
माइग्रेन के छिपे हुए मुख्य कारण
माइग्रेन के कई कारण हो सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कारण या ट्रिगर्स हैं-
1.मैग्नीशियम की कमी
मैग्नीशियम की कमी माइग्रेन का एक बड़ा कारण हो सकती है। सिर्फ मैग्नीशियम लेवल सही करके ही माइग्रेन की तीव्रता और बारबार होने वाली समस्या को कम किया जा सकता है।
2.विटामिन डी की कमी
विटामिन डी, मैग्नीशियम के अवशोषण में मदद करता है। अगर आपको बार-बार सिरदर्द होता है, तो विटामिन डी की जांच कराएं।
3.फूड इंटॉलरेंस (खाने से एलर्जी)
अगर आपको बार-बार माइग्रेन होता है, तो आपका डॉक्टर या हेल्थकेयर एक्सपर्ट आपको फूड टॉलरेंस टेस्ट कराने की सलाह देंगे।
4.क्रॉनिक स्ट्रेस
अगर आप हमेशा तनाव में रहते हैं, तो आपकी धमनियां और रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड फ्लो मुश्किल हो जाता है। दिमाग में ब्लड फ्लो कम होने से माइग्रेन का दर्द हो सकता है।
5.प्रकाश और शोर के प्रति सेंसेटिविटी
तेज रोशनी, तेज आवाजें, स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना या तेज गंध भी माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है।
6.पीरियड से जुड़े माइग्रेन
कई महिलाओं को पीरियड्स के आसपास या ओव्यूलेशन के समय माइग्रेन ज्यादा होता है। जब एस्ट्रोजन का स्तर गिरता है, तो माइग्रेन बढ़ सकता है।
7. विटामिन बी12 की कमी
अपने विटामिन बी12 लेवल की जांच कराएं। ये न्यूरोलॉजिकल फंक्शन्स को रेग्युलेट करने में मदद करता है। इसकी कमी से माइग्रेन सिरदर्द हो सकता है।

8.कब्ज
जब आपको बार-बार कब्ज और खराब गट हेल्थ की परेशानी होती है, तो इससे माइग्रेन के सिरदर्द होने की संभावना बढ़ जाती है।
9.एसिडिक फूड्स
एसिडिक फूड्स जैसे- वाइन, एज्ड चीज, स्मोक्ड मीट में इस्तेमाल होने वाले
प्रिजर्वेटिव्स माइग्रेन का कारण बन सकते हैं।
10.हाइड्रेशन की कमी और
इलेक्ट्रोलाइट्स का नुकसान हाइड्रेशन बहुत जरूरी है। शरीर में पानी की थोड़ी भी कमी माइग्रेन और सिरदर्द का कारण बन सकती है। इसके साथ ही इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी भी चिंता का कारण है।
इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने का आसान तरीका है- नारियल पानी पीना या फिर पानी में एक चुटकी सेल्टिक सी सॉल्ट मिलाना। माइग्रेन की बार-बार होने वाली परेशानी को कम करने के लिए जो
लाइफस्टाइल चेंजेस मदद कर सकते हैं-
1. एक डायरी मेंटेन करना शुरू करें, जिसमें यह नोट करें कि आपको सिरदर्द कब होता है। रिकॉर्ड मेंटेन करने से आप अपने माइग्रेन के कारणों को पहचान सकते हैं।
2. गहरी सांस लेना भी माइग्रेन को रोकने में बहुत असरदार है। प्राणायाम जैसे- अनुलोम
विलोम और भ्रामरी भी आपकी काफी मदद कर सकते हैं।
माइग्रेन से निपटने के तरीके
3-4 काली मिर्च के दाने लें, उन्हें 4-5 घंटे पानी में भिगोकर रखें, फिर उन्हें धीरे-धीरे चबाएं। फिर पानी के साथ निगल लें। आप इसे खाने के साथ भी ले सकते हैं। ये 15-20 मिनट में राहत देगा।
1. अनानास और पपीता जैसे फल ब्रॉमेलिन और पपैन जैसे एंजाइम्स होते हैं। ये एंजाइम पाचन में मदद करते हैं और एसिडिटी, सूजन, और अपच जैसी समस्याओं को ठीक करते हैं। ये शरीर में सूजन कम करने में भी
मदद करते हैं, जिससे माइग्रेन का दर्द कम होता है।
2. एसेंशियल ऑयल्स दर्द को महसूस करने के तरीके को बदलने और आराम को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। 2-3 बूंद लैवेंडर, अदरक या पेपरमिंट एसेंशियल ऑयल को एक कैरियर ऑयल जैसे शुद्ध कोल्ड-प्रेस्ड
नारियल तेल में मिलाएं। इस मिश्रण से टेम्पल्स की मालिश करें ताकि दर्द कम हो सके।
