Topaz Gemstone: सोने की चिड़िया कहे जाने वाले हमारे इस देश में पुरातन काल से ही रत्नो के प्रति विशेष आकर्षण देखने को मिलता है। भारत में पाया जाने वाला ऐसा ही एक प्रमुख रत्न है पुखराज। आइये, इसके ज्योतिष लाभों को जाने इस लेख से।
पुखराज बृहस्पति ग्रह से संबंधित रत्न है। इसे संस्कृत में ‘पुष्पराग, हिन्दी में ‘पुखराज कहा जाता है। चौबीस घंटे तक दूध में रखने पर यदि इसमें क्षीणता एवं फीकापन न आए तो यह असली होता है। पुखराज चिकना, चमकदार, पानीदार, पारदर्शी एवं व्यवस्थित किनारे वाला होता है। भारत में पुखराज ब्रह्मपुत्र महानदी के हिमालय, विंध्याचल, उड़ीसा और बंगाल के क्षेत्रों में मिलता है। विदेशों
में म्यांमार, श्रीलंका, रूस, जापान, स्कॉटलैंड, आयरलैंड, मैक्सिको और ब्राजील आदि क्षेत्रों में पुखराज मिलता है। सबसे उत्तम पुखराज श्रीलंका में मिलता है।
पुखराज के उपरत्न
धिया– हल्का पीला
केसरी– हल्की चमकभरी
केरू– पीतल के रंग का
सोनल– सफेद- पीली किरणें
सुनैला– सफेद रंग का चिकना चमकदार।
अन्य– पुखराज के स्थान पर टाइगर,
सुनहला या पीला हकीक भी धारण कर
सकते हैं।
पुखराज धारण विधि
पुखराज 3,5,7,9 या 12 रत्ती का सोने की अंगूठी में जड़वाकर गुरु पुष्य योग या शुक्ल पक्ष में गुरुवार अथवा पुनवर्सु विशाखा, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में धारण करें। पुखराज की जगह इसका उपरत्न ‘सुनैला भी पुखराज की तरह धारण किया जा सकता है।
पुखराज धारण करने के लाभ
पुखराज धारण करने से प्रेत बाधा व स्त्री सुख में आई बाधा दूर होती है। चिकित्सा शास्त्र में शहद या केवड़ा के साथ पुखराज की भस्म देने से तिल्ली, पाण्डुरोग, खांसी, दंतरोग, पीलिया, बवासीर, मंदाग्नि, पित्त, ज्वर आदि में लाभ होता है। मेष, धनु, मीन, कर्क, वृश्चिक राशि वालों के लिए पुखराज धारण करना लाभप्रद रहता है। यदि किसी विषैले कीड़े ने काट लिया हो तो पुखराज घिस कर लगाने से विष उतर जाता है। पुखराज धारण करने से त्वचा संबंधी रोग जैसे कुष्ठ आदि दूर होते हैं। यह बल, वीर्य और नेत्र ज्योति बढ़ाने वाला होता है। इसे धारण करने से बृहस्पति ग्रह से संबंधित समस्त बाधाओं का निवारण होता है।
पुखराज का ज्योतिषीय विश्लेषण

ज्योतिष शास्त्र में गुरु को ज्ञान, धन, मान-सम्मान, विवाह एवं संतान सुख प्रदान करने वाला ग्रह कहा गया है। जिनकी कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर होती है उन्हें मान-सम्मान एवं धन संबंधी
परेशानियों का सामना बार-बार करना पड़ता है तथा इनकी शिक्षा में भी बाधा आती है। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि गुरु के कमजोर होने की वजह से जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए गुरु को मजबूत बनाना चाहिए। इसके लिए गुरु का रत्न पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है। गुरु के शुभ होने पर भी गुरु का रत्न धारण करना अच्छा माना जाता है। पुखराज गुरु ग्रह के प्रभाव को बढ़ाने वाला होता है। यदि कन्या के विवाह में अनावश्यक विलंब हो रहा हो तो उसे पुखराज पहनना चाहिए। यह धनु राशि एवं मीन राशि वालों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके पहनने से ज्ञान में वृद्धि होती है। जिनका गुरु जन्म के समय पत्रिका में कमजोर है या अशुभ प्रभाव दे रहा है ऐसे जातक को इसके पहनने से शुभत्व की प्राप्ति होती है। इसे राजनीतिज्ञ, न्यायाधीश, प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े व्यक्ति, आईपीएस जैसे व्यक्ति पहन कर लाभान्वित होते हैं। यह रत्न सोचने-समझने की शक्ति को बढ़ाता है। इसे पहनने से बुरे विचार दूर होते हैं। अन्याय के प्रति लड़ने की ताकत बढ़ती है। इस रत्न के साथ मूंगा पहनने से यह साहस की कमी को दूर कर नई ऊर्जा
