संघर्षों का सामना जिम्मेदारी के साथ

विनीता कहती हैं, मेरी जिम्मेदारियां तो बढ़ी, लेकिन अच्छा लगता है। बहुत सी मुश्किलें आई लेकिन फिर भी मैंने अपना काम पूरी जिम्मेदारी
के साथ किया। घर की पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं थी, उसके बावजूद मैंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से कार्य किया। टाटा पावर विरमानी ट्रस्ट से अपने परिवार की मदद की तथा टाटा पावर स्कॉलरशिप से अपनी पढ़ाई भी पूरी की!

हर पल चुनौतियों से भरा
जब मुझको कोर्डिनेटर बनाया गया तो मैं डर गई कि कैसे कर पाऊंगी क्योंकि कोर्डिनेटर बनकर मुझको 12 या 14 सेंटर तथा 350 से 400
महिलाएं देखनी थीं। अलग अलग क्षेत्र थे, घर से दूर। शुरु में मुश्किल हुई, लेकिन जब मैंने सभी से बात की तो सब ठीक हो गया।

सफलता का मंत्र

  • जो भी करें मेहनत और ईमानदारी 
  • अपनी जिम्मेदारियां जैसी भी हो, जरूर निभाएं
  • चुनौतिटों से घबराएं नहीं, सामना करें

 

जीवन की उपलब्धियां
अनीता कहती हैं कि 28 फरवरी 2015 बेस्ट
कोर्डिनेटर अवार्ड प्राप्ति 7 फरवरी 2016 बेस्ट सीनियर कोर्डिनेटर मान्यता प्राप्ति मेरी उपलब्धियों में शामिल है।

आप भी बन सकती हैं ‘गृहलक्ष्मी ऑफ़ द डे’

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