यह सच है कि आप गर्भावस्था में वाटर स्की या घुड़दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकतीं लेकिन फिर भी कुछ फिटनेस व्यायाम तो कर ही सकती हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए कसरत के कार्यक्रम चुनने से पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें। आपको पता चलेगा कि ऐसी अवस्था में कितनी ही ऐसी गतिविधियाँ हैं, जो आपके लिए खतरनाक हो सकती हैं।जैसे फुटबॉल, बास्केटबॉल, स्कूबा डाइविंग या फिर मांउटेन बाइकिंग, प्रेगनेंसी वर्कआउट में क्या करें व क्या न करें। यह जानने के लिए निम्नलिखित टिप्स पर ध्यान दें।

टहलना :- यह व्यायाम तो कहीं भी, कभी भी हो सकता है। आपकी व्यस्त दिनचर्या में इससे आसान व्यायाम हो ही नहीं सकता। याद रखें कि कुत्ते को टहलाने के लिए की गई चहलकदमी या फिर बाजार से सामान खरीद लाना भी इसमें शामिल है। इसे आप नौवें महीने तक बेहिचक जारी रख सकती हैं। इसके लिए किसी उपकरण जिम की सदस्यता या फीस की जरूरत नहीं पड़ती। बस आपको बढ़िया व आरामदेह जूते और कपड़े चाहिए। यदि नया-नया टहलना शुरू किया हो तो ज्यादा न टहलें। अपने दोस्तों, पति या साथी के साथ टहलें। आप चाहें तो वॉकिंग क्लब भी शुरू कर सकती हैं। मौसम साथ न दे तो मॉल में चहलकदमी करें।

जॉगिंग :- यदि आप अनुभवी नहीं हैं तो आपको अपनी जॉगिंग का समय व दूरी ध्यान में रखने होंगे। ट्रेडमिल पर भी इसी बात का ध्यान रखें। याद रखें कि गर्भावस्था में लिगामेंट व जोड़ों के ढीलेपन की वजह से, दौड़ना मुश्किल हो सकता है व चोट लग सकती है इसलिए इसे जरूरत से ज्यादा न करें।

कसरत की मशीनें :- गर्भावस्था में ट्रेडमिल,एलिप्टिकल्स व स्टेयर क्लाइम्बर्स ठीक रहते हैं। मशीन की गति, झुकाव व तनाव इस तरह तय करें कि वे आपके लिए आरामदायक हों।पहले-पहल धीरे-धीरे शुरूआत करें। आखिरी तिमाही में मशीनों का वर्कआउट काफी कड़ा हो सकता है।

तैराकी व पानी में वर्कआउट :- माना आप इन दिनों छोटी सी बिकनी पहनने के मूड में नहीं है लेकिन पानी में वर्कआउट आपके लिए काफी फायदेमंद है। इससे आपकी मजबूती व लोच बढ़ेगी, जोड़ों का कोई नुकसान नहीं होगा और जरूरत से ज्यादा गर्मी लगने का डर नहीं रहेगा। टांगों व पैरों की सूजन व शियाटिका के दर्द से राहत मिलेगी। कई जगह पूल में एरोबिक्सकी सुविधा भी दी जाती है। बस वहाँ फिसलन भरी जगह का ध्यान रखें व छलांग न लगाएँ,क्लोरीन युक्त पूल में ही जाएँ।

स्टेप रूटीन :- यदि आप पहले से अच्छी शेप में हैं और स्टेप रूटीन का अनुभव भी है, तो इसे गर्भावस्था में भी जारी रख सकती हैं। बस याद रखें कि इन दिनों जोड़ों में आसानी से चोट आ सकती है इसलिए अपने को जरूरत से ज्यादा न थकाएँ। किसी ऐसी ऊंची जगह पर पाँव न रखें, वहां से गिरने का खतरा रहता है पेट फैल रहा है इसलिए ऐसी गतिविधियाँ न करें जिनमें संतुलन साधना पड़ता है।

आउटडोर खेल (हाइकिंग, स्केटिंग,बाइसाइकलिंग व स्कीइंग) :- गर्भावस्था किसी नए खेल की चुनौती लेने का समय नहीं है, खासतौर पर जिसमें अधिक संतुलन साधना पड़ता है वैसे अनुभवी खिलाड़ी अपने अभ्यास को जारी रख सकते हैं। वैसे हाइकिंग करते समय थोड़ा सावधान रहें। बाइकिंग करते समय हेलमेट पहनें, फिसलन भरी जगह पर बाइक न चलाएँ (गिरने से बचें) रेस लगाते समय ज्यादा न झुकें। वैसे भी यह समय कोई रेस लगाने का नहीं है। आइस स्केटिंग शुरूआत में तो कर सकती हैं लेकिन बाद में आपको संतुलन बनाने में मुश्किल हो सकती है। इसी तरह घुड़सवारी में भी सावधान रहें। कोई भी आउटडोर खेल क्यों न हों, स्वयं को थकान से बचाएँ।

