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क्यों है बौद्घ धर्म में स्तूप का इतना महत्त्व?

स्तूप का शाब्दिक अर्थ होता है- ‘किसी वस्तु का ढेर। जिसका प्रयोग पवित्र बौद्घ अवशेषों को रखने के लिए किया जाता है। स्तूप का बौद्घ धर्म में विशेष महत्त्व है। आइए लेख में इस पर विस्तार से चर्चा करें।

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मनुष्य जाति के पहले मनोवैज्ञानिक- बुद्घ

बुद्ध पहले मनुष्य हैं तथा मनुष्य जाति के पहले मनोवैज्ञानिक हैं। जिन्होंने मनुष्य का रोग क्या है? मनुष्य का रोग कहां है? मनुष्य दुखी क्यों है? आदि प्रश्नों का उत्तर दिया। बुद्ध ने इसको अविष्कृत किया इसका कारण जाना तथा निदान भी किया।

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दीवाली पर्व से जुड़ी मान्यताएं

हम बचपन से यही पढ़ते और सुनते आएं हैं कि दीवाली का त्योहार भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध करने और चौदह वर्ष का बनवास काट कर अपने भाई लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ अयोध्या वापस लौटने की खुशी के उपलक्ष्य में मनाया जाता है परन्तु इस त्योहार पर दीपक जलाकर खुशियां मनाने की परंपरा के साथ अन्य भी कई ऐतिहासिक व पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

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