वे प्रेमी -प्रेमिका थे। उनमें वादे थे, इच्छाएं थीं, बरसों से एकत्रित वाष्प थी। अगर यह चरित्र हीनता है तो इस चरित्रहीनता के एक पहलू पर सीमा थी और दूसरे पर रामेन्द्र। भाभी अगर यह कहती कि मेरे घर ना तुम आना और न सीमा को लाना, मगर भाभी ने सिर्फ सीमा को दोषी ठहरा कर फैसला सुनाया। उसे लगा कि यह अधूरा इंसाफ है।