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पिलैट्स :- यह भी योग की तरह ही होता है। इससे भी मांस पेशियों की लोच व ताकत बढती है । आपके पोश्चर में सुधार होता है व पीठ दर्द में आराम मिलता है। गर्भवती महिलाओं की कक्षा में जाएं या प्रशिक्षक को बता दें कि आप गर्भ से हैं।

ताई ची :- यह ध्यान की एक प्राचीन पद्धति है। इसकी धीमी प्रक्रिया से शरीर को कोई चोट नहीं पहुँचती लेकिन शरीर को मजबूती मिलती है। यदि आप इस क्षेत्र की अनुभवी हैं तो गर्भावस्था में भी इसे जारी रख सकती हैं । गर्भवती महिलाओं की कक्षाओं में ही जाएँ व ऐसी मुद्रा ही करें, जिनमें आप आसानी से संतुलन बना सकें।

किकबॉक्सिंग :- इसके लिए काफी कड़ी मेहनत और गति चाहिए। गर्भवती महिला के लिए ये दोनों ही ठीक नहीं हैं। यदि आप इस मामले में काफी अनुभवी हैं तो इसका थोड़ा अभ्यास कर सकती हैं। नए खिलाड़ियों को तो हम मना ही करेंगे। ऐसी कोई गतिविधि न करे,जिससे आप पर दबाव पड़े। दूसरे किकबॉक्सर्स से दूरी रखें। आप नहीं चाहेंगी कि कोई गलती से आपके पेट पर किक लगा दे। कक्षा में सबको पता होना चाहिए कि आप गर्भवती हैं या फिर आप गर्भवती महिलाओं की कक्षा में ही जाएँ।

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एरोबिक्स :- अच्छी शेप वाले अनुभवी एथलीट गर्भावस्था में भी डांस एरोबिक चालू रख सकते हैं। अपने-आप को जरूरत से ज्यादा न थकाएँ। यदि आप नई हैं तो पानी वाले व्यायाम करें, वे आपके लिए सही रहेंगे।

भार प्रशिक्षण :- भार उठाने से आपकी मांसपेशियों की टोन बढ़ सकती है लेकिन ऐसा भार न उठाएँ, जिसमें सांस रोकनी पड़ती है।इससे गर्भाशय की ओर रक्त प्रवाह में बाधा आएगी। आप चाहें तो हल्का भार उठा सकती हैं।

थर्टी मिनट प्लस :- यदि डॉक्टर ने हरी झंडी दिखा दी है तो आप अपनी मर्जी से दिन में घंटे से ज्यादा वर्कआउट कर सकती हैं इस हालत में थकान जल्दी होती है और थकान होने पर चोट लग सकती है। जरूरत से ज्यादा थकान से शरीर में पानी की कमी हो सकती है या आपको सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। इस हालत में ज्यादा कैलोरी खर्च करेंगी तो आपको ज्यादा कैलोरी लेनी भी पड़ेगी। इसलिए इसका इंतजाम भी पहले से ही कर लें।

योग :- योग से शिथिलता आती है व केंद्रित होने में मदद मिलती है यह गर्भावस्था के लिए सबसे श्रेष्ठ है इससे शिशु को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। शरीर की लोच बढ़ती है। डिलीवरी व प्रेगनेंसी दोनों ही काफी आसान हो जाते हैं।ऐसी कक्षा चुनें, जहां गर्भवती महिलाओं को ही योग सिखाया जाता हो क्योंकि समय-बढ़ने के साथ-साथ मुद्राओं में थोड़ा बदलाव लाना पड़ता है। 

नोट :- बिक्रम योग न करें क्योंकि यह गर्म तापमान में किया जाता है।

श्वसन क्रिया :-  माने या न माने, यदि सही तरीके से की जाये तो श्वसन क्रिया भी एक व्यायाम बन सकती है। गहरी सांस लेने से शरीर के प्रति सजगता बढती है। आप अधिक मात्रा में आक्सीजन ले पाती हैं। सीधा बैठ कर अपने दोनों हाथ पेट पर रखें । सांस लेते समय व छोड़ते समय पेट का गिरना व उठना महसूस करें। नाक से साँस ले व मुँह से छोड़ें । गिनते हुए अपनी सांस पर ध्यान एकाग्र करें सांस लेते समय 4 तक व सांस छोड़ते समय 6 तक गिनें। प्रतिदिन श्वास पर ध्यान केन्द्रित करने का अभ्यास करें ।

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