Hindi Love Story: एक्टिंग की दुनिया में होकर भी सच्चाई की ज़मीन पर पलते रिश्तों के लिए सौरभ और ज़ारा की मुहब्बत एक मिसाल है। इन दोनों की पारंपरिक समझदारी से सींचे जाते रिश्ते को देखकर मन में यही बात आती है कि बचे रहें ये ज़िंदगी में हर नज़रे– बद से। इनकी बहुत-सी दिलचस्प बातें सामने आईं उस मुलाकात में, जो मुंबई ब्यूरो चीफ़ गरिमा चंद्रा ने की गृहलक्ष्मी के लिए-
जिया जले सीरियल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सौरभ पांडे ने छोटे शहर से मुंबई आकर अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत की। शौर्य और सुहानि ,गंगा की धीज, रजि़या सुल्तान जैसे सीरियल में दमदार अभिनय के ज़रिये दर्शकों का भरपूर प्यार पाया। इस इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के अलावा सौरभ का एक सपना ज़ारा बेरिंग जैसी पत्नी पाने का था, जो जल्दी ही पूरा हुआ ज़ारा के रूप में।
मूल रूप से कनाडा की ज़ारा तमिल और बॉलीवुड फ़िल्म्ज़, दोनों ही जगहों पर एक्टिंग की दुनिया में अपनी विशेष पहचान रखती हैं। वे भी एक्टिंग के अपने सपने को साकार करने के लिए ही मुंबई आई थीं। सौरभ और ज़ारा की मुलाकात एक एक्टिंग इंस्टिट्यूट में हुई थी, जो जल्दी ही दोस्ती में बदल गई और दोस्ती प्यार में। छह साल तक इस रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने ही अपने रिश्ते को शादी के पवित्र बंधन में बांधने का फैसला कर लिया और आज वे एक आइडियल कपल के रूप में जाने जाते हैं।
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दोस्ती ने यूं दी प्यार की दस्तक

वर्ष 2005 में एक एक्टिंग की क्लास में हुई ज़ारा और सौरभ की मुलाकात बस एक सरसरी ‘हाय-हैलो वाली ही मुलाकात थी। उस समय ये दोनों मिले और अपनी-अपनी जि़ंदगी में आगे बढ़ गए। कोई पहली नज़र का आकर्षण तो था नहीं, इसलिए उस वक्त तो दोनों के बीच कोई ज़्यादा बातचीत वगैरह भी नहीं हुई, दोस्ती तो दूर की बात थी। फिर जब वर्ष 2008 में सौरभ की बर्थडे पार्टी में उनकी मुलाकात ज़ारा से दोबारा हुई तो विचारों की समानता ने दोस्ती की नींव डाल दी। दोनों की मुलाकातों का सिलसिला शुरू होकर परवान चढ़ने लगा और जल्दी ही दोनों को ये महसूस होने लगा कि ये दोस्ती प्यार का रंग लेने लगी है।
साथ से साथी बनने का सफ़र

