महिलाओं को यदि हार्ट अटैक अटैक आता है तो उनको पुरुषों के मुकाबले 11 प्रतिशत अधिक मृत्यु की सम्भावना होती है। महिलाओं को 18 से 55 वर्ष की आयु के बीच इसके संकेत भी पुरुषों के मुकाबले अधिक मिलते हैं और वह पुरुषों के मुकाबले अधिक दम तोड़ती हैं।
इसके पीछे का एक मुख्य कारण यह होता है कि महिलाएं ठीक ढंग से अपने हृदय की देख भाल नहीं करती हैं। महिलाओं को हार्ट अटैक के अधिक लक्षण भी नहीं दिखाई देते हैं। उन्हें केवल हल्के फुल्के संकेत जैसे पेट में या सिर के दर्द आदी महसूस होते हैं। वह इन संकेतों को ज्यादा गम्भीरता से नहीं लेती हैं और ऐसे ही हल्के में टाल देती हैं जो आगे जाकर उनकी और अधिक खराब हालत का कारण बन सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं को अपना ख्याल खुद रखना चाहिए। उन्हें छोटे से छोटा लक्षण भी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। उन्हें यदि लगता है कि यह लक्षण अनजान है तो तुरन्त डॉक्टर के पास जा कर उनसे राय लेनी चाहिए। डॉक्टरों को भी महिलाओं के हृदय से जुड़ी समस्याओं को उतनी ही गम्भीरता से लेना चाहिए जितना वह पुरुषों कि समस्या को लेते हैं। यदि महिलाओं को उपचार सही मिलेगा तो वह भी अपने रोगों को जल्द से जल्द ठीक करके वापिस पहले जैसी बन सकती हैं।
इसके साथ ही एक महिला डॉक्टर कहती हैं की महिलाओं को हृदय से जुड़े रिस्कों के बारे में जानकारी देना भी बहुत आवश्यक है। हमें उन्हें जानकारियां देनी चाहिए कि महिलाओं को यदि हार्ट अटैक आता है तो उन्हें किस प्रकार के लक्षण देखने को मिल सकते हैं। इस प्रकार की जानकारियां महिलाओं को देकर हम उन्हें बहुत सी बीमारियो के जाल से बचा सकते हैं। हमें किसी प्रकार के एजुकेशनल प्रोग्राम शुरू कर देने चाहिए।
पुरुषों को तुलना में महिलाओं में यह निम्न तथ्य पाए गए हैं
महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले हार्ट अटैक आने की संभावना बहुत कम होती है। इनका प्रतिशत 78 व 81 है।
हृदय की ब्लॉक आर्टरीज को खोलने के लिए महिलाओं में स्टेंट व बलून आदि का प्रयोग कम किया जाता है। इस का प्रतिशत 59 व 64 है।
हृदय के फंक्शन के लिए महिलाओं में मैकेनिकल पंप का प्रयोग पुरुषों के मुकाबले कम किया जाता है। इस का प्रतिशत 50 व 59 है।
रिसर्च में यह भी पाया गया है कि जिन महिलाओं का स्किन colour काला होता है वह गोरी महिलाओं व पुरुषों के मुकाबले अधिक हार्ट अटैक की शिकार होती हैं। जो महिलाएं गरीब होती हैं उन्हें इन चीजों के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं होता है। अतः उन्हें भी हार्ट अटैक की सम्भावना अधिक रहती है। धन की कमी की वजह से पोषण आदि पर्याप्त मात्रा में न ले पाना भी इसके पीछे का कारण हो सकता है।
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