प्रदान करता है। जो जातक प्रशासनिक सेवाओं में हैं वे भी इसे धारण कर सकते हैं। वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, कुंभ राशि व लग्न वालों को इस रत्न से बचना चाहिए अथवा कुंडली में गुरु की स्थिति को देखकर इसे धारण करना चाहिए। मेष लग्न वालों के लिए गुरु भाग्य यानी नवम भाव का स्वामी होता है। इसकी अशुभता से भाग्य में कमी आती है। अत: भाग्य वृद्धि के लिए इसे पहन सकते हैं। कर्क लग्न वालों के लिए गुरु भाग्येश के साथ षष्टेश भी होता है। अत: पुखराज पहनना शुभ रहता है। धर्म-कर्म में आस्था बढ़ाने के साथ-साथ भाग्य में भी वृद्धि करता है। स्वयं व संतान को भी लाभ पहुंचाता है। इस लग्न के जातक मोती के साथ पुखराज धारण कर शुभ फल पा सकते हैं।
सिंह लग्न वालों के लिए गुरु पंचम यानी विद्या, मनोरंजन का प्रतिनिधित्व करता है। अत: इस क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति पुखराज पहनने से लाभ पा सकते हैं। सिंह लग्न वाले माणिक के साथ पुखराज पहनकर
विशेष लाभ पा सकते हैं। वृश्चिक लग्न वाले जातकों के लिए गुरु धनेश होकर पंचमेश होता है। अत: धन, वाणी, संतान, मनोरंजन भाव के लिए लाभप्रद है। मनोरंजन से जुड़े व्यक्ति लाभ पा सकते हैं। इस लग्न वाले जातक सिंदूरिया मूंगे के साथ पुखराज पहनें। धनु लग्न वालों के लिए लग्न का स्वामी होने के साथसाथ गुरु सुख, माता, भवन, जायदाद का स्वामी भी होता है। जातक स्वतंत्र रूप से पुखराज का लॉकेट बनवाकर गले में धारण कर सकते हैं। मीन लग्न वाले जातकों के लिए गुरु लग्नेश होकर दशमेश भी है। यह व्यापार, पिता, नौकरी, राजनीति का प्रतिनिधित्व करता है। उच्च प्रशासनिक सेवा वाले जातक इस रत्न को पहन सकते हैं। जातक मूंगा व मोती के साथ पुखराज पहन कर अनेक लाभ पा सकते हैं। अन्य लग्न व राशि वाले (वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, कुंभ राशि व लग्न) जातकों के लिए पुखराज अकारक होने से पहनना अशुभ भी हो सकता है। पुखराज गुरु की महादशा में या किसी भी दशा में गुरु की अंतर्दशा हो तो इस रत्न को धारण किया जा सकता है।
असली पुखराज की पहचान
असली पुखराज की पहचान उस पर मौजूद दाग-धब्बों, धुंधलेपन व जाल से की जाती है लेकिन पुखराज का रंग छोड़ना उसके नकली होने की पहचान नहीं है बल्कि ये उसका पैदाइशी गुण होता है। असली पुखराज से दिन के समय किरण निकलती हुई प्रतीत होती है। असली पुखराज में कोई न कोई रेशा अवश्य होता है। असली पुखराज को धूप में रखने पर उसमें से किरणें सी फूटती प्रतीत होती हैं। असली पुखराज की पहचान करने के लिए शीशे के एक गिलास में गाय का दूध रखें। इसके अंदर पुखराज को डाल दें। अगर पुखराज असली होगा तो एक से डेढ़ घंटे में पुखराज की किरण ऊपर से छिटकती नजर आएगी। पुखराज को हाथ में लेकर हिलाएं तो भार महसूस होगा। असली पुखराज चिकना और साफ होता है। इसे अंगूठा और कनिष्ठा से दबाने पर छिटक कर दूर जाकर गिरता है। पीला पुखराज सरसों के फूल के समान गहरा पीला दिखता है। पुखराज का पीला रंग हरापन लिए नजर आए तो ऐसा पुखराज बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। पुखराज अगर दानेदार अथवा परतदार नजर आए तो इसे भी नहीं खरीदना चाहिए। उत्तम कोटि के पुखराज को आग पर गर्म करने पर बीच में यह अस्त होते सूर्य की तरह लाल नजर आता है।