यह एहसास भी एक दिलचस्प वाकिये से जुड़ा है। अपने पहले सीरियल ‘जिया जले की शूटिंग में बिज़ी सौरभ को अचानक ही यूं लगने लगा कि ज़ारा के साथ अपने रिश्ते को नाम देने का वक्त आ चुका है। इस जुड़ते संजोग से सौरभ ने उसी व्यस्तता के बीच ज़ारा को फोन किया। उस वक्त ज़ारा जिम में ट्रेडमील पर एक्सरसाइज़ कर रही थीं। सौरभ ने बिना किसी भूमिका के सीधे ही कह दिया कि आई लाइक यू, आई हेव फीलिंग्स फॉर यू एंड येस…आई लव यू। जवाब में यही शब्द ज़ारा के भी थे।
शादी से पहले ही पनपी समझदारी
हालांकि शादी का फैसला लेने में दोनों ने ही एक-दूसरे को पांच-छह साल का वक्त दिया। दोनों ही इस बात पर गहरा विश्वास जताते हैं कि वे शादी जैसे पवित्र और प्रतिबद्ध रिश्ते की अहमियत समझते हैं। वे नहीं चाहते थे कि जल्दबाज़ी में शादी का फैसला करके वे जुड़ तो जाएं, लेकिन प्यार की दुनिया से निकलकर जि़ंदगी की सच्चाई का सामना करते ही एक-दूसरे में मीन-मेख निकालें और जब चाहें इस रिश्ते से अलग हो जाएं, जैसा कि आज हर दूसरे कपल्स के साथ होने लगा है।
इस लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान भी बहुत सारे उतार-चढ़ाव आए, लेकिन हर कदम पर दोनों ने ही अपना साथ बरकरार रखा। इस बात को दोनों के ही परिवार भी समझ चुके थे कि ये जोड़ी शादी की गरिमा को बनाए रखने में पूरी तरह से सक्षम है। दोनों के ही परिवारों के लिए इनकी खुशी हर बात से ऊपर थी। सो जल्दी ही मुंबई में पारंपरिक ढंग से हुई शादी में ये दो जिस्म एक जान बन गए।
प्यार बदला प्रतिबद्धता में
शादी के बाद सभी की जि़ंदगी बदलती है, ज़ारा और सौरभ की भी बदली, लेकिन एकदम रातोरात नहीं, बल्कि धीरे-धीरे। जहां पहले ज़ारा ने अपने करियर पर फोकस करने के चलते घरेलू कामों में कोई खास दिलचस्पी नहीं ली थी, वहीं अब शादी के बाद वह एक परफेक्ट होममेकर की तरह घर संभालने लगी थीं। उधर सौरभ भी अब एक प्रेमी से जि़म्मेदार पति का रूप लेने लगे थे। जिं़दगी को देखने के नज़रिये में बदलाव आया। बड़ी जि़म्मेदारी का एहसास होने लगा। हर छोटे-बड़े फैसले मिलकर लेना, लाइफ में बैलेंस बनाने की कोशिश करना, कभी किसी बात पर लड़ पड़ना और फिर एक-दूसरे को मनाना, शादी के बाद सभी की जिं़दगी से जुड़ी ये बातें इतनी प्यारी होती हैं कि उम्र भर के लिए सुखद यादें छोड़ जाती हैं।
दो प्रदेश जुड़े एक नज़रिये में
सौरभ उत्तर प्रदेश से हैं और ज़ारा कनाडा से। दोनों के बैकग्राउंड एकदम अलग थे, पर मॉरल वैल्यूज़ मिलते-जुलते थे। यही वह वजह थी, जिसके चलते दोनों ने ही एक-दूसरे के परिवारों में जल्दी ही अपने लिए एक ख़ास जगह बना ली। हमारे बुजुर्ग सही कहते थे कि शादी कोई गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं है। यह एक-दूसरे से किया गया वह वायदा है, जो दो लोगों को एक कर देता है। यही कमिटमेंट शादी जैसे रिश्ते को पवित्रता और विश्वसनीयता देता है। सौरभ और ज़ारा इस बात को एकमत होकर कहते हैं कि अगर हम सिर्फ इतना याद रखें कि हमने एक-दूसरे से प्यार किया है, कुछ वायदे किए हैं तो विश्वास कीजिए, पूरी जि़ंदगी प्यार करते, रूठते-मनाते आसानी से कट जाएगी।
सम्मान ज़रूरी है जीवनसाथी का

ज़ारा सौरभ की तरफ़ देखकर मुस्कुराती हुई कहती हैं कि रिश्ता चाहे जो भी हो, एक-दूसरे के प्रति प्यार, सम्मान और भरोसा ही हर रिश्ते का बेस होता है। शादी के बाद भी इन गुणों के बिना किसी कपल का रिश्ता पूरा नहीं होता, पर मैं लकी हूं कि मुझे सौरभ जैसा जीवनसाथी मिला। इनकी सबसे बड़ी क्वॉलिटी है, सब को सम्मान देना। उन्हें इस बात से कभी फर्क ही नहीं पड़ता कि सामने वाले का बैकग्राउंड क्या है, वह कोई सिलेब्रिटी है या कोई और।
उनकी ये बात हमेशा मेरा दिल छू जाती है। सौरभ वास्तव में एक बहुत ही ख़ास, बहुत ही अच्छे इंसान हैं। मैं जितना उनसे प्यार करती हूं, उनके लिए उतना ही सम्मान मेरे मन में भी है। इसी बात को सौरभ आगे बढ़ाते हैं यह कहकर कि हमारी फील्ड में जहां कदम-कदम पर ऐसे लोग मिलते हैं, जो सिर्फ दिखावा करते हैं, बनावटी लगते हैं, उसी जगह होकर भी अपने पारंपरिक मूल्यों को, अपनी सच्चाई को बचाए रख पाना आसान नहीं है।
रिश्ता चाहे जो भी हो, एक-दूसरे के प्रति प्यार, सम्मान और भरोसा ही हर रिश्ते का बेस होता है। शादी के बाद भी इन गुणों के बिना किसी कपल का रिश्ता पूरा नहीं होता।
