पूरे शरीर में तकलीफ है, आप सो नहीं सकतीं, पीठ में तेज दर्द है, टखनों में सूजन है, बुरी तरह से कब्ज है। दूसरे शब्दों में कहें तो आप गर्भवती हैं। आप इन दुख-तकलीफों को घटाने की थोड़ी कोशिश करें, वैसे दिन में 30 मिनट के व्यायाम से काफी मुश्किलें हल हो सकती हैं। आपको अपना आलस छोड़, दिन में कम से कम आधा घंटा तो व्यायाम करना ही चाहिए। ज्यादातर महिलाएँ इस सलाह को अपनाकर फिट रहती हैं। यदि डॉक्टर मना न करें तो आप भी इस सलाह पर अमल कर सकती हैं। आपको पता होना चाहिए कि इस व्यायाम से आपको व शिशु को कितना लाभ हो सकता है।
नियमित व्यायाम से लाभ
- कई बार ज्यादा आराम भी आपको थका देता है। थोड़े से व्यायाम से आपकी ऊर्जा का स्तर बढ़ता है।
- व्यायाम करने से आपकी नींद पहले से काफी बेहतर हो जाती है और आप सोकर उठने के बाद तरोताजा महसूस करती हैं।
- व्यायाम करेंगी तो गैस्टेशनल मधुमेह से बची रहेंगी।
- व्यायाम करने से मस्तिष्क से एंडोरफिन का स्राव होता है आप का मूड काफी बेहतर व खुशनुमा रहता है। तनाव व उत्तेजना घटते हैं।
- पीठ के दर्द व दबाव से राहत पाने का भी अच्छा उपाय है।
- स्ट्रैचिंग करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है व उनकी लोच काफी बढ़ जाती है। मांसपेशियों का तनाव घटता है।
- ये व्यायाम कहीं भी, कभी भी किए जा सकते हैं। इनके लिए पसीना बहाने की भी जरूरत नहीं पड़ती।
- 10 मिनट की चहलकदमी भी आपको कब्ज से छुटकारा दिला सकती है।
- आपका पेट साफ रहता है और चेहरे की ताजगी बनी रहती है।
अगले पेज पर पढ़ें सी सैक्शन से कैसे बचें

- कहते हैं कि व्यायाम करने वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय ज्यादा तकलीफ नहीं उठानी पड़ती। उनका प्रसव जल्दी व सुगमता से हो जाता है। सी.सैक्शन की नौबत भी नहीं आती।
- व्यायाम करने से आप गर्भावस्था के बाद भी फिट रहेंगी। फिगर अपने पहले वाले आकार में आ जाएगी और आप मजे से अपनी पुरानी जींस पहन सकेंगी।
- शिशु के व्यायाम से क्या फायदा हो सकता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि शिशु वर्कआउट के दौरान होने वाली आवाजों व कंपन का अनुभव करते हैं।
- व्यायाम करने वाली माताओं के यहां स्वस्थ शिशु जन्म लेते हैं। उन्हें प्रसव के समय नई दुनिया में कदम रखने में कठिनाई नहीं होती और वे जन्म के तनावों से शीघ्र मुक्ति पा लेते हैं।
- मानें न मानें, अध्ययनों से पता चला है कि व्यायाम करने वाली माँओं के शिशु औसत बच्चों से अधिक बुद्धिमान व चुस्त होते हैं। इससे उनकी मांसपेशियों के साथ-साथ दिमागी ताकत भी बढ़ती है।
- ऐसे बच्चे रात को सही समय पर पूरी नींद लेते हैं, कॉलिक नहीं होते और स्वयं को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं।
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